पुलिस अभिरक्षा मे सीज ट्रक सड़क पर कैसे भर रही है फर्राटा ?

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रवि पाण्डेय / अमित मिश्रा

O- एआरटीओ ने 14 फरवरी को रॉबर्ट्सगंज कोतवाली में कराया था बंद, 10 जुलाई को वही वाहन फर्जी नंबर प्लेट के साथ खनन विभाग ने पकड़ा

O- वाहन का असली नंबर NL01AH6755, मौके पर लगी थी NL01AK1698 की नंबर प्लेट; 14 जुलाई को ₹84,250 का ई-चालान जमा, पूरे मामले में उठे गंभीर सवाल

सोनभद्र (उत्तरप्रदेश) । परिवहन और खनन विभाग की कार्रवाई से जुड़े दस्तावेजों ने सोनभद्र में एक ऐसे मामले को सामने ला दिया है, जिसमें एक ही ट्रक की जब्ती, नंबर प्लेट और उसके थाने में बंद होने की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। दस्तावेजों के मुताबिक, जिस वाहन को परिवहन विभाग ने 14 फरवरी 2026 को सीज कर रॉबर्ट्सगंज कोतवाली के सुपुर्द किया था, वही वाहन करीब चार महीने बाद 10 जुलाई को खनन विभाग की कार्रवाई में सड़क पर गिट्टी लदा मिला।

मामला यहीं खत्म नहीं होता। खनन विभाग की जांच में मौके पर ट्रक पर लगी नंबर प्लेट NL01AK1698 बताई गई, जबकि दस्तावेजों की जांच में वाहन का वास्तविक पंजीकरण नंबर NL01AH6755 सामने आया। इसके बाद वाहन को चोपन थाने में बंद कराया गया। अब सवाल यह है कि यदि NL01AH6755 वाहन 14 फरवरी से रॉबर्ट्सगंज कोतवाली में सीज था, तो वह 10 जुलाई को सड़क पर कैसे पहुंचा?

14 फरवरी की कार्रवाई: एआरटीओ ने किया था सीज

उपलब्ध ई-चालान दस्तावेज में वाहन संख्या NL01AH6755 दर्ज है। दस्तावेज के अनुसार वाहन के मालिक का नाम विनोद कुमार सिंह दर्ज है और वाहन की श्रेणी Goods Carrier है।

ई-चालान में वाहन के खिलाफ ओवरलोडिंग सहित कई आरोप दर्ज हैं। दस्तावेज में ओवरलोडिंग के लिए ₹44,000, टैक्स संबंधी पेनल्टी ₹18,000, टैक्स रसीद प्रस्तुत न करने पर ₹250, परमिट संबंधी उल्लंघन पर ₹5,000, परमिट की शर्तों के विपरीत संचालन पर ₹10,000, बिना बीमा वाहन चलाने पर ₹2,000 तथा HSRP नंबर प्लेट नहीं लगे होने पर ₹5,000 का उल्लेख है।

दस्तावेज में कुल राशि ₹84,250 दर्ज है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ई-चालान में चालान की तारीख 14 फरवरी 2026 और घटनास्थल 62, SH-5A, Tagore Nagar, Robertsganj दर्ज है। दस्तावेज में प्रवर्तन अधिकारी के रूप में मनोज कुमार, PTO का नाम भी दर्ज है।

चार महीने बाद खनन विभाग की कार्रवाई में वही वाहन?

मामला तब पेचीदा हो गया जब 10 जुलाई 2026 को खनन विभाग की जांच में गिट्टी लदा एक ट्रक पकड़ा गया। मौके पर वाहन पर नंबर प्लेट NL01AK1698 लगी थी।

लेकिन जांच के दौरान वाहन के वास्तविक दस्तावेजों से उसका नंबर NL01AH6755 सामने आया।

यानी सवाल सिर्फ ओवरलोडिंग का नहीं रहा, बल्कि एक वाहन पर दूसरे वाहन का पंजीकरण नंबर इस्तेमाल किए जाने की आशंका भी सामने आई।

उपलब्ध वाहन पंजीकरण रिकॉर्ड के अनुसार:

  • NL01AH6755 – मालिक: विनोद कुमार सिंह
  • NL01AK1698 – मालिक: सौरभ सिंह
  • रिकॉर्ड में सौरभ सिंह के पिता का नाम विनोद कुमार सिंह दर्ज है।

इस तरह दोनों वाहनों के दस्तावेजों में पारिवारिक संबंध भी दर्ज दिखाई देता है। हालांकि, फर्जी नंबर प्लेट किसने लगाई, क्यों लगाई और वाहन को इस नंबर के साथ किसने सड़क पर चलाया – यह जांच का विषय है।

सबसे बड़ा सवाल: सीज वाहन थाने से बाहर कैसे आया?

यही इस पूरे प्रकरण का सबसे गंभीर पहलू है।

यदि NL01AH6755 को 14 फरवरी को एआरटीओ द्वारा सीज कर रॉबर्ट्सगंज कोतवाली के सुपुर्द किया गया था, तो सामान्य तौर पर यह जानना जरूरी है कि:

14 फरवरी से 10 जुलाई के बीच वाहन को कोतवाली परिसर से बाहर किसकी अनुमति से निकाला गया?

और यदि वाहन को बाहर निकालने की अनुमति दी गई थी, तो-

किस अधिकारी ने अनुमति दी?

रिहाई का कोई आदेश था या नहीं?

वाहन का सुपुर्दगी/रिहाई रजिस्टर क्या कहता है?

वाहन 10 जुलाई को सड़क पर किस परिस्थिति में पहुंचा?

और सबसे अहम-

अगर वाहन रॉबर्ट्सगंज कोतवाली में बंद था, तो खनन विभाग ने उसी वाहन को चोपन थाना में कैसे सीज कर दिया?

14 जुलाई को जमा हुआ ₹84,250 का चालान, फिर सवाल और गहरा

मामले को और गंभीर बनाने वाला दस्तावेज परिवहन विभाग की 14 जुलाई 2026 की ई-चालान जमा रसीद है।

रसीद के अनुसार:

ई-चालान नंबर: UP299699260214104200
भुगतान की तारीख: 14 जुलाई 2026
प्राप्त राशि: ₹84,250
वाहन: NL01AH6755
वाहन स्वामी/चालक: विनोद कुमार सिंह

रसीद में भुगतान माध्यम ONLINE_CASH_AT_OFFICE दर्ज है।

यहां एक महत्वपूर्ण सवाल सामने आता है-

जब वाहन 10 जुलाई को खनन विभाग की कार्रवाई के बाद चोपन थाने में बंद था, तो 14 जुलाई को परिवहन विभाग के पुराने चालान की राशि जमा कर वाहन को छुड़ाने की प्रक्रिया किस आधार पर हुई?

क्या रॉबर्ट्सगंज कोतवाली में वाहन की जब्ती का रिकॉर्ड अपडेट हुआ था?

क्या वाहन की वास्तविक स्थिति परिवहन विभाग के रिकॉर्ड में दर्ज की गई?

क्या दोनों विभागों के बीच वाहन की स्थिति को लेकर कोई आधिकारिक पत्राचार हुआ?

इन सवालों का जवाब जांच से ही सामने आ सकता है।

एक ही वाहन, दो नंबर और दो थाने-रिकॉर्ड में आखिर सच क्या है?

उपलब्ध दस्तावेज पूरे मामले को तीन स्तरों पर जांच की मांग करते हैं-

1. परिवहन विभाग

14 फरवरी को वाहन को सीज कर कोतवाली भेजने के बाद उसकी सुपुर्दगी और रिहाई का रिकॉर्ड क्या है?

2. रॉबर्ट्सगंज कोतवाली

यदि वाहन वास्तव में कोतवाली में बंद था तो वह 10 जुलाई को सड़क पर कैसे पहुंचा?

3. खनन विभाग

10 जुलाई को पकड़े गए वाहन की पहचान, इंजन/चेसिस नंबर और नंबर प्लेट की जांच में क्या-क्या तथ्य सामने आए?

इसके अलावा NL01AK1698 नंबर वाले वाहन और NL01AH6755 नंबर वाले वाहन की वास्तविक भौतिक पहचान-विशेषकर चेसिस और इंजन नंबर-की स्वतंत्र जांच इस पूरे मामले की अहम कड़ी हो सकती है।

कोतवाली प्रभारी ने टिप्पणी से किया इनकार

मामले को लेकर रॉबर्ट्सगंज कोतवाली प्रभारी से जब पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो उन्होंने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।

वहीं खनन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान जो तथ्य सामने आए, उन्हीं के आधार पर कार्रवाई की गई।

अब निगाहें इस बात पर हैं कि परिवहन विभाग और पुलिस के रिकॉर्ड इस पूरे घटनाक्रम को किस तरह स्पष्ट करते हैं।

जांच के घेरे में कौन-कौन से सवाल?

◆ 14 फरवरी को सीज NL01AH6755 चार महीने बाद सड़क पर कैसे आया?
◆ क्या वाहन वास्तव में रॉबर्ट्सगंज कोतवाली में बंद था?
◆ यदि था तो उसे बाहर निकालने की अनुमति किसने दी?
◆ 10 जुलाई को वाहन पर NL01AK1698 की नंबर प्लेट क्यों लगी थी?
◆ क्या यह नंबर प्लेट फर्जी थी? इसकी जांच किस स्तर पर हुई?
◆ NL01AK1698 के वास्तविक वाहन और NL01AH6755 के बीच क्या संबंध है?
◆ दोनों वाहनों के इंजन और चेसिस नंबर की मिलान रिपोर्ट क्या कहती है?
◆ 10 जुलाई को चोपन थाने में वाहन की सुपुर्दगी किस आधार पर हुई?
◆ 14 जुलाई को ₹84,250 का भुगतान किस वाहन की रिहाई के लिए किया गया?
◆ रॉबर्ट्सगंज कोतवाली और चोपन थाने के रिकॉर्ड में वाहन की स्थिति क्या दर्ज है?

यह मामला केवल ओवरलोडिंग के ₹84,250 के चालान तक सीमित नहीं दिखाई देता। उपलब्ध दस्तावेजों में दर्ज घटनाक्रम जब्ती, वाहन की सुपुर्दगी, नंबर प्लेट और वाहन की वास्तविक मौजूदगी को लेकर कई सवाल खड़े करता है।

फिलहाल किसी अधिकारी या वाहन स्वामी पर अनियमितता की अंतिम जिम्मेदारी तय करना जांच का विषय है। लेकिन दस्तावेजों के आधार पर इतना सवाल जरूर बनता है-

“जिस ट्रक को 14 फरवरी को थाने में बंद बताया गया, वह 10 जुलाई को सड़क पर कैसे मिला?”

अब जरूरत सिर्फ चालान की रकम जमा कराने की नहीं, बल्कि पूरे रिकॉर्ड की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की है।

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