म्योरपुर (सोनभद्र)। जिले में लगातार बढ़ते प्रदूषण पर रोकथाम न लगाए जाने से पर्यावरण कार्यकर्ताओं में नाराजगी है। देश में ऊर्जाराजधानी के नाम से मशहूर सिंगरौली एवं सोनभद्र से पूरे देश में बिजली आपूर्ति की जा रही है, लेकिन यहां रह रहे लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण पर किसी की निगाह नहीं है।
पर्यावरण कार्यकर्ता रामेश्वर प्रसाद का कहना है कि सिंगरौली परिक्षेत्र में इन दिनों लोगों का रहना दुश्वार हो गया है। ओबरा का चकाड़ी, रेणुका नदी (जीवनदायिनी), अनपरा-शक्तिनगर में उड़ता कोयले एवं राख का धूल, बेलवादह में किसानों के खेतों में औद्योगिक कंपनी द्वारा राख प्रवेश, चिलकाडांड में एनसीएल का ओबी का मलबा और बलियानाला से निकलता कोल माइंस का प्रदूषित पानी जो रिहंद जलाशय में जाकर गिरता है, साथ ही औद्योगिक कंपनी की चिमनियों से निकलने वाला जहरीला धुआं गंभीर खतरा बना हुआ है।प्रदूषण के कारण क्षेत्र में लगातार बीमारियों में इजाफा हुआ है। सिंगरौली परिक्षेत्र का एक्यूआई सबसे ज्यादा आंका गया है, जो लोगों की सेहत के लिए नुकसानदेह है। इसके कारण छोटे बच्चों सहित बड़े लोगों में गंभीर बीमारियां पनप रही हैं।
दक्षिणांचल में भी प्रदूषण का प्रकोप
म्योरपुर ब्लॉक क्षेत्र की विभिन्न ग्राम पंचायतों में भी पानी में आर्सेनिक, मर्करी, फ्लोराइड की अधिक मात्रा होने के कारण लोगों के हाथ-पैर टेढ़े होना, दांतों में पीलापन, शरीर सुन्न हो जाना, मधुमेह, बांझपन जैसे रोगों से लोग ग्रसित हो रहे हैं। दक्षिणांचल की बहुतायत आबादी मध्यम वर्गीय है, जो अपने जीविकोपार्जन तक ही सीमित है और गंभीर बीमारियों का इलाज नहीं करवा पा रही है।









