शीर्ष अदालत सख्त: कोर्टरूम की मर्यादा पर सवाल, झारखंड के वकील को बिना शर्त माफी के निर्देश

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आशीष चौबे (अधिवक्ता सुप्रीम कोर्ट)

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने न्यायालयों में गिरते शिष्टाचार और बढ़ते टकराव की प्रवृत्ति पर गहरी चिंता जताते हुए झारखंड हाई कोर्ट से जुड़े एक अवमानना मामले में अहम टिप्पणी की है। शीर्ष अदालत ने संबंधित वकील को उच्च न्यायालय के समक्ष बिना किसी शर्त के माफी मांगने की अनुमति देते हुए, माफी पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का अनुरोध किया है।

यह मामला उस घटना से जुड़ा है, जिसमें झारखंड हाई कोर्ट की कार्यवाही के दौरान एक वकील द्वारा न्यायाधीश से कथित तौर पर अशोभनीय भाषा का प्रयोग किया गया था।

कोर्टरूम टकराव की जगह नहीं : सुप्रीम कोर्ट

चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि अदालतों में बहस का स्तर गिरना न्याय व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती है।

पीठ के समक्ष वकील की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने कहा कि उनके मुवक्किल को अपने आचरण पर गहरा खेद है और वह बिना शर्त माफी देने को तैयार हैं।

इस पर पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि-

न्यायालय में आक्रामक रवैया अपनाना या न्यायाधीशों से टकराव को पेशेवर साहस मानना, एक खतरनाक प्रवृत्ति बनती जा रही है।

CJI की कड़ी टिप्पणी

सुनवाई के दौरान जब पीठ ने वकील के आचरण पर सवाल उठाया, तो चीफ जस्टिस ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि-

यदि कोई न्यायालय के समक्ष आंखें दिखाने या दबाव बनाने की कोशिश करता है, तो न्यायपालिका ऐसे व्यवहार से निपटना जानती है।

यह टिप्पणी कोर्टरूम की मर्यादा और न्यायिक अनुशासन के संदर्भ में बेहद अहम मानी जा रही है।

लाइव-स्ट्रीमिंग से बढ़ी चुनौती?

वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने दलील दी कि अदालतों की लाइव-स्ट्रीमिंग के दौर में हर शब्द और हावभाव रिकॉर्ड हो रहा है, जिससे-

  • वकीलों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ा है
  • एक नोटिस या टिप्पणी भी करियर पर भारी पड़ सकती है

हालांकि पीठ ने स्पष्ट किया कि तकनीक की मौजूदगी शिष्टाचार से समझौता करने का आधार नहीं हो सकती।

क्या था पूरा मामला

यह विवाद 16 अक्टूबर 2024 को झारखंड हाई कोर्ट में न्यायमूर्ति राजेश कुमार के समक्ष हुई सुनवाई से जुड़ा है।

  • मामला बिजली कनेक्शन से संबंधित था
  • याचिकाकर्ता ने पहले ₹25,000 जमा करने का प्रस्ताव दिया
  • कोर्ट ने पूर्व उदाहरणों का हवाला देते हुए 50% राशि जमा करने की शर्त बताई
  • अंततः ₹50,000 जमा कर मामला निपटा

लेकिन सुनवाई समाप्त होने के बाद वकील और न्यायालय के बीच बातचीत का लहजा बिगड़ गया

आरोप है कि वकील ने-

  • अपने तरीके से बहस करने की बात कही
  • और न्यायाधीश से अनुचित भाषा का प्रयोग किया

हाई कोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान

घटना के बाद झारखंड हाई कोर्ट की पांच न्यायाधीशों की पीठ
जिसमें तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश सहित अन्य वरिष्ठ न्यायाधीश शामिल थे-
ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए वकील को आपराधिक अवमानना का नोटिस जारी किया।

सुप्रीम कोर्ट का अंतिम निर्देश

शीर्ष अदालत ने-

  • याचिकाकर्ता को हाई कोर्ट के समक्ष बिना शर्त माफी का हलफनामा दाखिल करने की अनुमति दी
  • और उच्च न्यायालय से अनुरोध किया कि वह माफी पर संवेदनशीलता के साथ विचार करे

पीठ ने कहा कि-

रिकॉर्ड से यह प्रतीत होता है कि वकील का उद्देश्य न्यायालय का अपमान करना या न्यायिक कार्यवाही में बाधा डालना नहीं था।

बड़ा संदेश

यह फैसला केवल एक वकील तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे न्यायिक तंत्र के लिए एक सख्त चेतावनी है कि-

असहमति हो सकती है, बहस हो सकती है, लेकिन मर्यादा से बाहर जाकर नहीं।

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