वन भूमि पर कब्जा, अधिकारियों की चुप्पी से उठे सवाल

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अमित मिश्रा

O – लोढ़ी गांव की जमीन पर कब्जा बना चर्चित मुद्दा, कभी DFO ने बताया था सरकारी जंगल

सोनभद्र l जिले के लोढ़ी गांव में वन भूमि पर हो रही प्लॉटिंग ने जिले की प्रशासनिक कार्यशैली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस भूमि को कभी तत्कालीन डीएफओ संजीव कुमार सिंह ने “वन भूमि” बताते हुए उस पर अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी, आज उसी जमीन पर खुलेआम निजी कब्जा और प्लॉटिंग हो रही है।

राष्ट्रीय लोकदल के जिलाध्यक्ष श्रीकांत और पूर्वांचल नव निर्माण मंच के उपाध्यक्ष गिरीश पाण्डेय ने इस मामले में प्रशासन की भूमिका पर तीखा हमला बोला है। उनका कहना है कि डीएफओ ने जिस जमीन पर अतिक्रमण की शिकायत की थी, वहां आज निजी लोगों के नाम दर्ज हो रहे हैं और प्लॉटिंग शुरू हो चुकी है।

दोनों नेताओं ने इस मामले को प्रशासनिक लापरवाही और ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति की विफलता करार देते हुए कहा कि अगर इसी तरह सरकारी ज़मीनें निजी हाथों में जाती रहीं, तो कानून का राज सिर्फ़ कागज़ों में रह जाएगा।

उन्होंने मांग की है कि लोढ़ी गांव के सर्किट हाउस के बगल स्थित विवादित वन भूमि पर हो रही प्लॉटिंग की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

क्या सोनभद्र में वन भूमि सुरक्षित है?
या फिर नियमों को ताक पर रखकर भूमाफिया प्रशासन की आंखों के सामने खेल रहे हैं खुला खेल?

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