नौगढ़ में आरक्षित वन भूमि पर चल रही देशी शराब की दुकानों पर वन विभाग की सख्ती, 31 जनवरी तक हटाने का अंतिम अल्टीमेटम

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चंदौली जिले के नौगढ़ तहसील क्षेत्र अंतर्गत जयमोहनी एवं मझगाई रेंज में आरक्षित वन भूमि के भीतर संचालित देशी शराब की दुकानों के विरुद्ध वन विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए निर्णायक कार्रवाई शुरू कर दी है। बुधवार को वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर संबंधित शराब दुकानों के सेल्समैनों को विधिवत नोटिस जारी किए तथा दुकानों पर विभागीय आदेश चस्पा कर दिए। इस कार्रवाई से शराब ठेकेदारों में हड़कंप मच गया है।

रेंज अधिकारी अमित श्रीवास्तव ने इस संबंध में जिला आबकारी अधिकारी को पत्र भेजते हुए स्पष्ट किया है कि आरक्षित वन भूमि के भीतर संचालित सभी देशी शराब की दुकानों को 31 जनवरी तक अनिवार्य रूप से हटाया जाए। पत्र में यह भी चेतावनी दी गई है कि निर्धारित समय-सीमा के भीतर यदि दुकानों का संचालन बंद नहीं कराया गया, तो 31 जनवरी के बाद पुलिस बल की सहायता से बलपूर्वक हटाने की कार्रवाई की जाएगी अथवा उपजिलाधिकारी (एसडीएम) के माध्यम से दुकानों को सील किया जाएगा।

वन विभाग ने अपने पत्र में साफ तौर पर उल्लेख किया है कि आरक्षित वन भूमि पर किसी भी प्रकार का व्यावसायिक संचालन पूर्णतः अवैध है और इसे किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन व्यक्तियों द्वारा वन भूमि पर अतिक्रमण कर मकान या अन्य निर्माण कराए गए हैं, उनके विरुद्ध भी वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। वन क्षेत्राधिकारी का कहना है कि अवैध निर्माण को वैध करने का कोई प्रावधान नहीं है और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई चरणबद्ध एवं नियमानुसार की जाएगी।

वन विभाग की इस कार्रवाई से क्षेत्र की महिलाओं में विशेष प्रसन्नता देखी जा रही है। महिलाओं का कहना है कि वे लंबे समय से जंगल के भीतर खुली शराब दुकानों का विरोध कर रही थीं। उनका आरोप था कि इन दुकानों के कारण सामाजिक माहौल प्रभावित हो रहा था और जंगल क्षेत्र में असुरक्षा की स्थिति उत्पन्न हो रही थी। वन विभाग की सख्ती को महिलाओं ने अपनी मांगों की जीत बताया है।

उल्लेखनीय है कि रेंज अधिकारी अमित श्रीवास्तव बीते सप्ताह अग्रिम मृदा कार्यों के निरीक्षण के दौरान वन क्षेत्रों में भ्रमण पर थे। इसी दौरान दो से तीन स्थानों पर देशी शराब की दुकानें संचालित होती दिखाई दीं। संदेह होने पर संबंधित दुकानों की जीपीएस लोकेशन ट्रेस कराई गई, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि दुकानें आरक्षित वन भूमि के भीतर संचालित हो रही हैं। जांच की पुष्टि के बाद वन विभाग ने तत्काल नोटिस जारी कर कार्रवाई प्रारंभ कर दी। 

इस पूरे प्रकरण में आबकारी विभाग एवं शराब ठेकेदारों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बिना भूमि की वैधता जांचे तथा आवश्यक एनओसी के अभाव में शराब दुकानों की चौहद्दी तय कर संचालन शुरू करना नियमों की खुली अवहेलना मानी जा रही है। वन विभाग ने मामले की विस्तृत रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

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