राष्ट्रीय लोक अदालत में दस दम्पत्ति आपसी कटुता भूल हुए एक दूजे के

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अमित मिश्रा

सोनभद्र।परिवार न्यायालय के प्री लिटिगेशन स्टेज पर दाम्पत्य विवाद का निस्तारण आज उन चेहरों पर खुशियों के रंग खिले और गिले-शिकवे भूल फिर जिंदगी मुस्कुराई , दस जोड़ो ने एक बार फिर अपने दाम्पत्य जीवन को सफल बनाये रखने के लिए एक-दूजे का हाथ थामा तो दोनो की आंखें भर आईं।

जनपद न्यायालय परिसर में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में और इसके प्रेरक बने पारिवारिक न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश राजेंद्र सिंह। वैवाहिक वादों के कुल 13 मुकदमे यहां सुलह समझौते आधार पर निस्तारित किए गए। गलत फहमियां, कुछ शिकवे और कुछ परेशानियां। विवादों की शुरुआत हुई तो फासले बढ़ते गए और फिर दांपत्य जीवन की मिठास कड़वाहट में बदलती चली गई। मामला अदालत में  पहुंच गया, ऐसे जोड़ों के लिए शनिवार को राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरणए नई दिल्ली के
निर्देशन में यहां जनपद न्यायालय परिसर में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत वरदान बन गया।


परिवार न्यायालय सोनभद्र के प्रयासों से ऐसे 13 मुकदमे सुलह-समझौते के आधार पर निस्तारित किए गए। किसी सूरत पर साथ रहने को राजी नहीं हो रहे इन जोड़ों को समझाना आसान नहीं था लेकिन अदालत के प्रयास रंग लाए और दोनों पक्षों को बारी-बारी सुना गया। एक-दूसरे से जुड़ी उनकी शिकायतें जानी गईं और फिर समाधान का रास्ता तलाशा गया। आखिरकार दोनों पक्षों को अपनी भूल समझ आई और वे आपसी शिकवे भूल फिर हो गए एक-दूजे के हो गए।

इन 10 जोड़ी पारिवारिक पक्षकार 1 मधु बनाम पंकज, रबीना बेगम बनाम असरफ शाह , सुनीता देवी बनाम विनोद कुमार श्रीवास्तव, रूबीना बनाम अशरफ, सुखन बनाम जगदीश, प्रतिमा बरनवाल बनाम रत्नेश बरनवाल, बृजेश विश्वकर्मा बनाम सरोज, पंकज बनाम मधु , उषा देवी बनाम रामपाल और उषा देवी बनाम बाबूलाल बरसों से अलग.अलग रह रहे थे, किन्तु सुलह समझौते का प्रयास करने पर अपने.अपने पूर्व के गीले सिकवे
को भूलकर एक साथ वैवाहिक जीवन व्यतीत करने के लिए तैयार हुए और एक दूसरे को माला पहनाकर एवं मिठाई खिलाकर सुखमय वैवाहिक जीवन के पथ पर अग्रसर हुए।

वही पारिवारिक न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश राजेन्द्र सिंह द्वारा सभी पारिवारिक जोड़ों को सुखमय भविष्य हेतु शुभकामना भी दिया गया।

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