अंबेडकर स्टेडियम ओबरा जर्जर अवस्था में

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अभिषेक अग्रहरी

O- खिलाड़ियों के सपनों और दर्शकों की सुरक्षा पर मंडरा रहा खतरा

ओबरा (सोनभद्र) । पूर्वांचल की खेल विरासत का प्रतीक रहा अंबेडकर स्टेडियम, ओबरा आज बदहाली और उपेक्षा का शिकार बन चुका है। वर्ष 1975 के आसपास तापी विद्युत परियोजना, ओबरा के अंतर्गत निर्मित और संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर के नाम पर स्थापित यह स्टेडियम कभी बड़े खेल आयोजनों और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों का केंद्र हुआ करता था, लेकिन वर्तमान समय में इसकी स्थिति खिलाड़ियों और दर्शकों—दोनों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है।

अंबेडकर स्टेडियम परिसर में तीन खेल मैदान उपलब्ध हैं, जहाँ अतीत में रणजी ट्रॉफी सहित जिला, मंडल और पूर्वांचल स्तरीय एथलेटिक प्रतियोगिताओं का सफल आयोजन हो चुका है। इसके बावजूद आज यह स्टेडियम संरचनात्मक रूप से कमजोर होता जा रहा है। दर्शक दीर्घा में बनी सीमेंटेड बैठने की संरचनाएं कई स्थानों पर जर्जर हो चुकी हैं। सीढ़ियों और प्लेटफॉर्म की मजबूती प्रभावित होने से खेल देखने आने वाले दर्शकों के लिए हर समय दुर्घटना का खतरा बना रहता है।

स्टेडियम की बाउंड्री वॉल और प्रवेश मार्ग से जुड़ी व्यवस्थाएं भी लंबे समय से उपेक्षित हैं। नाले से सटे हिस्सों में सुरक्षा के पर्याप्त इंतज़ाम नहीं हैं। उल्लेखनीय है कि पूर्व में दीवार गिरने से दुर्घटना की घटना भी सामने आ चुकी है, इसके बावजूद स्थायी मरम्मत और संरचनात्मक सुदृढ़ीकरण के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए।

खिलाड़ियों के लिए आवश्यक मूलभूत सुविधाओं की स्थिति और भी चिंताजनक है। स्टेडियम परिसर में बने शौचालय लंबे समय से अनुपयोगी पड़े थे, जिन्हें हाल ही में पूरी तरह बंद कर दिया गया है। इसके विकल्प के रूप में न तो अस्थायी व्यवस्था की गई और न ही स्थायी समाधान प्रस्तुत किया गया। नियमित अभ्यास करने वाले खिलाड़ियों, विशेषकर युवाओं और बच्चों को इससे भारी असुविधा झेलनी पड़ रही है।

जानकारी के अनुसार, अंबेडकर स्टेडियम के रखरखाव और मरम्मत के लिए प्रतिवर्ष धनराशि स्वीकृत होती रही है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर उसके अनुरूप सुधार दिखाई नहीं देता। खेल आयोजनों के दौरान विभागीय अधिकारियों की मौजूदगी तो रहती है, पर आयोजन समाप्त होते ही स्टेडियम को फिर उसी हाल में छोड़ दिया जाता है। इससे यह सार्वजनिक खेल परिसर धीरे-धीरे खंडहरनुमा स्वरूप लेता जा रहा है।

खेल और शारीरिक विकास को बढ़ावा देने वाले इस ऐतिहासिक स्टेडियम की वर्तमान दशा प्रशासनिक निगरानी, जवाबदेही और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करती है। स्थानीय खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों का कहना है कि यदि समय रहते मरम्मत और संरचनात्मक सुरक्षा का कार्य नहीं कराया गया, तो यह स्टेडियम किसी बड़े हादसे का गवाह बन सकता है।

अब आवश्यकता इस बात की है कि
अंबेडकर स्टेडियम की तकनीकी जांच कराई जाए,

जर्जर हिस्सों की तत्काल मरम्मत हो,
साफ-सफाई और मूलभूत सुविधाएं बहाल की जाएं, और इसे फिर से खिलाड़ियों के लिए सुरक्षित, गरिमापूर्ण और उपयोगी खेल परिसर के रूप में विकसित किया जाए।

क्योंकि यह केवल एक स्टेडियम नहीं, बल्कि पूर्वांचल के हजारों खिलाड़ियों के सपनों और भविष्य से जुड़ा सवाल है।

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