विधि विधान से शुरू हुआ श्रीमद्भागवत कथा

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अमित मिश्रा

सोनभद्र। श्रीराम जानकी मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के द्वितीय दिवस कथा व्यास वृंदावन से पधारे आचार्य मनोहर कृष्ण  महाराज के द्वारा राजा परीक्षित को श्रृंगी ऋषि के द्वारा श्राप मिला गंगा के किनारे अनशन करना एवं सुखदेव महाराज का आगमन सुखदेव जी महाराज के द्वारा राजा परीक्षित को श्रीमद्भागवत कथा श्रवण कराना सबसे पहले सृष्टि विस्तार का वर्णन किया गया। 

नारायण के ब्रह्मा, ब्रह्मा के द्वारा मनु और शतरूपा की उत्पत्ति हुई मनु के द्वारा ही हम मनुष्य के उत्पत्ति हुई है आगे चलते हुए मनु महाराज के तीन बेटियां और दो पुत्रों का जन्म हुआ आकूति देवहूती और प्रसूती महारानी के वंश का विस्तार से वर्णन किया आकूति के गर्भ से यज्ञ भगवान और दक्षिणा रूपी कन्या का जन्म हुआ। देवहूति के गर्व से कपिल देव भगवान प्रकट हुए जो भगवान के ही रूप हैं कपिल देव भगवान माता देवहूती को शांख योग कर्म योग ज्ञान योग एवं नवधा भक्ति के बारे में विस्तार से वर्णन किया। जीव की गति के बारे में वर्णन किया प्रसूती महारानी का विवाह दक्ष प्रजापति के साथ हुआ उनके यहां कन्या का जन्म हुआ जिसका नाम हुआ सती और सती का विवाह भगवान शिव के साथ हुआ सती माता श्रद्धा है और विश्वास है भगवान शिव जब हम कोई भी कार्य करते हैं हमारे अंदर श्रद्धा और विश्वास होना चाहिए जब ही हमें पूर्ण फल की प्राप्ति होती है।

कथा में ओम प्रकाश पाठक, महेंद्र प्रसाद शुक्ल, आशुतोष पाठक, अजीत शुक्ला, राजेश पांडेय, पंकज कनोडिया, विजय कुमार कनदिया, अनिल पांडेय आदि उपस्थित रहे।

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