यूजीसी के विरोध में सोनभद्र में उबाल, सवर्ण समाज के युवक ने खून से लिखा राष्ट्रपति के नाम ‘रक्तपत्र’

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अमित मिश्रा

सोनभद्र । विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से जुड़े निर्णयों के खिलाफ देशभर में चल रहा विरोध अब उग्र रूप लेने लगा है। उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जनपद में कलेक्ट्रेट परिसर उस समय आंदोलन का केंद्र बन गया, जब बड़ी संख्या में छात्र, युवा और सामाजिक संगठनों ने यूजीसी की नीतियों के विरुद्ध प्रदर्शन किया। इस दौरान सामने आई एक तस्वीर ने पूरे आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया, जब सवर्ण समाज के एक युवक ने अपने खून से राष्ट्रपति के नाम अपने खून से लिखा ‘रक्तपत्र’ लिखकर सरकार तक अपनी पीड़ा पहुँचाने की कोशिश की।

कलेक्ट्रेट परिसर में जमा जनसैलाब यूजीसी के फैसलों को लेकर व्याप्त गहरे असंतोष को दर्शाता नजर आया। हाथों में तख्तियां, नारेबाजी और आक्रोश से भरे स्वर यह संकेत दे रहे थे कि शिक्षा से जुड़े इन निर्णयों को लेकर युवाओं में भारी नाराज़गी है। प्रदर्शन में छात्र, युवा और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल रहे, जिन्होंने एक स्वर में यूजीसी की नीतियों का विरोध किया।

इसी शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान सवर्ण समाज के युवक द्वारा उठाया गया कदम आंदोलन का सबसे संवेदनशील और प्रतीकात्मक क्षण बन गया। युवक ने अपने खून से लिखे रक्तपत्र में यह संदेश दिया कि यूजीसी की नीतियां केवल किसी एक वर्ग को नहीं, बल्कि समाज के हर तबके सवर्ण, पिछड़ा और दलित के भविष्य को प्रभावित कर रही हैं। युवक का कहना था कि जब बार-बार की मांगों और ज्ञापनों के बावजूद सुनवाई नहीं होती, तो विवश होकर ऐसे कठोर और भावनात्मक कदम उठाने पड़ते हैं।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि यूजीसी के हालिया फैसलों से युवाओं का भविष्य अंधकार की ओर धकेला जा रहा है। इस रक्तपत्र को उन्होंने सरकार के लिए एक चेतावनी बताया और स्पष्ट किया कि यदि नीतियों पर पुनर्विचार नहीं किया गया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

प्रदर्शन के दौरान मौजूद सामाजिक कार्यकर्ता आरती पाण्डेय ने कहा कि यह आंदोलन किसी एक वर्ग का नहीं, बल्कि शिक्षा और युवाओं के भविष्य से जुड़ा सवाल है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने समय रहते कदम नहीं उठाया, तो यह आंदोलन सोनभद्र की सीमाओं से निकलकर राज्य और देश के अन्य हिस्सों तक फैल सकता है।

हालांकि पूरा प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन संदेश साफ है, यूजीसी को लेकर उपजा यह असंतोष अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच रहा है।

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