हिंदी कवि व भोजपुरी के विद्वान पंडित हरिराम द्विवेदी स्मृति सम्मान से नवाजे गये जगदीश पंथी”

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अमित मिश्रा

सोनभद्र । मंगलवार को काशी हिंदू विश्वविद्यालय के भारत अध्ययन केंद्र, सभागार में काशी कथा न्यास, भारत अध्ययन केंद्र, काशी हिंदू विश्वविद्यालय, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के संयुक्त तत्वाधान में चल रहे काशी: संस्कृति,परंपरा एवं परिवर्तन पर 15 दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के समापन समारोह में
पंडित हरिराम द्विवेदी स्मृति सम्मान जगदीश पंथी को देते हुये काशी कथा न्यास के सचिव डॉ अवधेश दीक्षित ने कहा कि जगदीश पंथी का जन्म उत्त्तर प्रदेश सोनभद्र जनपद के ग्राम गोतौली, शाहगंज में 16 जुलाई 1951 में हुआ है | इन्होनें अपनी प्राथमिक शिक्षा स्थानीय प्राथमिक विद्यालय से, हाई स्कूल जंग बहादुर इंटरमीडिएट कॉलेज शाहगंज एवं इंटरमीडिएट तक की शिक्षा राजा शारदा महेश इंटरमीडिएट कॉलेज राबर्ट्सगंज सोनभद्र विद्यालय से तथा स्नातक की शिक्षा कन्हैया लाल बसंत स्नातकोत्तर महाविद्यालय मिर्जापुर से प्राप्त की | सन् 1968 से काव्य मंच से जुड़ाव देश के प्रतिष्ठित पत्र – पत्रिकाओं में कविताओं का प्रकाशन प्रारंभ किया।
श्री पंथी विद्यार्थी जीवन से ही भोजपुरी में रचनाये करते आ रहे हैं | अपने लेखन एवं रचनाओं से इन्होनें भोजपुरी साहित्य एवं संस्कृति को एक नई पहचान दी है |
न्यास के संरक्षक प्रोफेसर सिद्धनाथ उपाध्याय ने कहा कि इनके शब्द जीवन के अनकहे भावों को अभिव्यक्त करते हैं एवं समाज को संवेदनशील बनाते हैं | इनके द्वारा रचित भोजपुरी गीत संग्रह “रुनुक झुनुक“, खंड काव्य “महात्मा जटायु”, “टेर रहा बंजारा”, “करोना के कांटे”, “तिनके जो मैंने चुने” आदि सभी कृतियाँ जीवन की सच्चाइयों, मानवीय भावनाओं, तथा भोजपुरी संस्कृति का जिवंत पिटारा हैं |
न्यास के अध्यक्ष व अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति प्रोफेसर प्रदीप कुमार मिश्रा ने कहाँ की श्री पंथी के शब्दों में वह शक्ति है जो ह्रदय की गहराइयों तक पहुँच कर समाज के प्रत्येक व्यक्ति को प्रेरित करती हैं | भोजपुरी साहित्य जगत में इनकी निरंतर एवं प्रभावी उपस्थिति आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत एवं मार्ग दर्शक हैं | श्री पंथी ने लेखन के अतिरिक्त सामाजिक चेतना के विकास में भी प्रभावी एवं सराहनीय कार्य किया है |काशी कथा न्यास, वाराणसी जगदीश पंथी को भोजपुरी साहित्य में उनके द्वारा किये गए अतुलनीय योगदान के लिये “पंडित हरिराम द्विवेदी स्मृति पुरस्कार प्रदान करते हुये अपने को गौरवान्वित समझती है |
सम्मान प्राप्त करने वाले साहित्यकार जगदीश पंथी ने कहा कि पंडित हरिराम द्विवेदी हिंदी कवि और भोजपुरी के विद्वान होने के साथ ही बहुत ही सरल स्वभाव के थे. जो कोई उनसे मिलने के लिए जाता उनसे वे बड़े ही आदर भाव से मुलाकात करते थे. ज्यादातर भोजपुरी में बात करते थे. पंडित जी को साहित्य अकादमी पुरस्कार, साहित्य भूषण समेत प्रदेश स्तर के कई सम्मान मिले थे. रचना की बात करें तो इनकी प्रमुख रचना जीवन दायनीगंगा, पानी काहे कहानी, रमता जोगी, साइ भजन वाली की रहीं. इसके साथ ही भोजपुरी साहित्य और हिंदी कवि की एक दर्जन से ज्यादा पुस्तकों में उन्होंने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया था. उनके स्मृति में यह सम्मान प्राप्त करना मेरे लिए अत्यधिक गौरवशाली छाड़ के समान है मैं सादर आभार प्रकट करता हूं कि मेरे नाम का प्रस्ताव पंडित आलोक कुमार चतुर्वेदी,अध्यक्ष गुप्त काशी विकास परिषद ने काशी के विद्वतगण के समक्ष प्रस्तावित किया और काशी का वह कंकड़ कंकड़ जो शंकर समान है सब ने मिलकर मुझे यह सम्मान दिया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि काशी के शलाका पुरुष महंत संकट मोचन एवं प्रोफेसर, इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग प्रो विश्वंभर नाथ , प्रोफेसर सदाशिव कुमार द्विवेदी समन्वयक भारत अध्ययन केंद्र, डॉ अभिजीत दीक्षित निदेशक इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, प्रोफेसर राम सुधार सिंह, धनंजय पाठक विभाग बौद्धिक प्रमुख राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, आलोक कुमार चतुर्वेदी, पंडित पारसनाथ मिश्र, प्रभात सिंह चंदेल,भोला नाथ मिश्रा, समेत जनपद सोनभद्र के मूर्धन्य लोगों ने जगदीश पंथी को बधाई एवं शुभकामनाएं दी।

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