सोनभद्र में लिथियम की संभावना, भारत की ऊर्जा तस्वीर बदल सकती है

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O- सोनभद्र में लिथियम और रेयर अर्थ एलीमेंट की प्रबल संभावना

O- सोनभद्र, छत्तीसगढ़ और झारखंड क्षेत्र में अध्ययन की जरूरत

O- सोनभद्र, छत्तीसगढ़ और झारखंड क्षेत्र में अध्ययन की जरूरत

O- पृथ्वी का सबसे पुराना आवरण वाला क्षेत्र है सोनभद्र

O- जिले में अणु ऊर्जा के धातु की मौजूदगी अध्ययन में आई है सामने

म्योरपुर(सोनभद्र)। देश की ऊर्जा राजधानी कहे जाने वाले सोनभद्र में लिथियम और रेयर अर्थ एलिमेंट्स (आरईई) की प्रबल संभावना सामने आई है। भू वैज्ञानिकों के अध्ययन में यह संकेत मिले हैं। जरूरत है क्षेत्र में विस्तृत अध्ययन की। अभी तक के खोज में जम्मू कश्मीर में ही इसकी मौजूदगी की पुष्टि हुई है। विस्तृत अध्ययन में इसकी पुष्टि होती है तो सोनभद्र की विकसित भारत के नवनिर्माण में अहम भूमिका होगी।
लखनऊ विश्वविद्यालय के भू वैज्ञानिक प्रो. विभूति राय और बीएचयू के वरिष्ठ भू वैज्ञानिक प्रो. वैभव श्रीवास्तव ने कहा कि यह जिला पृथ्वी के सबसे पुराने आवरण (क्रस्ट) वाले क्षेत्रों में शामिल है। यहां रणनीतिक और ऊर्जा से जुड़ी धातुओं के भंडार मौजूद हो सकते हैं। उन्होंने जिले के दक्षिणांचल में लिथियम और रेयर अर्थ एलीमेंट्स की प्रबल संभावना जताते हुए इस क्षेत्र में केन्द्र सरकार से विस्तृत भू-वैज्ञानिक अध्ययन कराने की जरूरत बताई है। भू-वैज्ञानिकों के अनुसार सोनभद्र का विंध्य -सिंगरौली क्षेत्र भूगर्भीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहां पाई जाने वाली प्राचीन चट्टानें ढाई से तीन अरब वर्ष पुरानी मानी जाती हैं। यह लिथियम और रेयर अर्थ जैसे खनिजों की उपस्थिति के अनुकूल परिस्थितियां दर्शाती हैं। हाल के प्रारंभिक अध्ययनों में जिले के कुछ हिस्सों में अणु ऊर्जा में उपयोग होने वाली धातुओं की मौजूदगी भी सामने आई है, जिससे इस क्षेत्र का रणनीतिक महत्व और बढ़ गया है। भू-वैज्ञानिकों का कहना है कि अब तक उपलब्ध जानकारियां केवल संभावनाओं की ओर इशारा करती हैं। वास्तविक स्थिति जानने के लिए विस्तृत सर्वे, ड्रिलिंग और प्रयोगशाला परीक्षण आवश्यक हैं। उन्होंने केन्द्र सरकार और जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया से आग्रह किया है कि सोनभद्र क्षेत्र में उच्च स्तरीय वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाए। यदि इन संभावनाओं की पुष्टि होती है, तो सोनभद्र आने वाले वर्षों में ऊर्जा, परमाणु और ग्रीन टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में देश का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।

लिथियम का इलेक्ट्रिक वाहनों की बैट्री में होता है उपयोग
लिथियम वर्तमान समय में इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरियों, विशेषकर ई-रिक्शा और ई-कार की बैटरी निर्माण में प्रमुख रूप से उपयोग होता है। देश में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने की सरकारी नीति के बीच यदि सोनभद्र में लिथियम का व्यावसायिक भंडार मिलता है, तो यह न सिर्फ उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश के लिए बड़ी उपलब्धि होगी।

बभनी और छत्तीसगढ़ सीमा क्षेत्रों में माइका लिथियम
बीएचयू के वरिष्ठ भू वैज्ञानिक प्रो. वैभव श्रीवास्तव के अनुसार उनके अध्ययन में कम मात्रा में माइका लिथियम मिले थे। चूंकि दस साल पहले इस खनिज संपदा पर बहुत जोर नहीं था। इससे इसका गहराई से अध्ययन नहीं किया गया। इसका विस्तार ज्यादा हो सकता है, जो जांच से ही संभव है।

भू वैज्ञानिक ने विस्तृत अध्ययन की कही बात-
सोनभद्र में सबसे पुराने स्थलों में डाला, ओबरा, झिरगाडंडी, रेणुकूट सिंगरौली, बेसिन का हिस्सा है। वही प्राचीन ग्रेनाइट, पंगा और मेटामार्फिक चट्टानों में लिथियम से जुड़े खनिज की संभावना है। वही म्योरपुर क्षेत्र में भी इसकी प्रबल संभावना है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इसकी विस्तृत जांच जरूरी है। वही  प्रो. विभूति राय, भू वैज्ञानिक, लखनऊ विश्वविद्यालय ने बताया की –
हमारे पास सीमित संसाधन होते है। ऐसे में हम केवल नमूने जांच तक सीमित हो जाते है। केंद्र सरकार इसकी विस्तृत जांच कराए तो परिणाम सामने आ सकते है। जांच में पुष्टि हो रही है या नहीं, कितना भंडार है यह केंद्र सरकार की जांच से संभव है”।

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