अमित मिश्रा
O- सोनभद्र में कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर पुलिस कार्रवाई, लोकतंत्र पर सवाल
सोनभद्र (उत्तर प्रदेश)। नेशनल हेराल्ड मामले में न्यायालय द्वारा साक्ष्य के अभाव में कांग्रेस की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी को क्लीन चिट दिए जाने के बाद देशभर में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जनपद में कांग्रेस कार्यकर्ताओं का विरोध प्रदर्शन उस वक्त चर्चा का केंद्र बन गया, जब शांतिपूर्ण घेराव की तैयारी के दौरान पुलिस ने उन्हें रोक लिया और कई नेताओं को हिरासत में ले लिया।
जानकारी के अनुसार, कांग्रेस जिलाध्यक्ष रामराज गोंड़ के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ता भाजपा कार्यालय का घेराव करने के लिए निकले थे। लेकिन स्टेट हाईवे–5A पर वाराणसी – शक्तिनगर मार्ग पर रॉबर्ट्सगंज मे पुलिस ने उन्हें रोक लिया। इसके बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच काफी देर तक तीखी नोकझोंक चली। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस ने जिलाध्यक्ष रामराज गोंड़, युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष शशांक मिश्रा सहित कई कार्यकर्ताओं को जीप में भरकर पुलिस चौकी चुर्क ले जाया।

इस दौरान कांग्रेस नेताओं ने पुलिस कार्रवाई को “तानाशाही रवैया” करार देते हुए कहा कि भाजपा सरकार लोकतंत्र में जनता की आवाज दबाने का प्रयास कर रही है। जिलाध्यक्ष रामराज गोंड़ ने आरोप लगाया कि कांग्रेस कार्यकर्ता नेशनल हेराल्ड मामले में न्यायालय के फैसले के समर्थन में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन सरकार ने पुलिस बल के सहारे आंदोलन को कुचलने का काम किया।

कांग्रेस नेताओं ने सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी और उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह कार्रवाई लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है। उनका कहना है कि जब न्यायालय ने नेशनल हेराल्ड मामला में कांग्रेस नेतृत्व को राहत दी है, तो भाजपा बौखलाहट में पुलिस के जरिए विपक्ष की आवाज दबा रही है।

इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या देश में विपक्षी दलों को शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार मिल पा रहा है? सोनभद्र की यह घटना अब सिर्फ स्थानीय नहीं रही, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राजनीतिक असहमति के अधिकार पर बहस को और तेज कर गई है।







