बीएसपी के पूर्व एमएलसी की 276 करोड़ रुपये की 56 प्रॉपर्टी जब्त

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अनिल कुमार

पूर्व एमएलसी  हाजी मोहम्मद इकबाल की अब तक जब्त की गई कुल प्रॉपर्टी ₹2,000 करोड़ से ज़्यादा

सहारनपुर(उत्तर प्रदेश)।  प्रशासन ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए बहुजन समाज पार्टी के पूर्व एमएलसी हाजी मोहम्मद इकबाल की 56 प्रॉपर्टी को जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए जब्त किया है। जिला प्रशासन के मुताबिक इन प्रॉपर्टी की कुल अनुमानित कीमत लगभग ₹276 करोड़ है। यह कार्रवाई पहले दर्ज मामलों के आधार पर की गई। पुलिस के मुताबिक, बीएसपी के एमएलसी ने ये प्रॉपर्टी गैर-कानूनी माइनिंग से कमाए पैसे से खरीदी थीं। उन्होंने अपने असर के चलते कुछ प्रॉपर्टी पर ज़बरदस्ती कब्ज़ा कर लिया था। इकबाल और उनके परिवार के खिलाफ़ गरीब किसानों से धोखाधड़ी करके ज़मीन हड़पने के दर्जनों मामले चल रहे हैं। इकबाल के फरार होने के बाद, पुलिस ने न सिर्फ़ उनके खिलाफ़ गैंगस्टर कानूनों के तहत आरोप दर्ज किए हैं, बल्कि इनाम की रकम भी बढ़ाकर ₹100,000 कर दी है।

बता दें कि सहारनपुर जिला प्रशासन की एक टीम शुक्रवार को जिले के मिर्जापुर इलाके में पहुंची थी। इस दौरान, शाहपुर गढ़ा, मिर्जापुर पोल और शेरपुर पिलो समेत कई जगहों पर पूर्व BSP एमएलसी और माइनिंग माफिया हाजी इकबाल की प्रॉपर्टी की पहचान कर उन्हें जब्त किया गया। प्रशासनिक अधिकारियों ने माइक्रोफोन से अनाउंसमेंट किया और प्रॉपर्टी पर जब्ती के साइन लगाए। किसी भी तरह की गड़बड़ी रोकने के लिए प्रशासनिक और पुलिस कर्मी भी मौजूद थे। कार्रवाई शांति से पूरी हुई। सहारनपुर में हुई इस बड़ी कार्रवाई के बाद इलाके में चहल-पहल बढ़ गई। स्थानीय लोग कार्रवाई को लेकर चर्चा कर रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई कानून के दायरे में की जा रही है और सभी नियमों का पूरी तरह पालन किया गया है।

बहुजन समाज पार्टी के पूर्व एमएलसी हाजी मोहम्मद इकबाल के खिलाफ दो दर्जन से ज्यादा केस दर्ज हैं। इन्हीं केसों के आधार पर प्रशासन ने यह सख्त कार्रवाई की है। गौरतलब है कि कभी छोटी सी किराने की दुकान चलाने वाले इकबाल बाला बीएसपी सरकार में न सिर्फ उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े माइनिंग माफिया बने, बल्कि गैर-कानूनी माइनिंग के जरिए हजारों करोड़ की दौलत भी बनाई। अपनी दौलत के दम पर हाजी इकबाल उस समय की मुख्यमंत्री मायावती के खास बन गए। इसी वजह से मायावती ने उन्हें एमएलसी बनाकर 2010 में विधान परिषद भेजा। इसके बाद हाजी इकबाल के कहने पर उनके गुर्गों ने मिर्जापुर पोल थाना इलाके में गांव वालों पर ज़ुल्म करना शुरू कर दिया। उन्होंने उनकी खेती की ज़मीन पर ज़बरदस्ती कब्ज़ा कर लिया। विरोध करने वालों को न सिर्फ पीटा जाता था, बल्कि उन पर झूठे केस भी लगाए जाते थे।

बीएसपी के बाद 2012 में समाजवादी पार्टी की अखिलेश यादव सरकार के दौरान भी हाजी इकबाल का असर कम होता गया। उन्होंने सरकार और प्रशासन से मिलीभगत करके गरीब किसानों पर जुल्म किया। उन्होंने हज़ारों एकड़ जमीन पर कब्ज़ा करके अपने नौकरों, क्लर्कों और रिश्तेदारों के नाम कर दी। 2017 में जब योगी सरकार सत्ता में आई, तो पीड़ितों को न्याय की उम्मीद फिर से जगी, तो उन्होंने पुलिस अधिकारियों को अपनी आपबीती सुनाई और केस दर्ज कराया। पुलिस की जांच के बाद, पीड़ितों की शिकायतों के आधार पर पुलिस ने केस दर्ज किए। इकबाल की करतूतें एक के बाद एक सामने आईं।

हाजी इकबाल की प्रॉपर्टी मिर्ज़ापुर और बेहट पुलिस थानों में हैं। उसने यह दौलत गैर-कानूनी माइनिंग से कमाई थी। इसके अलावा, उसने गरीब, लाचार किसानों की ज़मीन पर ज़बरदस्ती कब्ज़ा किया। विरोध करने पर उन्हें न सिर्फ़ पीटा जाता था, बल्कि उन पर झूठे केस भी दर्ज किए जाते थे। खास बात यह है कि माइनिंग माफिया ने अपने रिश्तेदारों और करीबी नौकरों के नाम पर बड़ी प्रॉपर्टी कर रखी थी।

हाजी इकबाल और उसके परिवार पर गैर-कानूनी माइनिंग, गैर-कानूनी कब्ज़ा, मारपीट, धमकी, धोखाधड़ी और रेप जैसी कई धाराओं में दर्जनों केस दर्ज हैं। यही वजह है कि माइनिंग माफिया हाजी इकबाल अंडरग्राउंड काम कर रहा है, जबकि उसके भाई, पूर्व एमएलसी महमूद अली और तीन बेटे जेल की सज़ा काट चुके हैं और फिलहाल ज़मानत पर बाहर हैं।

इस बीच  पुलिस माइनिंग माफिया हाजी इकबाल को गिरफ्तार करने की कोशिश कर रही है। डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट की मंज़ूरी के बाद, लगभग ₹2,000 करोड़ की बेनामी प्रॉपर्टी को सरकारी प्रॉपर्टी में शामिल कर लिया गया है।

एसडीएम बेहट मानवेंद्र सिंह ने बताया कि हाजी मोहम्मद इकबाल के खिलाफ दर्ज मामलों में कानूनी प्रक्रियाओं के बाद प्रॉपर्टी ज़ब्त की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि लगभग ₹276 करोड़ की 56 प्रॉपर्टी के खिलाफ कार्रवाई की गई है, और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी। अधिकारियों के मुताबिक, मामले के दूसरे पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

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