प्राचार्या डॉ. अंजली विक्रम सिंह बोलीं- महाराणा प्रताप का जीवन देशभक्ति से ओत-प्रोत
सोनभद्र। विंध्य कन्या महाविद्यालय सोनभद्र में वीरता, पराक्रम एवं त्याग के प्रतीक वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की 486वीं जयंती बहुत हर्षोल्लास के साथ मनाई गई।
कार्यक्रम के प्रारम्भ में महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. अंजली विक्रम सिंह व मुख्य ट्रस्टी डॉ. अजय कुमार सिंह द्वारा महाराणा प्रताप के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्वलन किया गया। तत्पश्चात महाविद्यालय की छात्राओं ने महाराणा प्रताप की जीवनी पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. अंजली विक्रम सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि महाराणा प्रताप उदयपुर मेवाड़ के सिसोदिया राजवंश के राजा थे। उनका नाम इतिहास में शौर्य, त्याग, पराक्रम और देशभक्ति के लिए अमर है। उन्होंने मुगल बादशाह अकबर की अधीनता स्वीकार नहीं की और कई वर्षों तक संघर्ष किया। अंततः अकबर महाराणा प्रताप को अधीन करने में असफल रहा।
उन्होंने बताया कि महाराणा प्रताप की नीतियाँ शिवाजी महाराज से लेकर अंग्रेजों के खिलाफ बंगाल के स्वतंत्रता सेनानियों के लिए प्रेरणा स्रोत बनीं। सन् 1576 में हल्दीघाटी का युद्ध प्रताप और अकबर के बीच लड़ा गया, जिसमें अकबर की सेना महाराणा प्रताप की सेना से चार गुना अधिक थी। फिर भी प्रताप के आगे मुगल सेना टिक न सकी और मुगल मैदान छोड़कर भाग गए।
डॉ. सिंह ने कहा कि महाराणा प्रताप का संपूर्ण जीवन देशभक्ति से ओत-प्रोत रहा। उनके जीवन को हमें आत्मसात करने की आवश्यकता है। मेवाड़ का गौरवशाली इतिहास हम सभी को कभी नहीं भूलना चाहिए।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से डॉ. अनुग्रह नारायण सिंह, डॉ. मालती, डॉ. गीता, मनीष व शिक्षणेत्तर कर्मी सभी उपस्थित रहे।






