अमित मिश्रा
सोनभद्र । महाबोधि विहार, बोधगया में चल रहे मुक्ति आंदोलन के समर्थन में सोमवार को संयुक्त बुद्धिष्ट संगठन जनपद सोनभद्र के तत्वावधान में बौद्ध अनुयायियों ने विशाल जुलूस निकाला। यह जुलूस कलेक्ट्रेट गेट (वाराणसी-शक्तिनगर मार्ग) से शुरू होकर कलेक्ट्रेट परिसर तक पहुँचा। प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन पत्र अपर जिलाधिकारी सोनभद्र को सौंपा। ज्ञापन की प्रतिलिपि प्रधानमंत्री भारत सरकार, राज्यपाल बिहार प्रदेश एवं मुख्यमंत्री बिहार प्रदेश को भी सौंपी गई।
बोधगया टेम्पल एक्ट 1949 को निरस्त करने की मांग
कार्यक्रम संयोजक सुमन्त सिंह मौर्य और डॉ. भागीरथी सिंह मौर्य ने कहा कि 6 जुलाई 1949 को बिहार सरकार द्वारा लागू किए गए बोधगया टेम्पल एक्ट 1949 ने महाबोधि बुद्ध विहार बोधगया (बिहार प्रदेश) के प्रबंधन में विधर्मी समुदाय को शामिल कर बौद्ध विरासत को भारी नुकसान पहुँचाया है। यह स्थान दुनियाभर के बौद्ध अनुयायियों का पवित्र धार्मिक केंद्र है। एक्ट लागू होने के बाद परिसर में कई विधर्मी देवी-देवताओं की मूर्तियाँ स्थापित कर पूजा-पाठ शुरू कर दिया गया है, जो बौद्ध समाज की आस्था और मान्यताओं का अपमान है।
पूरे विश्व में विरोध की लहर
आदित्य मौर्य और समृद्धि कुशवाहा ने बताया कि बीटी एक्ट 1949 को समाप्त करने और महाबोधि बुद्ध विहार का प्रबंधन पूरी तरह से बौद्ध अनुयायियों को सौंपने की माँग को लेकर न केवल भारत में बल्कि दुनियाभर में बौद्ध समाज आंदोलनरत है। सोनभद्र में संयुक्त बुद्धिष्ट संगठन के नेतृत्व में आयोजित धरना-प्रदर्शन में बुद्ध विहार सोनभद्र, बौद्ध समाज सोनभद्र और समतावादी समाज सोनभद्र ने आंदोलन का पुरजोर समर्थन किया।
एफआईआर वापस लेने की मांग
संतोष कुमार पटेल, श्रीपति विश्वकर्मा और एडवोकेट अशोक कुमार कन्नौजिया ने कहा कि महाबोधि बुद्ध विहार मुक्ति आंदोलन में शामिल बौद्ध भिक्षुओं और बुद्धिष्टों पर दर्ज सभी एफआईआर को तत्काल वापस लिया जाए। साथ ही आंदोलनरत लोगों की रिहाई सुनिश्चित की जाए।
बौद्ध अनुयायियों में आक्रोश
धरना-प्रदर्शन के दौरान कीरन सिंह कुशवाहा, विजयमल मौर्य, इंदु मौर्य, डॉ. शिवशंकर राव, मंगला प्रसाद मौर्य, अनिल कुमार समेत सैकड़ों लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन रविरंजन शाक्य ने किया।
– संवाददाता – अमित मिश्रा







