नवीन कुमार
जन चौपाल में ग्रामीणों की समस्याएं सुन अधिकारियों को दी नसीहत
कोन को नगर पंचायत बनाने की जरूरत बताई, विकास कार्यों में अनावश्यक अनुमति पर उठाए सवाल
कोन/सोनभद्र(उत्तर प्रदेश)। शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए अधिकारियों को संवेदनशील होकर कार्य करना होगा। जनता अपनी समस्या लेकर अधिकारियों के पास समाधान की उम्मीद से आती है, ऐसे में उन्हें कानून और नियमों का हवाला देने के बजाय उनकी समस्याओं का निराकरण करना चाहिए। अधिकारी इतने सौभाग्यशाली हैं कि उन्हें अपने पद के माध्यम से दुखी और जरूरतमंद लोगों की सहायता करने का अवसर मिला है।
यह बातें मंडलायुक्त राजेश प्रकाश ने शनिवार रात्रि पीएम श्री राजकीय इंटर कॉलेज परिसर में आयोजित ‘सरकार आपके द्वार’ कार्यक्रम के तहत जन चौपाल में कहीं। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों और योजनाओं के क्रियान्वयन में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका अधिकारियों की होती है। यदि कोई अधिकारी निष्पक्ष और ईमानदारी से कार्य करे तो आम जनता का विश्वास शासन-प्रशासन पर और अधिक मजबूत होगा।
मंडलायुक्त ने कहा कि कई बार फरियादी किसी अधिकारी के प्रति पहले से बनी नकारात्मक धारणा के कारण उसकी कार्यशैली पर भी संदेह करने लगते हैं। इसलिए अधिकारियों को अपने व्यवहार और कार्यों से जनता का विश्वास जीतना होगा। उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर के अधिकारी को अपनी जिम्मेदारी अधीनस्थ कर्मचारियों पर छोड़कर नहीं बैठना चाहिए। पटवारी, सिपाही अथवा छोटे कर्मचारियों के भरोसे पूरा तंत्र नहीं चल सकता।
अधिकारियों को स्वयं ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर लोगों की समस्याएं सुननी चाहिए और उनका समयबद्ध समाधान करना चाहिए।
जन चौपाल में विकास कार्यों में वन विभाग की भूमिका का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। इस पर मंडलायुक्त ने स्पष्ट कहा कि जब तक वह यहां हैं, विकास कार्यों में अनावश्यक बाधाएं नहीं आने दी जाएंगी।
उन्होंने कहा कि पहले से निर्मित सड़कों और सार्वजनिक सुविधाओं के पुनर्निर्माण अथवा चौड़ीकरण के लिए बार-बार अनुमति की प्रक्रिया विकास में अवरोध उत्पन्न करती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अंग्रेजी शासनकाल में बने कई पुल और सड़कें आज भी मौजूद हैं, ऐसे में पूर्व से निर्मित मार्गों के विकास कार्यों में अनावश्यक अनुमति की शर्तों पर पुनर्विचार होना चाहिए। उन्होंने मौजूद डीएफओ से भी आग्रह किया कि जहां पहले से सड़कें बनी हुई हैं, वहां विकास कार्यों के लिए अनावश्यक अनुमति की बाध्यता न बनाई जाए।
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वन भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वन विभाग किसी गरीब की झोपड़ी नहीं उजाड़ेगा, लेकिन सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा करने वालों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
मंडलायुक्त ने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति गलत अथवा अवैध कार्य के लिए दबाव बनाता है तो उसे बार-बार तारीख देने के बजाय स्पष्ट रूप से बता दिया जाए कि उसका कार्य नियमों के विपरीत होने के कारण नहीं किया जा सकता। वहीं पात्र और जरूरतमंद लोगों की समस्याओं का तत्काल समाधान सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने कोन क्षेत्र के विकास की चर्चा करते हुए कहा कि कोन ग्राम पंचायत के बजाय नगर पंचायत बनने की सभी संभावनाएं रखता है। यदि कोन को नगर पंचायत का दर्जा मिल जाता है तो क्षेत्र की कई बुनियादी समस्याएं स्वतः दूर हो जाएंगी और विकास कार्यों को नई गति मिलेगी।
इस दौरान मंडलायुक्त ने ग्रामीणों की समस्याओं को गंभीरता से सुना। ग्रामीणों ने नहर खुदाई, हर घर नल योजना की खामियां, अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी, विद्यालयों में शिक्षकों की अनुपलब्धता, जर्जर सड़कें, पुल निर्माण, बिजली के झुके पोल, नग्न तारों और जले ट्रांसफार्मरों की समस्याएं उठाईं। मंडलायुक्त ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को आवश्यक निर्देश देते हुए समस्याओं के शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया।
इस कार्यक्रम में सदर विधायक भूपेश चौबे, कुसुम शर्मा, लक्ष्मी जायसवाल, रामलाल चेरो, शशांक शेखर मिश्रा सहित विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।






