अस्पताल सील, ताला और जांच का खेल

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सी एस पाण्डेय

O- बभनी में कथित अवैध अस्पताल पर स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली कटघरे में

बभनी (सोनभद्र/उत्तर प्रदेश)। सील किए गए अस्पताल का दोबारा खुल जाना, ताले का टूटना और जांच के बाद “सब ठीक” की रिपोर्ट, बभनी क्षेत्र में सामने आए इस घटनाक्रम ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों की शिकायत पर कार्रवाई, फिर उसी कार्रवाई का कमजोर पड़ जाना, यह संकेत देता है कि अवैध चिकित्सा कारोबार के खिलाफ तंत्र कितना प्रभावी है।

बभनी मोड़ स्थित नीरज होम्योहॉल को एलोपैथिक दवाओं की अवैध बिक्री और इलाज की शिकायतों के बाद स्वास्थ्य विभाग द्वारा सील किया गया था। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि कुछ ही दिनों के भीतर अस्पताल दोबारा चालू पाया गया।

शिकायत से सील तक, फिर खुला ताला

स्थानीय लोगों के अनुसार नीरज होम्योहॉल में होम्योपैथिक लाइसेंस की आड़ में एलोपैथिक दवाओं का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जा रहा था। शिकायत मिलने पर स्वास्थ्य विभाग के सह-नोडल अधिकारी गुरु प्रसाद ने संस्थान को सील कर दिया।

हालांकि सील होने के महज चार दिन बाद ही अस्पताल का ताला टूट गया और संचालन फिर शुरू हो गया। ग्रामीणों के विरोध और मीडिया में खबरें प्रकाशित होने के बाद इसे पुनः बंद कराया गया, लेकिन यह स्थिति ज्यादा देर तक नहीं रही।

जांच में सब ठीक?

सोमवार को होम्योपैथिक विभाग की ओर से जिला स्तर की जांच हुई। इस दौरान मुख्य चिकित्सा अधिकारी सूर्यप्रकाश त्रिपाठी मौके पर पहुंचे। जांच के बाद उन्होंने बयान दिया कि यह कोई नर्सिंग होम नहीं, बल्कि थोक दवा विक्रेता है, जहां न तो खुदरा दवाएं बेची जा सकती हैं और न ही मरीजों का इलाज किया जा सकता है।

अधिकारियों का कहना है कि जांच के समय कोई एलोपैथिक दवा या इलाज के प्रमाण नहीं मिले। साथ ही यह भी जोड़ा गया कि भविष्य में यदि इलाज या दवा बिक्री की शिकायत पाई गई तो कार्रवाई की जाएगी।

दो विभाग, दो तस्वीरें

ग्रामीणों का आरोप है कि सील टूटने के फोटो और वीडियो उनके पास मौजूद हैं, बावजूद इसके जांच में सब कुछ “ओके” बताया गया। यही नहीं, एक ओर अस्पताल सील होने की बात कही गई, तो दूसरी ओर वह कुछ समय तक खुलेआम संचालित होता रहा।

स्वास्थ्य विभाग और होम्योपैथिक विभाग की अलग-अलग कार्यवाही ने लोगों के मन में यह सवाल पैदा कर दिया है कि आखिर किसकी जिम्मेदारी तय होगी। स्थानीय लोगों का कहना है कि ताला लगाने और खोलने की प्रक्रिया में बड़ा खेल चल रहा है।

ग्रामीणों के गंभीर आरोप

नाम न छापने की शर्त पर कुछ ग्रामीणों ने दावा किया कि इस पूरे मामले में लेन-देन की भी भूमिका हो सकती है। उनका कहना है कि पहले से लंबित शिकायतें, जिनमें इलाज में लापरवाही और महिला मरीज से जुड़ा एक गंभीर मामला शामिल है,भी अब ठंडे बस्ते में जाती दिखाई दे रही हैं।

बभनी की यह घटना सिर्फ एक अस्पताल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे स्वास्थ्य तंत्र की जवाबदेही पर सवाल खड़ा करती है। जब सील तोड़कर अस्पताल फिर से चल सकता है और जांच में सब कुछ सही बताया जा सकता है, तो अवैध अस्पतालों पर लगाम कैसे लगेगी?

बभनी में सील अस्पताल का ताला टूटा, जांच में “सब ठीक”: स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर सवाल

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