अमित मिश्रा सोनभद्र। जब दुनियाभर के संग्रहालयों में विश्व संग्रहालय दिवस के अवसर पर सांस्कृतिक उत्सव और पर्यटकों की चहल-पहल देखी जा रही थी, तब ऐतिहासिक और पुरातात्विक दृष्टि से महत्वपूर्ण माने जाने वाले सोनभद्र के शिवद्वार एवं मऊ स्थित संग्रहालय वीरान पड़े रहे। वर्षों से बंद पड़े इन संग्रहालयों की जर्जर स्थिति न सिर्फ प्रशासनिक उपेक्षा को दर्शाती है, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान पर भी प्रश्नचिह्न लगाती है।
सोनभद्र। दुनियाभर के संग्रहालयों में विश्व संग्रहालय दिवस के अवसर पर सांस्कृतिक उत्सव और पर्यटकों की चहल-पहल देखी जा रही थी, तब ऐतिहासिक और पुरातात्विक दृष्टि से महत्वपूर्ण माने जाने वाले सोनभद्र के शिवद्वार एवं मऊ स्थित संग्रहालय वीरान पड़े रहे। वर्षों से बंद पड़े इन संग्रहालयों की जर्जर स्थिति न सिर्फ प्रशासनिक उपेक्षा को दर्शाती है, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान पर भी प्रश्नचिह्न लगाती है।
स्थानीय लोगों के अनुसार शिवद्वार और मऊ गांव में स्थित संग्रहालय कभी ऐतिहासिक मूर्तियों और कलाकृतियों के संरक्षण का केंद्र थे। लेकिन आज इनमें ताले लटके हैं, दीवारें टूट रही हैं और खिड़कियां दरारों से भर गई हैं। पर्यटक, विद्यार्थी और स्थानीय नागरिक संग्रहालय के बंद गेट के बाहर खड़े होकर मायूस लौट रहे हैं।
इतिहासकार दीपक कुमार केसरवानी ने बताया कि लंबे संघर्ष और प्रयासों के बाद वर्ष 2009 में उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व विभाग द्वारा शिवद्वार और मऊ में संग्रहालय स्थापित किए गए थे। लेकिन कुछ वर्षों के संचालन के बाद ये वित्तीय एवं स्टाफ की कमी के कारण बंद हो गए।
अशोक गोस्वामी, जो संग्रहालय में संग्रहित मूर्तियों के संरक्षण में प्रमुख भूमिका निभा चुके हैं, बताते हैं कि मऊ संग्रहालय में कई दुर्लभ प्राचीन मूर्तियां हैं जिन्हें देखने दूर-दराज से पर्यटक आते थे। “हमारा सपना था कि ये संग्रहालय विजयगढ़ दुर्ग जैसे ऐतिहासिक स्थलों के साथ मिलकर क्षेत्र के इतिहास को जीवंत रखेंगे, लेकिन वह सपना अधूरा रह गया,” उन्होंने दुख व्यक्त किया।
शिवद्वार स्थित संग्रहालय की दुर्दशा पर अधिवक्ता राम अनुज धर द्विवेदी ने कहा कि जब लाखों श्रद्धालु शिवद्वार मंदिर दर्शन के लिए आते हैं, तब यह संग्रहालय उनके लिए ऐतिहासिक व सांस्कृतिक जानकारी का स्रोत बन सकता था। लेकिन अब यह भवन केवल एक बंद ढांचा बनकर रह गया है।
स्थानीय नागरिकों की कई बार शिकायतों के बावजूद क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डॉ. रामनारायण पाल की ओर से आश्वासन ही मिले हैं। उन्होंने विभागीय बजट और कर्मचारियों की कमी का हवाला देते हुए भविष्य में सुधार का भरोसा दिलाया है।
स्थानीय निवासियों ने मुख्यमंत्री से गुहार लगाई है कि इन संग्रहालयों को पुनः सक्रिय किया जाए, स्थायी कर्मचारियों की नियुक्ति हो और इन्हें नियमित रूप से पर्यटकों के लिए खोला जाए, ताकि सोनभद्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत जीवित रह सके।







