अधिवक्ता संशोधन विधेयक-2025 के खिलाफ अधिवक्ताओं ने निकाला जुलूस, किया प्रदर्शन  

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अमित मिश्रा

सोनभद्र। अधिवक्ता संशोधन विधेयक – 2025 के विरोध में सोनभद्र के अधिवक्ताओं ने शुक्रवार को जोरदार प्रदर्शन किया। सोनभद्र बार एसोसिएशन के नेतृत्व में सैकड़ों अधिवक्ताओं ने काला फीता बांधकर तहसील परिसर में जुलूस निकाला और कलेक्ट्रेट पहुंचकर विरोध जताया। इसके बाद राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन अपर जिलाधिकारी को सौंपते हुए विधेयक को तुरंत वापस लेने की मांग की।

बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अरुण कुमार मिश्र ने कहा, “लोकतंत्र में न्याय की स्वतंत्रता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए निर्भीक न्याय प्रणाली आवश्यक है। अधिवक्ताओं को ‘कोर्ट का अधिकारी’ माना जाता है, और उनके अधिकारों का हनन न्याय व्यवस्था को कमजोर कर सकता है।” उन्होंने कहा कि अधिवक्ता संशोधन विधेयक-2025 में शामिल कई प्रावधान न केवल अधिवक्ताओं की स्वतंत्रता को बाधित करते हैं, बल्कि उनकी सर्वोच्च संस्था भारतीय विधिज्ञ परिषद की स्वायत्तता और स्वतंत्रता को भी खतरे में डालते हैं।

मुख्य मांगे:

  1. एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट का प्रावधान कर अधिवक्ताओं और उनके परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
  2. परिषदों के लोकतांत्रिक स्वरूप को बरकरार रखते हुए निर्वाचित सदस्यों के अलावा किसी अन्य को शामिल न किया जाए।
  3. भारतीय विधिज्ञ परिषद की स्वायत्तता को बनाए रखते हुए केंद्र सरकार द्वारा रेगुलेशन बनाने के प्रावधान को समाप्त किया जाए।
  4. उत्तर प्रदेश के अधिवक्ताओं को 10 लाख का मेडिक्लेम और मृत्यु पर 10 लाख की बीमा राशि प्रदान की जाए।
  5. पंजीयन के समय अधिवक्ताओं से लिए गए 500 रुपये के स्टाम्प से प्राप्त धनराशि का 2% अधिवक्ता कल्याणकारी योजनाओं पर खर्च किया जाए, जैसा कि केरल में लागू है।
  6. एडवोकेट अमेंडमेंट बिल-2025 को तुरंत वापस लिया जाए, अन्यथा प्रदेशभर में बड़े आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी।

विधेयक पर उठाए गंभीर सवाल:

प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि यह संशोधन विधेयक भारतीय विधिज्ञ परिषद में केंद्र सरकार के हस्तक्षेप का रास्ता साफ करता है, जिससे परिषद की स्वायत्तता और स्वतंत्रता खतरे में पड़ सकती है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस विधेयक के लागू होने से अधिवक्ताओं के अधिकारों का हनन होगा और न्याय की उम्मीदें धूमिल हो जाएंगी।

वक्ताओं ने यह भी बताया कि एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट की लंबे समय से मांग की जा रही है, लेकिन इसके स्थान पर संशोधन विधेयक लाकर सरकार ने अधिवक्ता समाज को निराश किया है। उन्होंने राजस्थान में पारित एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट को राज्यपाल द्वारा रोकने पर भी सवाल उठाया और इसे अधिवक्ताओं के प्रति सरकार की नकारात्मक नीति बताया।

जुलूस और ज्ञापन:

सोनभद्र बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अरुण कुमार मिश्र और महामंत्री अखिलेश कुमार पाण्डेय के नेतृत्व में अधिवक्ताओं ने न्यायालय परिसर में चक्रमण कर विरोध जताया और इसके बाद कलेक्ट्रेट पहुंचकर ज्ञापन सौंपा।

इस प्रदर्शन में सुरेन्द्र कुमार पाण्डेय, शेराज अख्तर खॉ, शारदा प्रसाद मोर्य, उमेश कुमार मिश्र, दिनेश दत्त पाठक, सत्यदेव पाण्डेय, राजीव सिंह गौतम, विनोद कुमार शुक्ल, प्रदीप सिंह, संजय श्रीवास्तव, मुनिराज साह, धर्मेन्द्र द्विवेदी, अतुल प्रताप सिंह, संजय कुमार पाण्डेय, आशुतोष द्विवेदी, आशिष शुक्ला, अजित दुबे, आशिष पाल, सुरज वर्मा, अनुज अवस्थी, राहुल जैन, अखिलेश मिश्र, उमेश मिश्र, जयनाथ गिरि, पुष्पा तिग्गा, गीता गौर, शुशिला वर्मा, आकृति निर्भया समेत बड़ी संख्या में अधिवक्ता शामिल हुए।

आंदोलन तेज करने की चेतावनी:

अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी कि अगर अधिवक्ता संशोधन विधेयक-2025 को वापस नहीं लिया गया, तो प्रदेशभर में आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई न्याय और लोकतंत्र की रक्षा के लिए है, और इसे हर हाल में जारी रखा जाएगा।

जनता की न्याय की उम्मीदें धूमिल:

वक्ताओं ने कहा कि यह विधेयक जनता की न्याय की उम्मीदों को भी धूमिल कर सकता है, क्योंकि यह न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को प्रभावित करेगा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अधिवक्ता समाज हमेशा न्याय और संविधान की रक्षा के लिए खड़ा रहा है और आगे भी रहेगा।

संपूर्ण प्रदेश में उभर रहा है विरोध:

अधिवक्ता संशोधन विधेयक-2025 के विरोध में केवल सोनभद्र ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश और देशभर में अधिवक्ता लामबंद हो रहे हैं। वक्ताओं ने कहा कि यह काला कानून लोकतंत्र और न्याय व्यवस्था पर सीधा हमला है, जिसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

अधिवक्ताओं के इस प्रदर्शन ने यह साफ कर दिया है कि अधिवक्ता संशोधन विधेयक-2025 के खिलाफ संघर्ष अभी थमने वाला नहीं है और इसे लेकर आंदोलन और भी व्यापक रूप ले सकता है।

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