सोनभद्र में जमीन का महाघोटाला: अवैध प्लाटिंग से लेकर फर्जी आदिवासी विवाह तक, प्रशासनिक संरक्षण में फलता भ्रष्ट तंत्र

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अमित मिश्रा

O- बिना अनुमति विकसित हो रही कॉलोनियां, नियमों को ताक पर रखकर हो रहा भूमि व्यवसाय

सोनभद्र। उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में अवैध प्लाटिंग का मामला तेजी से गंभीर होता जा रहा है। जिले के कई इलाकों, विशेषकर राष्ट्रीय व राज्य मार्गों के आसपास, बिना किसी वैधानिक स्वीकृति के कृषि व बंजर भूमि को छोटे-छोटे भूखंडों में काटकर खुलेआम बेचा जा रहा है। इस अवैध गतिविधि से न सिर्फ नियोजन कानूनों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, बल्कि सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान भी उठाना पड़ रहा है।

स्थानीय स्तर पर सामने आई तस्वीरों और स्थल निरीक्षण से स्पष्ट है कि कुछ स्थानों पर बिजली लाइन, सड़क और अन्य बुनियादी ढांचों के आसपास प्लाटिंग कर दी गई है, जबकि इसके लिए न तो विकास प्राधिकरण की अनुमति ली गई और न ही भूमि उपयोग परिवर्तन (लैंड यूज़ चेंज) की प्रक्रिया अपनाई गई।

अवैध प्लाटिंग कालोनियां सोनभद्र

न नियमों का पालन, न कर का भुगतान

सूत्रों के अनुसार, अवैध कॉलोनाइज़र न रजिस्ट्री शुल्क का समुचित भुगतान कर रहे हैं और न ही स्टाम्प ड्यूटी व विकास शुल्क जमा किया जा रहा है। इससे एक ओर सरकार को सीधी आर्थिक क्षति हो रही है, वहीं दूसरी ओर भविष्य में इन अवैध कॉलोनियों में रहने वालों को मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ सकता है।

उत्तर प्रदेश सरकार का एंटी भू-माफिया अभियान सोनभद्र जनपद में ज़मीनी सच्चाई से टकराता दिख रहा है। जिले की कई तहसीलों में अवैध प्लाटिंग, फर्जी बैनामे, कागजी विवाह और राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत से ऐसा संगठित भूमि घोटाला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ओबरा–घोरावल–रॉबर्ट्सगंज-दुद्धी : जहां नियम सिर्फ कागजों में

जमीनी पड़ताल और स्थानीय अभिलेखों के अनुसार-

  • ओबरा तहसील
  • घोरावल तहसील
  • रॉबर्ट्सगंज तहसील
  • दुद्धी तहसील

इन क्षेत्रों में दर्जनों स्थानों पर बिना किसी वैधानिक अनुमति के अंधाधुंध प्लाटिंग जारी है।
न नक्शा स्वीकृत, न लेआउट पास, न भूमि उपयोग परिवर्तन- फिर भी खुलेआम कृषि भूमि को प्लाटों में बदला जा रहा है।

इस अवैध गतिविधि से सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान, किसानों की जमीनों का शोषण, और कानून व्यवस्था की साख पर सीधा प्रहार हो रहा है।

रामगढ़ मामला: जब लेखपाल से हाथापाई और मारपीट हुई, फिर भी माफिया बेखौफ

कुछ माह पूर्व रामगढ़ क्षेत्र में अवैध प्लाटिंग की सूचना पर पहुंचे लेखपाल के साथ मारपीट और हाथापाई की घटना सामने आई थी।
यह घटना साफ संकेत थी कि भूमाफिया इतने सशक्त हो चुके हैं कि वे सरकारी कर्मचारियों पर भी हमला करने से नहीं हिचकते

इसके बावजूद, घटना के बाद कोई ठोस कार्रवाई न होना प्रशासनिक संरक्षण की ओर इशारा करता है।

कोई मामला हो तो बताइए, शिकायतों पर टालमटोल

प्रशासनिक चुप्पी पर उठे सवाल

स्थानीय लोगों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। कुछ स्थानों पर नोटिस जारी होने के बाद भी अवैध प्लाटिंग का काम जारी है, जिससे प्रशासनिक भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि
जब तहसीलदार और एसडीएम स्तर पर पूर्व में शिकायतें की गईं, तो जवाब मिला-

कोई मामला हो तो लिखित में बताइए।

जबकि वास्तविकता यह है कि अवैध प्लाटिंग अधिकारियों की आंखों के सामने चल रही है।

लंबी तैनाती, बढ़ती ‘सेटिंग’

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, ओबरा एसडीएम का लगभग दो वर्षों से दुद्धी एक वर्ष, रॉबर्ट्सगंज एक वर्ष से एक ही स्थान पर बने रहना भी सवालों के घेरे में है। विशेषज्ञ मानते हैं कि लंबे समय तक एक ही तहसील में तैनाती से भ्रष्ट नेटवर्क पनपने की संभावना बढ़ जाती है

दुद्धी तहसील: फर्जी आदिवासीयों से विवाह का सनसनीखेज मामला

भूमि घोटाले की परतें तब और खुलीं, जब दुद्धी तहसील में आदिवासी जमीन हड़पने का चौंकाने वाला मामला सामने आया

सूत्रों के अनुसार-

  • गैर-आदिवासी लोगों ने
  • फर्जी तरीके से आदिवासी महिलाओं से विवाह का सहारा लेकर
  • उनकी जमीनें अपने नाम लिखवा लीं

यह मामला जब मीडिया में उजागर हुआ, तब जाकर प्रशासन हरकत में आया।

मामला गैर हिन्दू समुदाय के लोगो ने आदिवासी महिलाओं से शादी करके बड़ी संख्या मे जमीनों कों अपने नाम करा लिया और आदिवासियों के जमीन की खरीद फ़रोख्त कर करोड़ों रुपये हड़प के साथ आदिवासियों की जमीने हड़प लिया। वही नहीं कनहर सिचाई बांध परियोजना मे डूब मे पढ़ने वाले जमीन का मुवावजा भी ले लिये।

इस प्रकरण की शिकायत भाजपा जिलाध्यक्ष नन्दलाल गुप्ता ने सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लिखित शिकायत मे किया. बिडम्बना देखिये भाजपा का जिलाध्यक्ष, प्रदेश के मुख्यमंत्री के आदेश के बाद भी जिला प्रशासन ने कोई कार्यवाही करने की जहमत नहीं उठाई, इसके इतर हट कर जमीन के घोटालेबाजों से मिलकर साँठ-गाँठ बना लिया। जिलाध्यक्ष नन्दलाल गुप्ता ने बताया अगर अधिकारी नहीं चेतते है तो उनके खिलाफ पुनः मुख्यमंत्री से कार्यवाही के लिए शिकायत करेंगे।

मीडिया दबाव में कार्रवाई

मामला तूल पकड़ने के बाद एसडीएम को स्वयं जमीन की पड़ताल करनी पड़ी, जिसके बाद-

  • फर्जी बैनामे
  • अवैध पट्टे

को निरस्त करना पड़ा

यह घटना साफ दर्शाती है कि यदि मीडिया हस्तक्षेप न करता, तो यह घोटाला दबा ही रह जाता।

भाजपा नेता डॉ. धर्मवीर तिवारी

डॉ0 धर्मवीर तिवारी के गंभीर आरोप

सामाजिक कार्यकर्ता भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष डॉ0 धर्मवीर तिवारी ने आरोप लगाया-

“रॉबर्ट्सगंज तहसील में भूमाफिया हावी हैं और उन्हें तहसील स्तर के अधिकारियों का खुला संरक्षण प्राप्त है।”

“शहरी नियोजन के मामले में डॉ.धर्मवीर तिवारी कहना है कि यदि समय रहते इस पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो आने वाले वर्षों में यह समस्या बड़े शहरी संकट का रूप ले सकती है। अवैध कॉलोनियों का नियमितीकरण भविष्य में सरकार के लिए और बड़ा आर्थिक व सामाजिक बोझ बन सकता है।”

उन्होंने बताया कि- तहसीलदार, कानूनगो, लेखपाल की मिलीभगत से किसानों की जमीनें औने-पौने दामों में खरीदी जा रही हैं, और नियमों को दरकिनार कर प्लाटिंग कराई जा रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि-

  • सर्किट हाउस के पास बिना अनुमति प्लाटिंग चल रही है
  • चंडी तिराहे के पास की प्लाटिंग अवैध है
  • छोटे विवादों को जानबूझकर उलझाकर अवैध संपत्ति अर्जित की गई

प्रभारी मंत्री रविंद्र जायसवाल का बड़ा बयान

मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए जनपद के प्रभारी मंत्री रविंद्र जायसवाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा-

“आप लोगों ने मामला मेरे संज्ञान में डाला है।
मैं जिलाधिकारी से बात कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई कराऊंगा।
दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा,
चाहे वह कितना ही बड़ा आदमी क्यों न हो।”

यह बयान प्रशासन के लिए सीधी जवाबदेही तय करता है।

सबसे बड़ा सवाल

  • जब अवैध प्लाटिंग वर्षों से चल रही है,
  • जब फर्जी आदिवासी विवाह तक जमीन हड़पी जा रही है,
  • और जब कार्रवाई सिर्फ मीडिया दबाव में होती है,

तो क्या सोनभद्र में भूमाफिया तंत्र प्रशासन से भी अधिक ताकतवर हो चुका है?

डॉ0 धर्मवीर तिवारी सहित स्थानीय नागरिकों व सामाजिक संगठनों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि-

  • तहसीलदारों और एसडीएम की भूमिका की स्वतंत्र जांच हो
  • उनकी चल-अचल संपत्तियों की भी जांच कराई जाए
  • एंटी भू-माफिया एक्ट के तहत तत्काल कठोर कार्रवाई की जाए।
  • अवैध प्लाटिंग पर तत्काल रोक लगाई जाए
  • दोषी भू-माफियाओं के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई हो
  • सरकारी भूमि व नियोजन कानूनों की रक्षा सुनिश्चित की जाए

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