सीएस पाण्डेय
बभनी में अंबेडकर जयंती पर निकली रैली
बभनी(सोनभद्र/उत्तर प्रदेश)। भारतीय संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती मंगलवार को मनाई गई। इस अवसर पर बुद्धा चैरिटेबल ट्रस्ट के सौजन्य से एक समारोह आयोजित किया गया, जिसमें रैली, गोष्ठी और सांस्कृतिक कार्यक्रम शामिल थे। कार्यक्रम का शुभारंभ बाबा साहेब को नमन कर किया गया।
मंगलवार को जनता इंटर कॉलेज बभनी के प्रांगण से रैली निकाली गई। यह रैली बभनी बाजार, असनहर, चक चपकी और महुअरिया मोड़ से होते हुए वापस जनता कॉलेज पर समाप्त हुई। रैली में हजारों की संख्या में पुरुष, महिलाएं और बुजुर्ग शामिल हुए। युवाओं ने नीले झंडे लेकर ‘बाबा साहेब डॉ. अंबेडकर अमर रहें’ और ‘जय भीम’ के नारे लगाए।
जनता इंटर कॉलेज बभनी में बाबा साहेब की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस दौरान आयोजित गोष्ठी में वक्ताओं ने डॉ. भीमराव अंबेडकर के जीवन परिचय और उनके विचारों पर प्रकाश डाला। उन्होंने अंबेडकर के मुख्य संदेश “शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो” को रेखांकित किया, जिसमें शिक्षा को सशक्तिकरण का सबसे बड़ा हथियार बताया गया है।
वक्ताओं ने बताया कि डॉ. अंबेडकर ने समानता, बंधुत्व और न्याय पर आधारित समतामूलक समाज के निर्माण पर जोर दिया। उन्होंने जातिवाद और छुआछूत का कड़ा विरोध किया तथा ‘भारतीय पहले और अंत में’ की भावना अपनाने की सीख दी।इस अवसर पर बसपा नेता राम विचार ने कहा कि डॉ.भीमराव अंबेडकर ने विषम परिस्थितियों के बावजूद समाज और राष्ट्र के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया।
उन्होंने अंबेडकर के राष्ट्र के प्रति विचारों पर चर्चा करते हुए बताया कि अंबेडकर ने हर परिस्थिति में समाज, जाति और धर्म से ऊपर उठकर राष्ट्रहित के लिए तत्पर रहने की बात कही थी। उन्होंने यह भी कहा कि अंबेडकर के जीवन को पढ़े बिना उनके विचारों को पूरी तरह समझना संभव नहीं है।
कार्यक्रम में अरविंद कुमार, राजेश कुमार, रविंद्र कुमार, जगदीश्वर भास्कर, एडवोकेट सरोज, नंदलाल, महेंद्र प्रसाद, नरेश कुमार, वंश बहादुर, लालता प्रसाद और हृदय नारायण सहित कई प्रमुख लोग उपस्थित रहे।






