“शिव ही गुरु, शिव ही मार्ग” आध्यात्मिक चेतना की उठी गूंज

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संवाददाता: गौरव पाण्डेय

वैनी (सोनभद्र)। उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जनपद के नगवां ब्लॉक स्थित कोहरावल गांव में रविवार को आयोजित शिव गुरु महोत्सव ने आध्यात्मिक जागरण की एक नई मिसाल पेश की। हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज को ज्ञान, समरसता और आत्मिक जुड़ाव का संदेश देने वाला राष्ट्रीय स्तर का आध्यात्मिक अभियान बनकर उभरा।

महोत्सव का मूल उद्देश्य हर व्यक्ति को भगवान शिव के गुरु स्वरूप से जोड़ना था,एक ऐसा विचार जो जाति, धर्म, लिंग और संप्रदाय की सीमाओं से परे, सम्पूर्ण मानवता को एक सूत्र में पिरोने का संदेश देता है।

कार्यक्रम की मुख्य वक्ता दीदी बरखा आनंद ने अपने प्रेरणादायक उद्बोधन में कहा कि “शिव केवल नाम के नहीं, बल्कि कर्म के भी गुरु हैं। जिस प्रकार उनके अवघड़दानी स्वरूप से भौतिक सुख-संपदा प्राप्त करने की परंपरा है, उसी प्रकार उनके गुरु स्वरूप से ज्ञान प्राप्त करना भी उतना ही आवश्यक है। बिना ज्ञान के संपदा भी विनाश का कारण बन सकती है।”

उन्होंने आगे कहा कि भगवान शिव आदि गुरु और जगतगुरु हैं, और कोई भी व्यक्ति बिना किसी जटिल विधि-विधान या औपचारिक दीक्षा के, केवल एक विचार के माध्यम से शिव को अपना गुरु स्वीकार कर सकता है। यही विचार जब स्थायी हो जाता है, तो व्यक्ति स्वतः शिव का शिष्य बन जाता है।

इस आध्यात्मिक अवधारणा की नींव शिव शिष्य साहब श्री हरिंद्रानंद जी ने वर्ष 1974 में रखी थी, जो 1980 के दशक तक देशभर में व्यापक रूप से फैल गई। उन्होंने अपनी धर्मपत्नी दीदी नीलम आनंद जी के साथ मिलकर समाज के हर वर्ग को इस दिव्य विचारधारा से जोड़ने का आह्वान किया।

दीदी बरखा आनंद ने शिव शिष्य बनने के तीन सरल सूत्र भी बताए-
पहला, मन ही मन शिव को अपना गुरु स्वीकार करना।
दूसरा, इस विचार को समाज में प्रचारित करना ताकि अन्य लोग भी प्रेरित हों।
तीसरा, अपने गुरु शिव को नित्य प्रणाम करना, चाहे “नमः शिवाय” मंत्र के माध्यम से ही क्यों न हो।

उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पूरी प्रक्रिया में किसी भी प्रकार के आडम्बर या अंधविश्वास का कोई स्थान नहीं है, यह पूर्णतः एक शुद्ध आध्यात्मिक साधना है।

महोत्सव में उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड सहित विभिन्न क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं ने भाग लिया। कार्यक्रम में विजय कुमार, कैलाश प्रसाद गुप्ता, पूर्व जिला संयोजक कमलेश सिंह, बक्सर (बिहार) से सतीश दास, रांची से शिवकुमार विश्वकर्मा और टेकारी से राजकुमार सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि एक ऐसे आध्यात्मिक आंदोलन के रूप में सामने आया, जो भारत की सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित करते हुए “एक गुरु शिव” के विचार को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य कर रहा है।

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