वादों की सरकार, हकीकत में बेरुखी” मिड डे मील कर्मियों का फूटा आक्रोश

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अमित मिश्रा

मुख्यमंत्री को संबोधित पांच सूत्रीय ज्ञापन सौंपा, रसोइयों ने कलेक्ट्रेट पर जताया विरोध

सोनभद्र । उत्तर प्रदेश मिड डे मील वर्कर्स यूनियन के बैनर तले बुधवार को जिले की रसोइया कर्मियों ने कलेक्ट्रेट परिसर में विरोध प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री को संबोधित पांच सूत्रीय मांग पत्र जिलाधिकारी के प्रतिनिधि को सौंपा। प्रदर्शन का नेतृत्व संगठन की जिला अध्यक्ष सुनीता ने किया।

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार मिड डे मील रसोइयों की दशा-दुर्दशा को लेकर पूरी तरह उदासीन है, केवल आश्वासन दिए जा रहे हैं, हकीकत में कोई सुधार नहीं किया गया।

रसोइयों की मांगें अनसुनी, दशकों से लड़ रहीं हैं हक की लड़ाई

सुनीता ने कहा कि मध्यान्ह भोजन योजना के तहत प्रदेश भर में कार्यरत रसोइयों को मानदेय, सामाजिक सुरक्षा और सेवाओं की निरंतरता जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित रखा गया है।

उन्होंने बताया कि उच्च न्यायालय के निर्देश और 45वें व 46वें श्रम सम्मेलन की सिफारिशों के अनुरूप रसोइयों को कर्मचारी का दर्जा देने, न्यूनतम वेतन, ईएसआई, ईपीएफ, ग्रेच्युटी जैसी सुविधाएं देने की वर्षों पुरानी मांग आज तक पूरी नहीं की गई।

₹2000 मानदेय भी महीनों से बकाया

वर्तमान में रसोइयों को केवल ₹2000 मासिक मानदेय मिलता है, जो समय से नहीं दिया जाता। सुनीता ने बताया कि वर्तमान में 5 माह का मानदेय लंबित है, जबकि बच्चों का नया सत्र शुरू हो चुका है, किसान कृषि कार्य में जुटे हैं और रक्षाबंधन जैसे त्योहार सामने हैं।

कर्मचारियों की तरह व्यवहार नहीं, फिर भी काम बराबर

सुनीता ने सवाल उठाया कि जब शिक्षकों और शिक्षा मित्रों के लिए समायोजन व्यवस्था है, तो रसोइयों के लिए ऐसी कोई योजना क्यों नहीं है? “हम भी हर दिन स्कूल में बच्चों के साथ रहते हैं, लेकिन हमारे अधिकारों की कोई सुनवाई नहीं है”, उन्होंने कहा।

प्रदर्शन में कई संगठनों का समर्थन

इस प्रदर्शन में संगठन की सचिव सोनी, सदस्य फुलमती, शांति देवी, फुलझरी, चंद्रावती, सोनी देवी सहित ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन (एक्टू) की सचिव नाजमा खातून, ऑल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन (आइसा) की छात्र नेता अमीना खातून और अन्य कार्यकर्ता शामिल हुए।

प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की कि रसोइयों को सम्मानजनक वेतन, स्थायी सेवा और कर्मचारी का दर्जा जल्द से जल्द दिया जाए, वरना संघर्ष को और तेज किया जाएगा।


रसोइयों की पांच प्रमुख मांगें सरकारी कर्मचारी के रूप में मान्यता

न्यूनतम वेतन व सभी श्रम लाभ (ईएसआई, पीएफ, ग्रेच्युटी), सेवा की निरंतरता और नियोजन में स्थायित्व,मानदेय का समयबद्ध भुगतान, न्यायालय व श्रम सम्मेलनों की सिफारिशों का पालन

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