शेयर ट्रेडिंग के नाम पर करोड़ो की ठगी,दुबई से गिरोह संचालित कर रहा लविश चौधरी

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अमित मिश्रा

दुबई से चलता था हजारों करोड़ से ज्यादा की साइबर ठगी का साम्राज्य,

सोनभद्र पुलिस का इंटरनेशनल ऑपरेशन,

चार आरोपी गिरफ्तार , मास्टरमाइंड लविश चौधरी पर इंटरपोल के जरिए शिकंजे की तैयारी।

चार पुलिस कर्मियों से 25 लाख03 रुपये की शेयर ट्रेडिंग से हुई ठगी

सोनभद्र(उत्तर प्रदेश)। साइबर पुलिस ने एक ऐसी कार्रवाई को अंजाम दिया है जिसने जिले की सीमाओं को लाँघ देश ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सनसनी फैला दी है। चार पुलिसकर्मियों से 25 लाख 03 रुपये की साइबर ठगी से शुरू हुई जांच अब 500 करोड़ रुपये से अधिक के विशाल इंटरनेशनल साइबर फ्रॉड नेटवर्क तक पहुंच गई है। पुलिस अधीक्षक अभिषेक वर्मा के मुताबिक शुरुआती जांच में 500 करोड़ रुपये से ज्यादा के ट्रांजैक्शन सामने आए हैं और यह आंकड़ा हजारों करोड़ तक पहुंच सकता है। इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड दुबई में बैठा लविश चौधरी बताया जा रहा है, जिसके खिलाफ मध्य प्रदेश, तेलंगाना व हिमाचल प्रदेश समेत कई राज्यों में पहले से मुकदमे दर्ज हैं। इतना ही नहीं, इस नेटवर्क ने सोनभद्र पुलिस के एक जवान तक को अपना शिकार बनाया था। लखनऊ से गिरोह के चार आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस इंटरपोल के जरिए मास्टरमाइंड लविश चौधरी को भारत लाने की तैयारी में जुट गई है।

जनपद के चोपन थाना में तैनात दीपक कुमार ने साइबर थाना में एफआईआर दर्ज कराया तो मामले की जांच जब शुरू हुई तो Botbro, Crossmarket और MineCrypto जैसे ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर हर महीने 8 से 10 प्रतिशत मुनाफे का झांसा दिया गया। शुरुआत में निवेश पर कुछ रकम वापस कर भरोसा जीत लिया गया। लेकिन जैसे ही पीड़ित ने बड़ी रकम निवेश की, उसका पूरा पैसा गायब हो गया। देखते ही देखते 25 लाख 03 रुपये की साइबर ठगी हो गई।

शिकायत मिलते ही साइबर क्राइम थाना सोनभद्र में मुकदमा दर्ज हुआ। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर साइबर थाना, स्वाट टीम और तकनीकी विशेषज्ञों ने बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, डिजिटल ट्रांजैक्शन और मनी ट्रेल की गहन जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि ठगी की रकम अलग-अलग खातों में भेजकर पूरे नेटवर्क में घुमाई जा रही थी। इसी मनी ट्रेल को फॉलो करते हुए पुलिस लखनऊ तक पहुंची और सुफियान, दानिश, अरशद सिद्दीकी तथा तुफैल खान को गिरफ्तार कर लिया। इनके कब्जे से पांच मोबाइल फोन, एक लैपटॉप और एक चार पहिया वाहन बरामद किया गया है। पुलिस अब इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच करा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि देशभर में कितने लोग इस गिरोह का शिकार बने और किन-किन बैंक खातों तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए इस नेटवर्क का संचालन किया जा रहा था।

गिरफ्तार आरोपी:- सुफियान पुत्र इजराइल खान, निवासी बद्रीनगर नादरगंज अमौसी थाना सरोजनीनगर ,लखनऊ

मोहम्मद दानिश पुत्र अजमेर अली , निवासी 529/231 रहिमनगर थाना महानगर ,लखनऊ

अरशद सिद्दकी पुत्र जावेद इकबाल ,निवासी 474/ए20 ब्रह्मनगर थाना हसनगंज ,लखनऊ

तुफैल खान पुत्र इजराइल खान,निवासी बद्रीनगर नादरगंज अमौसी थाना सरोजनीनगर ,लखनऊ

पुलिस अधीक्षक अभिषेक वर्मा ने इस पूरे खुलासे को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि जांच के दौरान अब तक करीब 500 करोड़ रुपये के संदिग्ध ट्रांजैक्शन सामने आ चुके हैं। शुरुआती अनुमान है कि यह रकम हजारों करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। पुलिस के मुताबिक इस पूरे इंटरनेशनल नेटवर्क का मास्टरमाइंड लविश चौधरी है, जो दुबई में बैठकर पूरे साइबर सिंडिकेट का संचालन करता था। उसके खिलाफ मध्य प्रदेश, तेलंगाना समेत देश के कई राज्यों में पहले से साइबर ठगी के मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस का कहना है कि लविश चौधरी के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस पहले ही जारी है और अब इंटरपोल की कानूनी प्रक्रिया पूरी कर उसे भारत लाने की दिशा में कार्रवाई तेज की जा रही है। यही वजह है कि सोनभद्र पुलिस इस कार्रवाई को अपनी बड़ी अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि के रूप में देख रही है।
जांच में यह भी सामने आया है कि दुबई में बैठा मास्टरमाइंड लोगों के बीच अपनी आलीशान जिंदगी का दिखावा करता था। महंगी गाड़ियों, लग्जरी लाइफस्टाइल, बड़े-बड़े इवेंट और नामी हस्तियों के साथ तस्वीरें व वीडियो सोशल मीडिया पर साझा कर लोगों का भरोसा जीतता था। इतना ही नहीं, उसने वहां “नबाब” नाम से क्रिकेट टीम तक बना रखी थी। इसी चमक-दमक को देखकर लोग उसे सफल कारोबारी समझ बैठते थे और करोड़ों रुपये तक निवेश कर देते थे।

इस तरह करते थे ठगी:- गिरोह का तरीका भी बेहद शातिर था। शुरुआत में निवेश करने वाले लोगों को समय पर ब्याज और मुनाफा दिया जाता था ताकि उनका भरोसा मजबूत हो जाए। इसके बाद जब कोई कारोबारी, नौकरीपेशा व्यक्ति या निवेशक बड़ी रकम लगा देता था तो अचानक भुगतान बंद कर दिया जाता था। निवेशकों के अकाउंट ब्लॉक कर दिए जाते थे और पूरा पैसा नेटवर्क के अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था। इसी मॉडल के जरिए देशभर के हजारों लोगों को करोड़ों रुपये की चपत लगाई गई।

फिलहाल साइबर पुलिस पूरे नेटवर्क की परत-दर-परत जांच कर रही है। पुलिस को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में कई और गिरफ्तारियां हो सकती हैं और देश के सबसे बड़े इंटरनेशनल साइबर फ्रॉड नेटवर्क का और भी बड़ा खुलासा होगा। साइबर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी ऑनलाइन ट्रेडिंग या निवेश प्लेटफॉर्म पर पैसा लगाने से पहले उसकी वैधता की पूरी जांच जरूर करें, क्योंकि लालच में किया गया एक क्लिक आपकी जिंदगी भर की कमाई भी छीन सकता है।

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