रवि पाण्डेय / अमित मिश्रा
O- पुराने ई-रवन्ना में डिजिटल हेरफेर कर तैयार हो रहे थे फर्जी परमिट, लैपटॉप, प्रिंटर, 748 सिक्योरिटी पेपर और 1000 से अधिक प्रयुक्त MM-11 बरामद; करोड़ों की संभावित राजस्व चोरी की जांच तेज
सोनभद्र (उत्तर प्रदेश)। सोनभद्र में अवैध खनिज परिवहन से जुड़े एक संगठित सिंडिकेट का खुलासा हुआ है। जिला खान विभाग की नियमित जांच में पकड़े गए दो ट्रकों से शुरू हुई कार्रवाई ने फर्जी MM-11 (ई-रवन्ना) तैयार कर अवैध खनिज परिवहन कराने वाले नेटवर्क की परतें खोल दी हैं। पुलिस ने इस मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि तीन अन्य की तलाश जारी है। छापेमारी में फर्जी परमिट तैयार करने में प्रयुक्त लैपटॉप, प्रिंटर, सैकड़ों सिक्योरिटी पेपर और बड़ी संख्या में प्रयुक्त MM-11 फॉर्म बरामद हुए हैं।

जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह नेटवर्क कब से सक्रिय था, कितने वाहनों के जरिए अवैध परिवहन कराया गया और इससे सरकारी राजस्व को कितना नुकसान पहुंचा। प्रारंभिक जांच में करोड़ों रुपये के संभावित राजस्व नुकसान की आशंका जताई जा रही है। लगभग 200 करोड़ रुपये से अधिक के संभावित राजस्व नुकसान का पहलू भी जांच के दायरे में है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
नियमित जांच में खुला मामला
23 जून 2026 को रॉबर्ट्सगंज स्थित आरटीओ कार्यालय के पास जिला खान विभाग की टीम नियमित जांच कर रही थी। इसी दौरान UP64 AT 5155 और UP64 AT 5156 नंबर के उपखनिज लदे दो ट्रकों को रोककर उनके परिवहन प्रपत्रों की जांच की गई।
ऑनलाइन सत्यापन में प्रस्तुत MM-11 और विभागीय पोर्टल पर उपलब्ध रिकॉर्ड में गंभीर अंतर मिला। दस्तावेजों की वैधता, वाहन विवरण और खनिज संबंधी जानकारी मेल नहीं खा रही थी। यहीं से पूरे मामले की जांच शुरू हुई।
पोर्टल पर मौरंग, कागज पर मिट्टी
एफआईआर के अनुसार जांच में सामने आया कि जिस MM-11 के आधार पर वाहन मिट्टी का परिवहन कर रहा था, उसी दस्तावेज में विभागीय रिकॉर्ड पर मौरंग दर्ज थी। दस्तावेज की वैधता भी समाप्त हो चुकी थी।
इसके अलावा वाहन के चेसिस नंबर की जांच में यह भी सामने आया कि वाहन पर लगी नंबर प्लेट किसी दूसरे वाहन से संबंधित थी। इससे आशंका है कि फर्जी नंबरों और फर्जी परमिटों के सहारे सरकारी निगरानी व्यवस्था को धोखा दिया जा रहा था।
पूछताछ में सामने आया पूरा नेटवर्क
गिरफ्तार चालक दिलीप प्रजापति से पूछताछ में पुलिस को पूरे नेटवर्क की जानकारी मिली। उसके अनुसार पुराने प्रयुक्त ई-फॉर्म C/MM-11 जुटाकर कंप्यूटर के माध्यम से उनमें वाहन संख्या, तिथि, समय और अन्य विवरण बदल दिए जाते थे। इसके बाद उन्हीं दस्तावेजों को सिक्योरिटी पेपर पर प्रिंट कर असली परमिट की तरह इस्तेमाल किया जाता था।
पूछताछ में चालक ने यह भी स्वीकार किया कि उसे प्रत्येक चक्कर के लिए 5,000 रुपये दिए जाते थे।
AK इंटरप्राइजेज पर छापा, पूरा सेटअप बरामद
दिलीप प्रजापति की निशानदेही पर पुलिस ने बिल्ली मारकुंडी स्थित AK इंटरप्राइजेज में छापेमारी की। वहां से Dell कंपनी का लैपटॉप, HP LaserJet Pro प्रिंटर, 748 अप्रयुक्त सिक्योरिटी पेपर, लगभग 1000 प्रयुक्त MM-11 फॉर्म, फर्जी परमिट निर्माण से जुड़े दस्तावेज बरामद किए गए।

जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित फर्म का लाइसेंस 8 जून 2026 तक ही वैध था, लेकिन उसके बाद भी उसी नाम के सिक्योरिटी पेपर और पुराने प्रपत्रों का कथित रूप से इस्तेमाल किया जा रहा था।
सिक्योरिटी पेपर पर भी उठे सवाल
एफआईआर के अनुसार जिन सिक्योरिटी पेपर पर परिवहन प्रपत्र छपे मिले, वे AK इंटरप्राइजेज के नाम निर्गत थे। विभागीय रिकॉर्ड में इनके चोरी होने अथवा दुरुपयोग की कोई सूचना दर्ज नहीं थी। जांच एजेंसियां अब यह पता लगा रही हैं कि सुरक्षा प्रपत्र आरोपियों तक कैसे पहुंचे और उनका उपयोग किस स्तर तक किया गया।
एसपी बोले, किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा
पुलिस अधीक्षक अभिषेक वर्मा ने कहा कि जनपद में अवैध खनन और अवैध खनिज परिवहन के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत रॉबर्ट्सगंज पुलिस, एसओजी और खान विभाग की संयुक्त कार्रवाई में फर्जी C/MM-11 तैयार कर अवैध परिवहन करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया गया।

उन्होंने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की निशानदेही पर फर्जी परमिट तैयार करने में प्रयुक्त उपकरण और दस्तावेज बरामद किए गए हैं। बरामद डिजिटल साक्ष्यों की वैज्ञानिक जांच कराई जा रही है ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।
एसपी ने कहा, “अवैध खनन और राजस्व चोरी से जुड़े किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।”
खान विभाग ने दी सख्त कार्रवाई की चेतावनी
वरिष्ठ खान अधिकारी कमल कश्यप ने कहा कि नियमित जांच के दौरान दोनों ट्रकों के MM-11 फर्जी पाए गए। उन्होंने स्पष्ट किया कि फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से उपखनिज परिवहन करने वालों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी और राजस्व चोरी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

पांच गिरफ्तार, तीन फरार
पुलिस ने इस मामले में दिलीप प्रजापति, अमरनाथ त्रिपाठी उर्फ राजू त्रिपाठी, रितेश कुमार जायसवाल, संतोष कुमार जायसवाल, मोहन उर्फ अजय कुमार को गिरफ्तार किया है।

वहीं अवनीश कुमार पटेल, हिमांशु पाण्डेय, सुरेश कुमार पाठक (प्रोपराइटर, AK इंटरप्राइजेज) अभी फरार हैं।
जांच अब केवल दो ट्रकों तक सीमित नहीं
पुलिस और खान विभाग अब यह जांच कर रहे हैं कि क्या इसी तरीके से लंबे समय से बड़े पैमाने पर अवैध खनिज परिवहन कराया जा रहा था। बरामद लैपटॉप, प्रिंटर और दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच के जरिए यह पता लगाया जा रहा है कि कितने फर्जी MM-11 तैयार किए गए, किन-किन वाहनों का इस्तेमाल हुआ और सरकारी राजस्व को वास्तविक नुकसान कितना पहुंचा।
यदि जांच में अब तक सामने आए आरोप प्रमाणित होते हैं, तो यह मामला उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े MM-11 फर्जीवाड़ा और अवैध खनन मामलों में शामिल हो सकता है। हालांकि, राजस्व नुकसान का अंतिम आकलन जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।






