पूर्वांचल राज्य की मांग फिर पकड़ने लगी रफ्तार

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अन्जनी

अमिता सिंह और डॉ. संजय सिंह का बड़ा बयान: यूपी का विभाजन ही विकास का रास्ता


अमेठी(उत्तर प्रदेश)।  सूबे में भले ही विधानसभा चुनाव वर्ष 2027 में होना है लेकिन उसका तड़का लगना शुरू हो गया है जिसकी शुरुआत जनपद से एक बड़ी और अहम राजनीतिक खबर सामने आई है। पूर्व केंद्रीय कैबिनेट मंत्री अमिता सिंह और पूर्व राज्यसभा सदस्य डॉ. संजय सिंह ने एक बार फिर पूर्वांचल राज्य के गठन की मांग को मजबूती से उठाया है। दोनों नेताओं के इस बयान से प्रदेश की राजनीति में नई हलचल तेज हो गई है।

नेताओं ने साफ कहा कि उत्तर प्रदेश का भौगोलिक और प्रशासनिक आकार अब इतना बड़ा हो चुका है कि विकास योजनाओं का लाभ प्रदेश के सभी हिस्सों तक समान रूप से नहीं पहुंच पा रहा है।


पूर्व केंद्रीय मंत्री अमिता सिंह ने कहा कि पूर्वांचल के गांव और कस्बे आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। कई इलाकों में सड़कें बदहाल हैं, इलाज की समुचित व्यवस्था नहीं है, शिक्षा के संसाधन सीमित हैं और रोजगार के अवसर न के बराबर हैं। उन्होंने कहा कि सरकारें योजनाएं जरूर बनाती हैं, लेकिन बड़े प्रदेश के कारण उनका प्रभाव जमीनी स्तर तक नहीं दिखता। अगर उत्तर प्रदेश को तीन हिस्सों में बांटकर पूर्वांचल राज्य का गठन किया जाए, तो प्रशासनिक पकड़ मजबूत होगी और स्थानीय स्तर पर समस्याओं का समाधान तेजी से हो सकेगा।


पूर्व राज्यसभा सदस्य डॉ. संजय सिंह ने कहा कि अलग राज्य बनने से क्षेत्र की जरूरतों और प्राथमिकताओं के अनुरूप नीतियां बनाई जा सकेंगी। इससे किसान, मजदूर, नौजवान, छोटे व्यापारी और वंचित वर्गों को सीधा लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का विकसित राज्य और विकसित भारत का सपना तभी साकार हो सकता है, जब देश के हर क्षेत्र को बराबरी का हक और अवसर मिले।


दोनों नेताओं ने कहा कि पूर्वांचल लंबे समय से उपेक्षा का शिकार रहा है। यहां की जनता मेहनती और प्रतिभाशाली है, लेकिन संसाधनों की कमी और प्रशासनिक दूरी के कारण वह आगे नहीं बढ़ पा रही है। अलग राज्य बनने से पूर्वांचल को अपनी अलग पहचान मिलेगी, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग और रोजगार के क्षेत्र में ठोस नीतियां लागू हो सकेंगी।


पूर्वांचल राज्य की इस मांग ने राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर बहस को तेज कर दिया है। जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में यह मुद्दा प्रदेश और राष्ट्रीय राजनीति में प्रमुख रूप से उभर सकता है और इससे सियासी समीकरणों पर भी असर पड़ सकता है।

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