खनन की ताकत से चमका सोनभद्र: करोड़ के रिकॉर्ड राजस्व के साथ यूपी में नंबर-1

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अमित मिश्रा

O- सख्त निगरानी और पारदर्शी व्यवस्था का असर, खनिज संपदा से भरपूर जिला बना राजस्व का ‘पावरहाउस’

O- खनन की ताकत से चमका सोनभद्र: 678 करोड़ के रिकॉर्ड के साथ यूपी में नंबर-1, बना आर्थिक ग्रोथ का मॉडल

सोनभद्र। उत्तर प्रदेश का खनिज हब सोनभद्र एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार वजह है, राजस्व के क्षेत्र में उसका ऐतिहासिक प्रदर्शन। खनन गतिविधियों के दम पर सोनभद्र ने 678 करोड़ 28 लाख रुपये का राजस्व अर्जित कर पूरे प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है, जिससे बाकी जिले काफी पीछे छूट गए हैं।

खनिज संपदा से समृद्ध इस जिले ने यह साबित कर दिया है कि यदि संसाधनों का सही प्रबंधन और कड़ी निगरानी हो, तो आर्थिक विकास की रफ्तार कई गुना बढ़ाई जा सकती है। प्रशासन की सख्ती और पारदर्शी व्यवस्था ने सोनभद्र को प्रदेश का सबसे बड़ा राजस्व जनरेटर बना दिया है।

आंकड़ों के मुताबिक, दूसरे स्थान पर महोबा रहा, जिसने 394.9 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाया। वहीं हमीरपुर 389.61 करोड़ रुपये के साथ तीसरे स्थान पर रहा। इसके अलावा सहारनपुर (227.58 करोड़), जालौन (225.62 करोड़) और झांसी (215.83 करोड़) ने भी सूची में जगह बनाई, लेकिन सोनभद्र से काफी पीछे रहे।

वहीं, बांदा (209.98 करोड़) और प्रयागराज (136.9 करोड़) जैसे जिले भी इस दौड़ में शामिल रहे, लेकिन शीर्ष स्थान तक नहीं पहुंच सके। दूसरी ओर, फतेहपुर और कौशांबी जैसे जिले काफी पीछे रह गए, जहां राजस्व आंकड़े अपेक्षाकृत बहुत कम रहे।

खनन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, हर दिन राजस्व की मॉनिटरिंग की जा रही है और अवैध खनन पर सख्त कार्रवाई हो रही है। इसी सख्ती और पारदर्शिता का नतीजा है कि राजस्व में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है।

इस संबंध में सोनभद्र के खनन अधिकारी कमल कश्यप ने कहा,
“जनपद में खनन कार्य पूरी पारदर्शिता और सख्त निगरानी के साथ संचालित किया जा रहा है। अवैध खनन पर लगातार कार्रवाई की जा रही है, जिसके चलते राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। हमारी प्राथमिकता है कि नियमों का पालन सुनिश्चित करते हुए अधिकतम राजस्व अर्जित किया जाए।”

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही रणनीति जारी रही, तो सोनभद्र आने वाले समय में और भी बड़े आर्थिक रिकॉर्ड बना सकता है। यह मॉडल पूरे प्रदेश के लिए एक उदाहरण बनता जा रहा है, जहां संसाधनों का वैज्ञानिक उपयोग, प्रशासनिक इच्छाशक्ति और मजबूत निगरानी मिलकर विकास की नई कहानी लिख रहे हैं।

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