सेवादार अजीत सिंह भण्डारी बोले- गुरु जी का बलिदान अन्याय के आगे झुकना न सिखाकर धर्म रक्षा का संदेश देता है

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420वें शहीदी दिवस पर गुरु अर्जुन देव जी को श्रद्धांजलि, सोनभद्र में 40 दिन चला सुखमनी साहिब का पाठ, लंगर-मीठे शरबत का आयोजन

सोनभद्र। सिख धर्म के पांचवें गुरु, श्री गुरु अर्जुन देव जी का 420वां शहीदी दिवस गुरुद्वारा सोनभद्र में श्रद्धा व उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर संगत द्वारा लंगर का आयोजन किया गया और आने-जाने वाले श्रद्धालुओं को मीठे शरबत का प्रसाद पिलाया गया।

शहीदी दिवस मनाने के लिए संगत ने 40 दिनों तक सुखमनी साहिब का पाठ किया। श्री अखंड पाठ की समाप्ति के बाद राजकुमार सिंह, भाई किशन सिंह व भाई सुरजन सिंह ने दया सिंह द्वारा रचित भजन कीर्तन का गायन किया। सेवादारों ने बताया कि गुरु अर्जुन देव  ने गुरु ग्रंथ साहिब का संपादन किया। उसमें गुरुओं की वाणी के अलावा कबीर दास , रविदास , नामदेव  व बाबा फरीद  की वाणियों को भी स्थान दिया। उन्होंने लाखों श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था के केंद्र बिंदु हरिमंदिर साहिब, जिसे स्वर्ण मंदिर कहा जाता है, का निर्माण सम्पूर्ण रूप से कराया। स्वर्ण मंदिर की नींव का पत्थर मुस्लिम फकीर मियां मीर से रखवाया गया। इसमें चारों तरफ चार दरवाजे रखवाए गए, जो दर्शाते हैं कि यह सभी धर्मों व सभी जगहों के लिए खुला है। गुरु जी को मुगल शासक जहांगीर के शासन में धर्म व आस्था की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए अपना बलिदान देना पड़ा। जहांगीर की असहिष्णु नीतियों से त्रस्त समय में गुरु जी की प्रेरणा से समाज में दृढ़ विश्वास पैदा हो रहा था, जिसे सहन न कर पाने के कारण गुरु जी को गरम तवे पर गरम रेत डालकर शहीद कर दिया गया। गुरु जी इस समय भी केवल प्रभु स्मरण में लीन रहे। कार्यक्रम को सफल बनाने में अजीत सिंह भण्डारी, प्रितपाल सिंह, सन्तोष सिंह, दया सिंह, गुरप्रम सिंह, रवि, दिलकरन सिंह, मनमीत सिंह, सोनू, गुरवबीर सिंह, कमलेश सिंह खालसा, बलविन्दर सिंह आदि सेवादारों ने सहयोग किया।

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