ओडिशा से यूपी तक फैला ड्रग सिंडिकेट बेनकाब: 868 किलो गांजा, 1.16 करोड़ की बरामदगी, 6 तस्कर गिरफ्तार

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अमित मिश्रा

O- जड़ी-बूटियों की आड़ में चल रहा था करोड़ों का नशे का कारोबार, एस्कॉर्ट कार से पुलिस की गतिविधियों पर रखी जाती थी नजर

सोनभद्र (उत्तर प्रदेश)। सोनभद्र में पुलिस और एसटीएफ लखनऊ यूनिट ने एक ऐसी कार्रवाई को अंजाम दिया है जिसने पूर्वी उत्तर प्रदेश में सक्रिय एक बड़े अंतरराज्यीय मादक पदार्थ तस्करी नेटवर्क की परतें खोल दी हैं। संयुक्त ऑपरेशन में 868 किलोग्राम से अधिक अवैध गांजा बरामद करते हुए छह तस्करों को गिरफ्तार किया गया है। बरामद गांजा, वाहन, मोबाइल फोन, आईफोन और नकदी समेत कुल बरामदगी की कीमत लगभग 1 करोड़ 16 लाख रुपये आंकी गई है।

जांच एजेंसियों के अनुसार यह कोई सामान्य तस्करी नहीं, बल्कि एक सुव्यवस्थित और संगठित नेटवर्क था, जो ओडिशा से गांजा खरीदकर उत्तर प्रदेश के कई जिलों में सप्लाई कर रहा था। पुलिस को लंबे समय से इस गिरोह की गतिविधियों की सूचना मिल रही थी। इसके बाद सोनभद्र पुलिस और एसटीएफ लखनऊ ने संयुक्त रणनीति तैयार कर जाल बिछाया और आखिरकार तस्करों को रंगे हाथों दबोच लिया।

जड़ी-बूटियों की बोरियों में छिपाकर लाई जा रही थी खेप

तस्करों ने पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को भ्रमित करने के लिए बेहद शातिर तरीका अपनाया था। डीसीएम वाहन में जड़ी-बूटियों और अन्य सामान की बोरियों के बीच गांजे की बड़ी खेप छिपाई गई थी, ताकि सामान्य जांच में किसी को शक न हो। लेकिन खुफिया सूचना के आधार पर जब वाहन की गहन तलाशी ली गई तो करोड़ों रुपये का नशा बरामद हो गया।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक बरामद गांजे की मात्रा इतनी अधिक है कि इससे हजारों लोगों तक नशे की आपूर्ति की जा सकती थी। समय रहते कार्रवाई नहीं होती तो यह खेप प्रदेश के कई जिलों में पहुंचकर युवाओं को नशे की गिरफ्त में धकेल सकती थी।

एस्कॉर्ट कार से चल रहा था पूरा ऑपरेशन

जांच में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। तस्करी के दौरान डीसीएम के आगे एक स्विफ्ट डिजायर कार चल रही थी, जिसका काम रास्ते में पुलिस चेकिंग और सुरक्षा एजेंसियों की गतिविधियों पर नजर रखना था। जैसे ही कहीं जांच या बैरिकेडिंग की सूचना मिलती, कार में बैठे लोग पीछे चल रहे डीसीएम चालक को सतर्क कर देते थे।

पुलिस का मानना है कि यह तरीका लंबे समय से अपनाया जा रहा था और इसी वजह से गिरोह कई बार कानून की पकड़ से बच निकलता था।

कोड वर्ड और बदलते सिम कार्ड से चलता था नेटवर्क

पूछताछ में सामने आया है कि गिरोह के सदस्य अपनी पहचान छिपाने के लिए लगातार मोबाइल नंबर और सिम कार्ड बदलते थे। बातचीत के दौरान कोड वर्ड का इस्तेमाल किया जाता था ताकि किसी भी स्थिति में असली कारोबार का पता न चल सके।

बरामद मोबाइल फोन और आईफोन की डिजिटल फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि इससे गिरोह के अन्य सदस्यों, सप्लायरों, फाइनेंसरों और खरीददारों के बारे में अहम सुराग मिल सकते हैं। अंतर्राजिया के नेटवर्क से जुड़े तार

अंतर्राजिया के नेटवर्क से जुड़े तार

प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि यह नेटवर्क केवल सोनभद्र या उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं था। ओडिशा से नशे की खेप मंगाकर विभिन्न राज्यों में सप्लाई करने की संभावना भी जांच के दायरे में है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क का संबंध किन-किन राज्यों और अपराधियों से जुड़ा हुआ है।

प्रदेश में नशे के कारोबार पर बड़ा प्रहार

गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर न्यायालय भेज दिया गया है। पुलिस का दावा है कि इस कार्रवाई से प्रदेश में सक्रिय एक बड़े ड्रग सिंडिकेट को गहरा झटका लगा है।

सोनभद्र पुलिस और एसटीएफ की यह कार्रवाई न केवल करोड़ों रुपये के अवैध कारोबार को रोकने में सफल रही है, बल्कि युवाओं तक पहुंचने वाली नशे की एक बड़ी खेप को भी समय रहते पकड़ लिया गया है। अब जांच एजेंसियों की नजर इस नेटवर्क के उन चेहरों पर है जो पर्दे के पीछे रहकर पूरे कारोबार को संचालित कर रहे थे।

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