रोटी की तलाश मौत तक ले गई, लाल से सफ़ेद का सफ़र

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अमित मिश्रा

O- मुंबई से एम्बुलेंस में गांव पहुंचा शव, गुरदह में पसरा मातम; समाजसेवियों ने हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया

सोनभद्र। परदेस में मेहनत कर परिवार का सहारा बनने का सपना लेकर मुंबई गया एक नौजवान हमेशा के लिए खामोश हो गया। चोपन थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत गुरदह निवासी राजू बैगा (पुत्र-महेश बैगा) का पार्थिव शरीर मंगलवार तड़के करीब 3:20 बजे एम्बुलेंस से गांव पहुंचते ही पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। पांच भाइयों में सबसे छोटे राजू के असमय निधन ने परिवार की खुशियों को गहरे सन्नाटे में बदल दिया।

घर के आंगन में शव पहुंचते ही चीख-पुकार गूंज उठी। माता–पिता और परिजन बदहवास हो गए। पड़ोसियों की आंखें नम थीं और गांव का हर कोना शोकाकुल दिखाई दे रहा था। रोज़ी-रोटी की जद्दोजहद में महानगर गया बेटा इस तरह लौटेगा,किसी ने सोचा भी न था।

इस दुखद घड़ी में मौके पर पहुंचे समाजसेवीयों ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए परिजनों को ढांढस बंधाया। उन्होंने भरोसा दिलाया कि न्याय की लड़ाई में वे परिवार के साथ खड़े रहेंगे और मामले में कानूनी पैरवी कर दोषियों को कड़ी सजा दिलाने के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे। साथ ही, आर्थिक व सामाजिक स्तर पर भी मदद का आश्वासन दिया गया।

ग्राम प्रधान प्रतिनिधि, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने भी शोक संवेदना प्रकट की। गांव के बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक हर कोई इस पीड़ा में परिवार के साथ खड़ा नजर आया। स्थानीय लोगों ने कहा कि परदेस में काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा और अधिकारों पर ठोस व्यवस्था की जरूरत है, ताकि ऐसी त्रासदियां दोहराई न जाएं।

राजू बैगा का जाना केवल एक परिवार की क्षति नहीं, बल्कि पूरे गांव का दर्द है, एक ऐसा दर्द, जो रोज़गार की तलाश में घर से दूर गए असंख्य युवाओं की असुरक्षा की याद दिलाता है।

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