अमित मिश्रा
सोनभद्र(उत्तर प्रदेश)। जनपद में विकास खण्ड नगवां के पचफेडीया गांव मे कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम अधिनियम पर आधारित एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में स्थानीय महिला, ग्राम पंचायत सदस्य तथा मानवाधिकार रक्षक सदस्यों ने भाग लिया।
बैठक में यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम 2013 जिसे आमतौर पर पीओएसएच अधिनियम कहा जाता है। एक्शन एडएचआरडी कमलेश कुमार ने बताया कि भारत में महिलाओं के लिए कार्यस्थल को सुरक्षित बनाने के लिए बनाया गया एक कानून है। इसका मुख्य उद्देश्य कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ होने वाले यौन उत्पीड़न को रोकना, निषेध करना और उसका निवारण करना है।
कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ होने वाले यौन उत्पीड़न को रोकना और पीड़ित महिलाओं को न्याय दिलाना है। यौन उत्पीड़न में शारीरिक संपर्क, यौन संबंध बनाने की मांग, यौन टिप्पणी करना, अश्लील साहित्य दिखाना, या किसी भी प्रकार का अवांछित यौन व्यवहार शामिल है। इसके लिए प्रत्येक 10 या अधिक कर्मचारियों वाले संगठन को एक आंतरिक शिकायत समिति आई सी सी का गठन करना आवश्यक है, जो यौन उत्पीड़न की शिकायतों की जांच करेगी।
इस एक्ट के तहत जिलाधिकारी को एक स्थानीय शिकायत समिति एलसीसी का गठन करना होता है, जो उन मामलों की जांच करती है जहां आंतरिक समिति का गठन नहीं किया गया है या शिकायत नियोक्ता के खिलाफ है कोई भी पीड़ित महिला या उसका कानूनी उत्तराधिकारी तीन महीने के भीतर लिखित रूप में शिकायत दर्ज करा सकती है।
बैठक में एखलाख अली ने बताया कि अधिनियम कार्यस्थल पर महिलाओं के लिए एक सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है महिलाओं के लिए एक सुरक्षित, गरिमापूर्ण और भेदभाव रहित कार्य वातावरण सुनिश्चित करने की दिशा मे अधिनियम की गहरी समझ विकसित करना, तथा समुदाय स्तर पर जागरूकता बढ़ाना था “महिलाओं को कार्यस्थल पर सुरक्षित महसूस कराना केवल कानून का पालन करना नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार समाज की पहचान है।
इस कार्यक्रम में अनिता देवी, सुमन देवी,चिरैया देवी , प्रभावती आदि साथियों ने प्रतिभाग किया।






