म्योरपुर में बाल श्रम मुक्त गांव बनाने पर मंथन, पंचायत स्तर पर समिति गठन पर जोर

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“बनवासी सेवा आश्रम में हुई बैठक, ग्राम पंचायत, ब्लॉक और जिला स्तर पर समितियां बनाने पर बनी सहमति”

म्योरपुर, सोनभद्र। बाल श्रम मुक्त गांव बनाने के उद्देश्य से शनिवार को गोविंदपुर स्थित बनवासी सेवा आश्रम के विचित्र महाकक्ष में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में ग्राम पंचायत स्तर पर बाल कल्याण एवं संरक्षण समिति के गठन को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में श्रम प्रवर्तन अधिकारी मनोज शर्मा और नीति आयोग से जुड़ी पूजा शर्मा ने सोनभद्र को बाल श्रम मुक्त बनाने के लक्ष्य पर ग्रामीणों से संवाद किया।
वक्ताओं ने कहा कि बाल श्रम उन्मूलन के लिए केवल प्रशासनिक कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि ग्राम पंचायत के लोगों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। गांवों में बाल श्रम के मामलों की पहचान, बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा, कौशल विकास और पुनर्वास जैसे मुद्दों पर पंचायत स्तर पर नियमित चर्चा होनी चाहिए।
कई ग्रामीणों को बाल श्रम की कानूनी परिभाषा की पूरी जानकारी नहीं है, इसलिए पंचायत प्रतिनिधियों को जागरूक कर इस मुहिम को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया। इसके लिए ग्राम पंचायत के साथ-साथ ब्लॉक और जिला स्तर पर भी समितियों के गठन और समन्वय पर सहमति बनी।
बैठक में बच्चों को कौशल विकास और सरकारी योजनाओं से जोड़ने तथा बालक-बालिकाओं के लिए उपलब्ध सहायता व प्रोत्साहन योजनाओं की जानकारी ग्रामीणों तक पहुंचाने की जरूरत बताई गई।
बनवासी सेवा आश्रम की शुभा प्रेम ने संस्था की ओर से हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि गांव-गांव जागरूकता और सामुदायिक सहभागिता से बच्चों को श्रम से मुक्त कर शिक्षा से जोड़ा जाएगा।
इस अवसर पर श्रम विभाग के तुषार श्रीवास्तव, बनवासी सेवा आश्रम से रामेश्वर प्रसाद, विमल सिंह, देवनाथ सिंह, जगत नारायण विश्वकर्मा, मुस्तफा, कृष्णा, केवला प्रसाद, उमेश चौबे, रमेश यादव, मान मति, सुरेश, राम जतन, कैलाश, शेर सिंह, राम सुंदर आदि मौजूद रहे।

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