डाकघर की 2 बीघा सरकारी जमीन पर भू-माफिया का कब्ज़ा

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अमित मिश्रा 8115577137

O- अवैध खरीद-फरोख्त और निर्माण का बड़ा खुलासा

O- खतौनी में लगभग 2 बीघा भूमि डाक विभाग के नाम दर्ज

O- डाकघर मौके पर सिर्फ 7 बिस्वा पर बना डाकघर, शेष जमीन निजी बताकर बेची जा रही

O- जिला पंचायत सोनभद्र ने भेजा नोटिस

सोनभद्र । उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जनपद से सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। प्रधान डाकघर रॉबर्ट्सगंज की बहुमूल्य सरकारी भूमि को अवैध रूप से बेचने-खरीदने और उस पर निर्माण कराए जाने के गंभीर आरोप लगे हैं। यह मामला अब केवल जमीन विवाद नहीं, बल्कि भू-माफिया, भ्रष्टाचार और कथित प्रशासनिक संरक्षण की ओर इशारा कर रहा है।

प्राप्त शिकायत पत्र के अनुसार, राजस्व अभिलेख (खतौनी) में डाकघर के नाम कुल लगभग 2 बीघा सरकारी भूमि दर्ज है । चौंकाने वाली स्थिति यह है कि मौके पर मात्र 7 बिस्वा भूमि पर ही डाकघर का भवन बना हुआ है, जबकि शेष भूमि पर कथित तौर पर भू-माफियाओं ने अवैध कब्ज़ा कर उसे निजी संपत्ति की तरह बेचने और निर्माण कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है ।

शिकायत में उल्लेख है कि संबंधित भूमि पुराने बंदोबस्त अभिलेखों में पोस्ट ऑफिस, पोस्टमास्टर आवास, पोस्टमैन क्वार्टर एवं डाक विभाग से जुड़े अन्य उपयोगों के नाम दर्ज रही है। इसके बावजूद, आरोप है कि राजस्व विभाग और डाक विभाग के कुछ अधिकारियों से सांठ-गांठ कर सरकारी जमीन को निजी बताकर सौदे किए गए।

स्थानीय नागरिकों और शिकायतकर्ता का आरोप है कि जिन लोगों को जिला पंचायत द्वारा पहले ही “भू-माफिया श्रेणी” में चिन्हित किया जा चुका है, वही लोग आज डाकघर की सरकारी जमीन पर खुलेआम अवैध करा रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि नोटिस जारी होने के बावजूद निर्माण कार्य नहीं रुका, जिससे प्रशासनिक संरक्षण की आशंका और गहरा गई है।

जिला पंचायत सोनभद्र ने इस प्रकारण कों गंभीर माना है इस मामले मे क्रेता व विक्रेताओं को नोटिस भी भेज कर 3 दिवस मे जवाब तालाब किया है। लेकिन विडंबना इस बात की है की अभी तक क्रेता व विक्रेता जिला पंचायत सोनभद्र के कार्यालय मे उपस्थित हुआ ना ही लिखित जवाब दिया।

मामले को लेकर शिकायतकर्ता ने मिर्जापुर मंडल के आयुक्त एवं जिलाधिकारी से मांग की है कि – सरकारी डाकघर की शेष भूमि को तत्काल अवैध कब्ज़े से मुक्त कराया जाए,
चल रहे निर्माण कार्य पर फौरन रोक लगाई जाए,
और सरकारी भूमि की अवैध खरीद-फरोख्त में शामिल भू-माफियाओं व दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

जानकारों का मानना है कि यदि डाकघर जैसी केंद्रीय सरकारी संस्था की जमीन सुरक्षित नहीं है, तो अन्य सरकारी संपत्तियों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। यह मामला अब राजस्व व्यवस्था की पारदर्शिता, प्रशासनिक इच्छाशक्ति और कानून के शासन की एक बड़ी परीक्षा बन चुका है।

अब सबकी निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि वह डाकघर की 2 बीघा सरकारी जमीन को भू-माफिया के कब्ज़े से मुक्त कराकर न्याय सुनिश्चित करता है या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाता है।

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