चंदौली जिले के नौगढ़ क्षेत्र में रेशम विभाग की कीट पालन योजना धरातल पर फेल होती नजर आ रही है। आरोप है कि विभाग द्वारा सहतूत के पौधों का रोपण केवल कागजों में दिखाया जा रहा है, जबकि वास्तविकता में आवंटित जमीनों पर झाड़ियां उग आई हैं और कई जगह अतिक्रमण हो चुका है।
जानकारी के अनुसार भरदुआ, जयमोहनी, सोनवार पुरानी भूमि, जयमोहनी पोस्ता और धौठवां क्षेत्र में रेशम कीट पालन के लिए बड़े पैमाने पर भूमि आवंटित की गई थी। शुरुआती दौर में यहां से तैयार होने वाले रेशम कीटों को रांची और झारखंड भेजने की योजना थी, लेकिन विभागीय उदासीनता के कारण यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी।

रेशम विभाग द्वारा हर वर्ष पौधारोपण के नाम पर बजट खर्च किया जाता है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। भरदुआ में रेशम पालन के लिए लगभग 450 हेक्टेयर भूमि आवंटित है, जिसमें से करीब 40 से 50 प्रतिशत भूमि पर अतिक्रमणकारियों का कब्जा बताया जा रहा है।
इसी तरह सोनवार पुरानी भूमि में 450 हेक्टेयर, जयमोहनी नई भूमि में 350 हेक्टेयर, धौठवां में 350 हेक्टेयर और जयमोहनी पोस्ता में करीब 500 हेक्टेयर भूमि रेशम विभाग को आवंटित की गई है। बावजूद इसके अधिकांश स्थानों पर पौधारोपण का कोई स्पष्ट प्रमाण जमीन पर दिखाई नहीं देता।
वहीं बढ़ते अतिक्रमण को देखते हुए जयमोहनी के वन क्षेत्राधिकारी मकसूद हुसैन ने पहल करते हुए जयमोहनी पोस्ता क्षेत्र में अतिक्रमण हटवाया और रेशम विभाग के प्लांटेशन क्षेत्र में सुरक्षा खाई बनवाकर दोबारा पौधारोपण कराया।
इस मामले में उपजिलाधिकारी विकास मित्तल ने बताया कि यदि रेशम विभाग की भूमि पर पौधारोपण नहीं कराया गया है और अतिक्रमण हुआ है तो मामले की जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि प्लांटेशन क्षेत्र में कब्जा पाया गया तो उच्च अधिकारियों को भी अवगत कराया जाएगा और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।






