अमित मिश्रा
O- रामलीला मंचन में उमड़ी भारी भीड़, जयकारों से गूंजा रामलीला प्रांगण
सोनभद्र। श्री रामलीला समिति सोनभद्र द्वारा आयोजित रामलीला के पाँचवें दिन शुक्रवार को धनुष-यज्ञ, सीता स्वयंवर, राम-सीता विवाह एवं लक्ष्मण-परशुराम संवाद जैसे प्रसंगों का भव्य मंचन किया गया। प्रयागराज से आए कलाकारों ने अपनी अद्भुत प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
रामलीला का दृश्य प्रारंभ हुआ राजा जनक के महल से, जहाँ भगवान शिव का पिनाक धनुष रखा गया था। कथा के अनुसार, जब सीता जी ने बचपन में गोबर लीपते समय सहज भाव से धनुष को स्थानांतरित कर दिया, तब राजा जनक ने यह निश्चय किया कि वे अपनी पुत्री का विवाह उसी से करेंगे, जो इस धनुष को भंग करने का सामर्थ्य रखता हो।
जनकपुर में स्वयंवर की घोषणा सुनकर अनेक पराक्रमी राजा वहाँ पहुँचे। सभी ने धनुष उठाने का प्रयास किया, किन्तु कोई सफल न हो सका। लंकेश रावण भी वहाँ उपस्थित हुआ और असफल रहने पर क्रोधित स्वर में कह गया कि एक दिन सीता को लंका ले जाएगा।
अंततः गुरु विश्वामित्र की आज्ञा से भगवान श्रीराम ने धनुष उठाकर भंग कर दिया। धनुष टूटते ही सीता जी ने प्रभु राम के गले में वरमाला डाल दी। इस दृश्य ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया और पूरा प्रांगण “जय सियाराम” के उद्घोष से गूंज उठा।
इस अवसर पर समिति के संरक्षक जितेंद्र सिंह ने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन आदर्श है, हमें उनके आचरण और मर्यादा का अनुसरण करना चाहिए।
रामलीला के मंचन में समिति अध्यक्ष पवन कुमार जैन, डॉ. धर्मवीर तिवारी, राकेश गुप्ता, प्रमोद गुप्ता, आनंद मिश्रा, विजय कनोडिया, प्रशांत जैन, कीर्तन सिंह, संगम गुप्ता, मनोज जालान, मनीष खंडेलवाल, उमेश केसरी, चंदन केसरी, घनश्याम सिंघल, नरेंद्र गर्ग, विमल अग्रवाल, संतोष चौबे सहित भारी संख्या में रामभक्त उपस्थित रहे। रामलीला के मंचन ने जन-जन को प्रभु श्रीराम की मर्यादा, आदर्श और भक्ति से सराबोर कर दिया।
रामलीला के मंचन ने जन-जन को प्रभु श्रीराम की मर्यादा, आदर्श और भक्ति से सराबोर कर दिया।







