श्रीराम कथा के  छठे दिन सीता हरण व जटायु प्रसंग का हुआ वर्णन

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अमित मिश्रा

सोनभद्र(उत्तर प्रदेश)। जनपद में सदर तहसील के जलखोरी गांव में हनुमान मंदिर पर चल रहे मानस यज्ञ एवं श्रीराम कथा के छठे दिन कथा वाचीका मानस माधुरी सुनीता पाण्डेय द्वारा माता अनसूया प्रसंग, सीता हरण व जटायु प्रसंग की कथा का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि गंगा पार करने के उपरांत भगवान राम अनेक ऋषियों मुनियों से मिलते हुए यत्री ऋषि के आश्रम पहुंचते है वहां पर माता अनसूया द्वारा माता सीता को नारी धर्म की शिक्षा दिया जाता है और उसके उपरांत भगवान राम चित्रकूट पहुंचते है।

कथा वाचिका ने इस प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया कि जंगल में रावण की बहन सूर्पनखा भगवान राम एवं लक्ष्मण को अकेला देखकर के वह उनके ऊपर मोहित हो जाती है और अपना सुंदर स्वरुप धारण कर उनसे ब्याह का प्रस्ताव रखती है। भगवान राम द्वारा उसे बार-बार लक्ष्मण के पास एवं लक्ष्मण द्वारा स्वयं को दास बताते हुए भगवान राम के पास भेजा जाता है, जिससे क्रोधित होकर के सूर्पनखा अपने राक्षसी स्वरूप में आकर माता सीता के ऊपर आक्रमण करती है तब भगवान राम का इशारा प्राप्त कर लक्ष्मण द्वारा सूर्पनखा की नाक काट दी जाती है।

वही बहन की नाक कटने से क्रोधित खरदूषण आता है और भगवान श्रीराम के साथ युद्ध करता है जिसमें खर दूषण मारा जाता है तत्पश्चात सूर्पनखा अपने भाई रावण के पास लंका जाती है और उनसे सारी बात बताती है। जिस पर लंका का राजा रावण अपने मामा मारिच को सोने का हिरण बनाकर माता सीता को हरण करने के लिए जाता है। वही सोने का अमृत देखकर के माता सीता भगवान राम से मृग को लाने की इच्छा प्रकट करती हैं,जिस पर भगवान राम सोने हिरण के पीछे चले जाते हैं और लक्ष्मण को माता सीता की रक्षा के लिए छोड़ देते हैं, परंतु कुछ समय उपरांत सोने के हिरन द्वारा है लक्ष्मण का आवाज दे कर मदद की गुहार लगाई जाती है। जिसे सुनकर माता सीता लक्ष्मण को भगवान राम की मदद हेतु जाने के लिए कहती हैं बार-बार मना करने के बाद लक्ष्मण द्वारा कुटिया के सामने लक्ष्मण रेखा खींचकर यह कहा जाता है कि वह इसको लांघेंगी नही। इसके बाद लक्ष्मण भगवान राम की मदद के लिए चले जाते हैं और मौका देखकर रावण ब्राह्मण भेष बनाकर भिक्षा के लिए आता है और माता सीता से लक्ष्मण रेखा के बाहर आकर भिक्षा देने की बात करता है। माता सीता ज्योही लक्ष्मण रेखा को लांघ भिक्षा देने के लिए आगे बढ़ती है रावण द्वारा उनका हरण कर लिया जाता है।

वही भगवान राम को जब सीता हरण का पता चलता है तो वह जंगल में लताओं और पत्तों पेड़ पौधों पर्वतों से पूछते चलते हैं और कहते हैं कि हे खग है मृग मधुकर श्रेनी,तुम देखी सीता मृगनयनी।
माता सीता को ढूंढते हुए वह जटायु से मिलते हैं और अधमरे जटायू द्वारा उन्हें रावण द्वारा सीता हरण की सूचना प्राप्त होती है।  वही माता सीता की खोज में दोनो भाई आगे बढ़ते है जहाँ माता शबरी से मिलते हैं और माता शबरी की नवधा भक्ति से प्रेरित होकर उसके झूठे बेर को बड़े चाव से खाते है।

इस अवसर पर कृष्ण कुमार द्विवेदी, विजय राम पाठक, श्रीकांत पाठक,विजेंद्र नाथ तिवारी,रामपति पाठक, नारायण प्रसाद पाण्डेय,नाम देव पाण्डेय, पुजारी राजेंद्र पाठक एवं कल्पना पाठक,दिलीप सिंह,जयचंद सिंह,कृष्ण कुमार सिंह, गोपी, गोविंद, सुदामा, जयशंकर,सूर्य नारायण सिंह प्रधान, सुरेश पाठक जितेंद्र सिंह,राजेश पटेल,रामप्रसाद सुभाष पाठक, वीरेंद्र पटेल, महेंद्र पटेल, रामकुमार पटेल, राजकुमार सिंह, गोविंद पटेल समेत सैकड़ो लोग उपस्थित रहे।

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