अमित मिश्रा
O- 20 घनमीटर के परमिट पर 30 घनमीटर तक खनिज परिवहन का आरोप; 1,000 वाहनों के आंकड़े के आधार पर एसोसिएशन ने जताई भारी राजस्व क्षति की आशंका
सोनभद्र (उत्तर प्रदेश) । देश के प्रमुख खनिज उत्पादक जिलों में शामिल सोनभद्र में गिट्टी-बालू के परिवहन को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हुआ है। सोनभद्र ट्रक ऑनर्स एसोसिएशन ने जिलाधिकारी को दिए शिकायती पत्र में निर्धारित परमिट से अधिक खनिज परिवहन किए जाने का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। एसोसिएशन के मुताबिक यदि शिकायतों की पुष्टि होती है तो सरकार को खनिज मूल्य, रॉयल्टी, शास्ति और अन्य वैधानिक देयताओं के स्तर पर करीब 200 करोड़ रुपये तक के सालाना संभावित राजस्व नुकसान की जांच की आवश्यकता है।
एसोसिएशन के अध्यक्ष दिनेश चंद्र पाठक के हस्ताक्षर वाले पत्र में कहा गया है कि जिले में करीब 1,000 वाहन प्रतिदिन गिट्टी-बालू के परिवहन में लगे हुए हैं। पत्र में आरोप लगाया गया है कि निर्धारित परमिट मात्रा से अधिक खनिज लोड किए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं।

20 घनमीटर का परमिट, 30 घनमीटर तक परिवहन का आरोप
एसोसिएशन ने पत्र में दावा किया है कि कुछ मामलों में करीब 20 घनमीटर के परमिट के सापेक्ष लगभग 30 घनमीटर तक खनिज परिवहन किए जाने की स्थिति सामने आ रही है। यानी प्रति वाहन लगभग 10 घनमीटर अतिरिक्त खनिज परिवहन का आरोप है।
पत्र में दिए गए अनुमान के अनुसार यदि प्रत्येक वाहन में औसतन 10 घनमीटर अतिरिक्त खनिज और न्यूनतम 500 रुपये प्रति घनमीटर का मूल्य माना जाए तो एक वाहन पर करीब 5,000 रुपये का अतिरिक्त खनिज बैठता है।

1,000 वाहनों के आधार पर एसोसिएशन ने इसे करीब 50 लाख रुपये प्रतिदिन का अतिरिक्त खनिज मूल्य बताया है। 30 दिनों में यह करीब 15 करोड़ रुपये और सालभर में लगभग 182 करोड़ रुपये बैठता है। इसी वजह से एसोसिएशन ने संभावित राजस्व नुकसान के मामले में करीब 200 करोड़ रुपये के स्तर पर जांच की मांग उठाई है।
हालांकि 200 करोड़ रुपये की राशि वास्तविक सरकारी राजस्व हानि के रूप में स्थापित तथ्य नहीं है। यह एसोसिएशन द्वारा दिए गए अनुमान और गणना पर आधारित संभावित नुकसान है। वास्तविक राजस्व क्षति का निर्धारण विभागीय जांच और सरकारी रिकॉर्ड के सत्यापन के बाद ही किया जा सकेगा।
सिर्फ सड़क पर जांच नहीं, पूरे नेटवर्क का रिकॉर्ड खंगालने की मांग
ट्रक ऑनर्स एसोसिएशन ने जिलाधिकारी से मांग की है कि मामले की जांच केवल रास्ते में वाहनों को पकड़ने तक सीमित न रहे। लोडिंग प्वाइंट से लेकर गंतव्य तक पूरे परिवहन नेटवर्क की जांच कराई जाए।
इसके लिए पत्र में-
- E-Transit Pass
- E-MM-11
- फार्म-सी परमिट
- वजन पर्ची
- लोडिंग प्वाइंट के रिकॉर्ड
- जांच चौकियों के रिकॉर्ड
- CCTV फुटेज
- डिजिटल रिकॉर्ड
का वाहनवार मिलान कराने की मांग की गई है।
एसोसिएशन का कहना है कि यदि किसी वाहन में परमिट से अधिक खनिज मिलता है तो यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि अतिरिक्त खनिज किस लोडिंग प्वाइंट से और किस स्तर पर वाहन में लोड हुआ।

अधिकारियों और लोडिंग प्वाइंट की भूमिका की भी जांच की मांग
पत्र में कहा गया है कि यदि जांच में किसी अधिकारी, कर्मचारी या लोडिंग प्वाइंट संचालक की लापरवाही अथवा नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित की जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
एसोसिएशन ने संबंधित अवधि के परिवहन अभिलेखों की जांच कर वास्तविक अतिरिक्त खनिज परिवहन का आंकड़ा निकालने और उसके आधार पर सरकार को होने वाली खनिज मूल्य, रॉयल्टी, शास्ति एवं अन्य वैधानिक देयताओं की संभावित क्षति का आकलन कराने की मांग की है।
चार राज्यों की सीमा से जुड़े सोनभद्र में जांच व्यवस्था पर भी सवाल
एसोसिएशन ने अपने पत्र में सोनभद्र की भौगोलिक स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा है कि जिला चार राज्यों से घिरा है और यहां से बड़ी मात्रा में खनिज दूसरे राज्यों की ओर जाता है। पत्र में सीमावर्ती क्षेत्रों में जांच व्यवस्था को मजबूत करने तथा खनिज जांच चौकियों को प्रभावी ढंग से संचालित करने की मांग की गई है।
एसोसिएशन का कहना है कि इससे वैध परिवहन करने वाले ट्रक मालिकों को भी राहत मिलेगी और नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों पर प्रभावी नियंत्रण हो सकेगा।
DM से निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग
ट्रक ऑनर्स एसोसिएशन ने जिलाधिकारी से पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। एसोसिएशन चाहता है कि लोडिंग प्वाइंट से लेकर खनिज जांच चौकी और गंतव्य तक वाहन के सभी अभिलेखों का मिलान कराया जाए तथा जांच में जिसकी भी जिम्मेदारी प्रमाणित हो, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
जिलाधिकारी को सोनभद्र ट्रक ऑनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष दिनेश चंद्र पाठक के नेतृत्व में पत्र सौंपा गया अंकुर कश्यप, राजेश कुमार, सुखराम तिवारी, राम लोचन पाण्डेय , मनीष सिंह, अभिषेक चौबे, देवेंद्र कुमार पाठक, सुमेर मौर्य, अवनीश कुमार पांडेय, नीरज यादव, दिनेश कुमार अभिषेक कुमार सिंह, आनंद देव पांडेय, सुरेंद्र नाथ पाण्डेय सहित दर्जनों लोग शामिल रहे ।
बड़ी बात
करीब 200 करोड़ रुपये की संभावित सालाना राजस्व क्षति का सवाल अब सरकारी जांच के केंद्र में आ सकता है। लेकिन यह आंकड़ा फिलहाल एसोसिएशन की गणना है। यदि प्रशासनिक जांच में परमिट से अधिक खनिज परिवहन की पुष्टि होती है, तभी वास्तविक सरकारी राजस्व नुकसान का आंकड़ा सामने आएगा।








