अमित मिश्रा
O- नोडल अधिकारी को बर्खास्त करने की मांग, कार्रवाई न होने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी
सोनभद्र। जिले में कथित रूप से अवैध रूप से संचालित निजी अस्पतालों में लगातार हो रही मौतों के विरोध में सोमवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन का नेतृत्व कांग्रेस के पूर्व प्रवक्ता शत्रुंजय मिश्रा ने किया। बड़ी संख्या में पहुंचे कार्यकर्ताओं ने अवैध अस्पतालों को तत्काल बंद करने, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करने तथा नोडल अधिकारी डॉ. गुलाब शंकर यादव को पद से हटाने की मांग की।
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए शत्रुंजय मिश्रा ने आरोप लगाया कि जिले में कई निजी अस्पताल बिना प्रभावी निगरानी के संचालित हो रहे हैं, जहां अप्रशिक्षित चिकित्सक और स्टाफ मरीजों का इलाज कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे अस्पतालों में लगातार हो रही मौतों के बावजूद स्वास्थ्य विभाग प्रभावी कार्रवाई करने के बजाय केवल औपचारिक जांच कर रहा है। उन्होंने हाल ही में सिंह हेल्थ केयर में प्रसूता और नवजात की मौत का उल्लेख करते हुए कहा कि इस घटना ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अवैध अस्पतालों के खिलाफ शीघ्र कठोर कार्रवाई नहीं हुई तो कांग्रेस व्यापक जनआंदोलन शुरू करेगी।
महिला कांग्रेस की जिलाध्यक्ष ऊषा चौबे ने आरोप लगाया कि जिला अस्पताल से मरीजों को बहला-फुसलाकर निजी अस्पतालों में भेजने का संगठित नेटवर्क सक्रिय है, जिससे मरीजों का आर्थिक शोषण हो रहा है और उपचार में लापरवाही के कारण कई लोगों की जान जा रही है। उन्होंने कहा कि लगातार सामने आ रही घटनाओं ने जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था की वास्तविक स्थिति उजागर कर दी है।
सदर ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष अमरेश देव पांडे ने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुका है। उन्होंने कहा कि अस्पतालों के पंजीकरण और संचालन में भारी अनियमितताएं हैं और विभागीय संरक्षण के कारण कई अस्पताल नियमों की अनदेखी करते हुए संचालित हो रहे हैं।
प्रदर्शन में बसवान गुप्ता, महिला कांग्रेस जिला उपाध्यक्ष शांति विश्वकर्मा, शीला देवी, उर्मिला देवी, रामफल, रीता देवी, रामचंद्र, अमृता देवी सहित सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल रहे।
हालांकि, कांग्रेस नेताओं द्वारा लगाए गए आरोपों पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से समाचार लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।






