नमामि गंगे परियोजना में श्रमिकों के शोषण का आरोप

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कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर एडीएम को सौंपा ज्ञापन

सोनभद्र -। नमामि गंगे योजना के अंतर्गत जल जीवन मिशन की झीलों-बीजपुर परियोजना में कार्यरत श्रमिकों ने सोमवार को कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन कर अपनी विभिन्न मांगों को लेकर अपर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। श्रमिकों ने परियोजना की कार्यदायी संस्था जीवीपीआर इंजीनियरिंग लिमिटेड पर श्रम कानूनों के उल्लंघन, कम मानदेय देने तथा कर्मचारियों के शोषण का आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी से हस्तक्षेप की मांग की।
बताया कि दुद्धी तहसील क्षेत्र के विभिन्न गांवों के स्थानीय युवक झीलों-बीजपुर परियोजना के इंटेक वेल, वाटर ट्रीटमेंट प्लांट (डब्ल्यूटीपी) तथा विभिन्न सीडब्ल्यूआर स्थलों पर पंप संचालक के रूप में कार्यरत हैं। श्रमिकों का आरोप है कि उनसे प्रतिदिन 12 घंटे तथा महीने के सभी 30 दिन कार्य कराया जाता है, जबकि साप्ताहिक अवकाश एवं त्योहारों पर भी छुट्टी नहीं दी जाती। इसके बावजूद उन्हें मात्र 10 से 12 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जा रहा है, जो श्रम मानकों के अनुरूप नहीं है।
श्रमिकों ने आरोप लगाया कि कंपनी द्वारा कर्मचारियों का भविष्य निधि (पीएफ) जमा नहीं किया जा रहा है। नियुक्ति पत्र भी उपलब्ध नहीं कराया गया है और श्रम कानूनों के तहत मिलने वाली अन्य सुविधाओं से भी वंचित रखा गया है। उनका कहना है कि अपने अधिकारों की मांग करने पर नौकरी से निकालने की धमकी दी जाती है, जिससे कर्मचारियों में भविष्य को लेकर असुरक्षा का माहौल है।
श्रमिकों ने कहा कि आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र होने के कारण रोजगार के अवसर सीमित हैं और अधिकांश परिवारों की आजीविका इसी नौकरी पर निर्भर है। उन्होंने प्रशासन से कंपनी की जांच कराकर श्रम कानूनों के अनुरूप न्यूनतम वेतन, पीएफ, नियुक्ति पत्र, साप्ताहिक अवकाश तथा अन्य वैधानिक सुविधाएं सुनिश्चित कराने की मांग की।
प्रदर्शन में अवधेश कुमार, कृष्णा कुमार, पवनेश कुमार, संजीव कुमार, दिनेश कुमार, संजीत, सहित बड़ी संख्या में परियोजना के श्रमिक मौजूद रहे।

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