साहित्य और सेवा का मिलन: थाना प्रभारी अखिलेश मिश्रा ने स्मृति-चिन्ह भेंट कर डा. कुमार विश्वास को किया सम्मानित

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अमित मिश्रा

O- राष्ट्रीय सम्मान, संस्कृति, सुरक्षा और संवेदना का सुंदर संगम

डाला (सोनभद्र) । देश के प्रसिद्ध कवि, वक्ता और विचारक डा. कुमार विश्वास का सोनभद्र आगमन एक यादगार क्षण में तब्दील हो गया, जब साहित्य, आस्था और प्रशासनिक गरिमा एक साथ दिखाई दी।

सिंगरौली एनटीपीसी, विंध्यनगर में आयोजित भव्य कवि सम्मेलन में शामिल होने जाते समय शुक्रवार देर रात डा. कुमार विश्वास अपनी टीम के साथ डाला स्थित मां वैष्णो देवी मंदिर के समीप कुछ समय के लिए रुके। जैसे ही वे पास स्थित ट्रिपल एस होटल पहुंचे, उनकी सादगी और सहजता ने वहां मौजूद लोगों को भाव-विभोर कर दिया।

सम्मान, सुरक्षा और संस्कार की मिसाल

इस अवसर पर अखिलेश मिश्रा, थाना प्रभारी निरीक्षक चोपन ने डा. कुमार विश्वास को स्मृति-चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया, जो एक जिम्मेदार पुलिस अधिकारी और साहित्यिक चेतना के बीच सम्मानजनक संवाद का प्रतीक बना।

होटल संचालक सत्यम मिश्रा और शिवम मिश्रा ने भी मां मुंडेश्वरी देवी की तस्वीर भेंट कर डा. कुमार विश्वास का आत्मीय स्वागत किया। पूरी सुरक्षा व्यवस्था के बीच डा. कुमार विश्वास ने होटल में अल्प विश्राम और नाश्ता किया तथा सोनभद्र की धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक पहचान के बारे में गहरी रुचि दिखाई।

सोनभद्र की प्रकृति ने मोहा मन

डा. कुमार विश्वास ने सोन नदी के किनारे से गुजरते हुए दिखे मनोरम दृश्यों की सराहना करते हुए कहा कि,

“सोनभद्र की प्राकृतिक छटाएं अद्भुत हैं।
सोन नदी के साथ यात्रा करते हुए जो दृश्य दिखे, वे मन को शांति और आनंद से भर देने वाले हैं।”

उन्होंने यह भी कहा कि वे भविष्य में पुनः सोनभद्र आकर यहां के प्रसिद्ध मंदिरों में दर्शन-पूजन अवश्य करेंगे।

कवि सम्मेलन की ओर प्रस्थान

डा. कुमार विश्वास सिंगरौली जिले के एनटीपीसी विंध्यनगर परिसर में शनिवार शाम छह बजे से आयोजित कवि सम्मेलन में सहभागिता के लिए रवाना हो रहे थे। इस दौरान कांस्टेबल अजय यादव, समाजसेवी, मंदिर के पुजारी एवं अन्य गणमान्य लोग भी उपस्थित रहे।

यह अवसर केवल एक कवि के स्वागत का नहीं, बल्कि साहित्य के सम्मान, पुलिस की संवेदनशील छवि, और सोनभद्र की सांस्कृतिक गरिमा को राष्ट्रीय पटल पर उजागर करने वाला क्षण बन गया।

डा. कुमार विश्वास की सादगी और विचारशीलता तथा
थाना प्रभारी अखिलेश मिश्रा की गरिमामय पहल
ने यह साबित कर दिया कि जब संस्कृति और प्रशासन साथ चलते हैं, तो समाज को एक सकारात्मक संदेश मिलता है।

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