कभी नक्सलियो की गोलियो की तड़तड़ाहट से गुजने वाले इलाके में ज्ञान की नई रोशनी बनी पुस्तकालय

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नवीन कुमार

पुस्तकालय की स्थापना से गांवों में बन रहा पढ़ाई का शहरी माहौल


कोन ब्लाक की 10 ग्राम पंचायतों में खुले पुस्तकालय

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से लेकर महापुरुषों के जीवन से रूबरू हो रही युवा पीढ़ी

कोन/सोनभद्र(उत्तर प्रदेश)। झारखण्ड राज्य की सीमा से लगे और कभी नक्सल गतिविधियों के लिए पहचाने जाने वाले सोनभद्र के कोन ब्लाक के अति सुदूर ग्रामीण इलाकों में अब शिक्षा और ज्ञान की नई रोशनी पहुंच रही है। प्रदेश सरकार की पहल पर ग्राम पंचायतों के पंचायत भवनों में खोले गए पुस्तकालय ग्रामीण बच्चों और युवाओं के लिए पढ़ाई का नया केंद्र बन रहे हैं। कोन ब्लाक की 10 ग्राम पंचायतों—चन्नी, पिंडारी, मझिगवां, बरवाखाड़, खेतकटवा, मिश्री, मीटिंहिनिया, चेरवाडीह, करहिया और महुद्दीनपुर में पुस्तकालय स्थापित किए गए हैं।


इन पुस्तकालयों के माध्यम से सरकार का उद्देश्य गांव के बच्चों, युवाओं और आम ग्रामीणों को किताबों से जोड़ना तथा उन्हें शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है। दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों में जहां पहले अच्छी किताबों और अध्ययन सामग्री तक पहुंच सीमित थी, वहीं अब पंचायत भवन में ही विभिन्न विषयों की पुस्तकें उपलब्ध होने लगी हैं।

नक्सली पहचान से शिक्षा के केंद्र की ओर बढ़ते गांव
कोन क्षेत्र के कई गांव कभी दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और नक्सली गतिविधियों के कारण चर्चा में रहे हैं। ऐसे क्षेत्रों में पुस्तकालय खुलना केवल किताबें उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे ग्रामीण समाज में सकारात्मक बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। जहां कभी ग्रामीण इलाकों में विकास और सुरक्षा की चर्चा प्रमुख होती थी, वहीं अब उसी क्षेत्र में बच्चे किताब लेकर पढ़ाई करते दिखाई दे रहे हैं। पंचायत भवनों में बने पुस्तकालय गांवों को आधुनिक शिक्षा व्यवस्था से जोड़ने का माध्यम बन रहे हैं।


प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में भी मिलेगी मदद
पुस्तकालयों में सामान्य ज्ञान, इतिहास, भूगोल, विज्ञान, साहित्य और महापुरुषों के जीवन से संबंधित पुस्तकों के साथ विद्यार्थियों के उपयोग की अन्य अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई गई है। इससे ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
ग्रामीण बच्चों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह रहती है कि उन्हें पढ़ाई के लिए आवश्यक किताबें और शांत वातावरण गांव में ही उपलब्ध नहीं हो पाता। पुस्तकालय इस कमी को दूर करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।


महापुरुषों के विचारों से रूबरू होगी नई पीढ़ी
पुस्तकालयों में उपलब्ध पुस्तकों के जरिए बच्चे देश के स्वतंत्रता सेनानियों, समाज सुधारकों, वैज्ञानिकों, साहित्यकारों और अन्य महापुरुषों के जीवन एवं संघर्ष को जान सकेंगे। इससे बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित होने के साथ-साथ उनके व्यक्तित्व और सोच के विकास में भी मदद मिलेगी।


लाखों रुपये खर्च कर तैयार किया गया अध्ययन का माहौल
प्रदेश सरकार की पहल पर इन पुस्तकालयों को विकसित करने में लाखों रुपये खर्च किए गए हैं। पंचायत भवनों में फर्नीचर, अलमारियों और पुस्तकों की व्यवस्था कर बच्चों के लिए ऐसा वातावरण तैयार करने का प्रयास किया गया है, जो उन्हें शहरों में मिलने वाली अध्ययन सुविधाओं के करीब ला सके।


ग्रामीणों का कहना है कि यदि पुस्तकालयों में नियमित रूप से नई किताबें उपलब्ध कराई जाएं और इनके संचालन की उचित व्यवस्था हो तो आने वाले वर्षों में इसका सीधा लाभ गांव के विद्यार्थियों को मिलेगा।


पुस्तकालय से बदलेगी गांव की तस्वीर
कोन क्षेत्र में खुले ये पुस्तकालय ग्रामीण विकास की बदलती तस्वीर को भी दर्शा रहे हैं। सड़क, बिजली और अन्य मूलभूत सुविधाओं के साथ यदि शिक्षा और ज्ञान के संसाधन गांव तक पहुंचते हैं तो ग्रामीण युवाओं को आगे बढ़ने के बेहतर अवसर मिल सकते हैं।
नक्सली गढ़ के रूप में पहचाने जाने वाले क्षेत्र से लेकर शिक्षा और प्रतियोगी तैयारी के केंद्र बनने की ओर बढ़ते गांवों की यह तस्वीर निश्चित रूप से बदलाव की कहानी कह रही है। जरूरत है कि इन पुस्तकालयों का नियमित संचालन हो, पुस्तकों का संग्रह समय-समय पर बढ़ाया जाए और बच्चों को प्रतिदिन यहां पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। तभी सरकार की इस पहल का वास्तविक उद्देश्य पूरा हो सकेगा।

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