ब्यूरोचीफ़ – अमित मिश्रा
O- लेखपाल–दलाल गठजोड़ का भंडाफोड़!
O- फर्जी पैमाइश, नकली खसरे और अवैध वसूली से ग्रामीणों का शोषण
O- ₹ रुपये लेकर डराया, जमीन सुरक्षित बताकर थमाए फर्जी कागज़
O- ग्रामीणों के गंभीर आरोप, एसडीएम ने दिए जांच के आदेश
ओबरा (सोनभद्र /उत्तर प्रदेश)। सोनभद्र जनपद की ओबरा तहसील अंतर्गत चोपन ब्लॉक के ग्राम हर्रा में राजस्व व्यवस्था को कठघरे में खड़ा करने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां तैनात लेखपाल संदीप श्रीवास्तव और गांव के निवासी बताए जा रहे कथित दलाल केवल प्रसाद पर ग्रामीणों से फर्जी खसरा, गलत पैमाइश और जमीन से जुड़े भय दिखाकर अवैध वसूली करने के सनसनीखेज आरोप लगे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यह खेल लंबे समय से सुनियोजित तरीके से चल रहा है, जिसमें गरीब और अशिक्षित ग्रामीणों को निशाना बनाया गया।
गलत नाप-जोख से विवाद, फिर “समाधान” के नाम पर वसूली
पीड़ित ग्रामीणों का आरोप है कि जानबूझकर जमीन की गलत पैमाइश (नाप-जोख) कर सीमाएं बदली जाती हैं, जिससे पड़ोसियों के बीच विवाद खड़े हो जाते हैं। इसके बाद वही लोग “समाधान” कराने के नाम पर रुपये की मांग करते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि कई मामलों में जमीन को वन विभाग या ग्राम समाज की भूमि बताकर डराया गया और फिर पट्टा दिलाने या मामला दबाने के नाम पर पैसे वसूले गए।
पीड़ित ग्रामीणों के नाम और ली गई रकम
ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों के अनुसार लेखपाल व कथित दलाल द्वारा निम्न ग्रामीणों से रुपये लिए गए –
- राम रक्षा पासवान – ₹2000
- विजय पासवान – ₹2000
- प्रभु प्रसाद – ₹2000 (वन विभाग की भूमि का फर्जी खसरा)
- फूलन देवी – ₹4500
- विजय निषाद – ₹4500
ग्रामीणों का दावा है कि यह सूची केवल उदाहरण है, जबकि सैकड़ों ग्रामीणों से इसी तरह वसूली किए जाने का आरोप है।
“अब कोई परेशान नहीं करेगा” कहकर थमाए गए फर्जी कागजात
पीड़ितों का आरोप है कि रुपये लेने के बाद उन्हें यह कहकर फर्जी खसरे और कागजात थमा दिए गए कि अब न तो वन विभाग आएगा और न ही कोई प्रशासनिक कार्रवाई होगी।
बाद में जब दस्तावेजों की जांच कराई गई तो वे पूरी तरह संदिग्ध और फर्जी बताए जा रहे हैं।
रिश्ते से इनकार, लेकिन साथ-साथ नाप-जोख
ग्रामीणों का कहना है कि लेखपाल संदीप श्रीवास्तव सार्वजनिक रूप से केवल प्रसाद से किसी संबंध से इनकार करते हैं, लेकिन दोनों को कई बार एक साथ जमीन की पैमाइश करते देखा गया।
अधिकांश मामलों का निपटारा दोनों की मौजूदगी में ही हुआ, जिससे संदेह और गहराता है।
उपजिलाधिकारी ओबरा विवेक सिंह का बयान
इस पूरे मामले पर उपजिलाधिकारी ओबरा विवेक सिंह ने कहा-
“लेखपाल और कथित दलाल द्वारा ग्रामीणों के साथ फर्जी पैमाइश, गलत नाप-जोख तथा रुपये लेकर शोषण किए जाने का मामला संज्ञान में आया है। प्रकरण की विस्तृत जांच कराई जा रही है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
एसडीएम के इस बयान के बाद ग्रामीणों को कार्रवाई की उम्मीद जगी है।
ग्रामीणों की मांग: उच्चस्तरीय जांच और सख्त कार्रवाई
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से-
- सभी फर्जी खसरों और पैमाइशों की जांच,
- लेखपाल-दलाल गठजोड़ को बेनकाब करने,
- दोषियों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई,
- और पीड़ितों को न्याय दिलाने
की मांग की है।
बड़ा सवाल
यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला केवल एक गांव तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी राजस्व व्यवस्था की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
क्या गरीब ग्रामीणों को समय पर न्याय मिलेगा?
कब टूटेगा लेखपाल-दलाल का यह कथित गठजोड़?
फिलहाल, पूरे मामले की जांच प्रशासन के स्तर पर जारी है और सच सामने आने का इंतजार है।







