अनिल कुमार
O- खनन माफियाओं पर शिकंजा कसने वाले अधिकारी को जान से मारने की धमकी! सोनभद्र में अवैध खनन नेटवर्क पर बड़ा खुलासा
गाजीपुर / वाराणसी (उत्तर प्रदेश) । उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में अवैध खनन और ओवरलोडिंग के खिलाफ चल रही कार्रवाई ने एक गंभीर मोड़ ले लिया है। खान विभाग के एक अधिकारी द्वारा पुलिस को दिए गए शिकायती पत्र में आरोप लगाया गया है कि अवैध खनन और ओवरलोड वाहनों पर कार्रवाई के दौरान उन्हें जान से मारने की कोशिश की गई तथा सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाई गई। मामले में एफआईआर दर्ज कराने की मांग की गई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार 17 जून 2026 की रात खनन विभाग की टीम कैथी टोल प्लाजा के पास वाहनों की जांच कर रही थी। जांच के दौरान लगभग 50 वाहनों की जांच की गई, जिनमें कई वाहनों पर कार्रवाई की गई। इसी दौरान एक संदिग्ध वाहन को बिना वैध परमिट के खनिज परिवहन करते हुए पकड़ा गया। शिकायत में बताया गया है कि वाहन संख्या BR45GB0897 की जांच के दौरान कई अनियमितताएं सामने आईं।
खान अधिकारी के शिकायत के अनुसार, कुछ देर बाद गाजीपुर की ओर से आ रहे ओवरलोड वाहनों को रोकने का प्रयास किया गया। आरोप है कि वाहन चालकों ने वाहन नहीं रोके और जांच टीम के निर्देशों की अनदेखी करते हुए आगे बढ़ने का प्रयास किया। इसी दौरान एक वाहन ने जांच दल की बोलेरो गाड़ी को पीछे से टक्कर मार दी। अधिकारी ने आरोप लगाया है कि यह घटना केवल दुर्घटना नहीं बल्कि जांच टीम को नुकसान पहुंचाने और कार्रवाई रोकने की कोशिश थी।

शिकायत में वाहन संख्या UP61AT3561 का भी उल्लेख किया गया है, जिस पर कथित रूप से भारी मात्रा में ओवरलोड खनिज परिवहन किए जाने का आरोप है। पत्र के अनुसार यह वाहन पहले भी कई बार ओवरलोडिंग और बिना परमिट संचालन के मामलों में चालानित हो चुका है। खान विभाग का दावा है कि यह वाहन “हैबिचुअल ऑफेंडर” की श्रेणी में आता है और इसके खिलाफ पूर्व में भी कार्रवाई की जा चुकी है।

खान अधिकारी ने आरोप लगाया है कि पूर्व में हुई कार्रवाई के बाद संबंधित लोगों द्वारा उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई थी। शिकायत में यह भी कहा गया है कि खनन और परिवहन नियमों का लगातार उल्लंघन करने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान सरकारी कर्मचारियों की सुरक्षा पर भी खतरा उत्पन्न हो गया है।
पत्र में यह भी उल्लेख है कि टीएसवाई बोर्ड और अन्य विभागों द्वारा जिले में अवैध खनन तथा पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन के मामलों में कई वाहन पकड़े जा चुके हैं। इसके बावजूद कथित रूप से अवैध खनिज परिवहन का नेटवर्क सक्रिय है और विभागीय कार्रवाई को प्रभावित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
खनन अधिकारी ने पुलिस से जान से मारने की कोशिश, सरकारी कार्य में बाधा, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, अवैध खनन, ओवरलोडिंग और संबंधित विधिक धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर कठोर कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में एमएमडीआर एक्ट, उत्तर प्रदेश माइनर मिनरल कंसेशन नियमावली, पब्लिक प्रॉपर्टी डैमेज एक्ट तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं का हवाला दिया गया है।
खान अधिकारी प्रशांत शर्मा का बयान
खान अधिकारी प्रशांत शर्मा ने कहा कि अवैध खनन और ओवरलोडिंग के खिलाफ विभाग की कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच के दौरान कुछ वाहन चालकों और संबंधित लोगों ने सरकारी कार्रवाई में बाधा डालने का प्रयास किया तथा विभागीय टीम को डराने-धमकाने की कोशिश की।
प्रशांत शर्मा ने कहा, “खनिज संपदा राज्य की अमूल्य धरोहर है और इसके अवैध दोहन को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जांच के दौरान हमारी टीम पर वाहन चढ़ाने और जान से मारने की कोशिश की गई, जो बेहद गंभीर मामला है। हमने संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की है। कानून से ऊपर कोई नहीं है और अवैध खनन में संलिप्त लोगों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा।”
उन्होंने कहा कि ओवरलोडिंग, बिना परमिट खनिज परिवहन और पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन के मामलों में दोषियों को किसी भी प्रकार की राहत नहीं दी जाएगी। विभाग सभी साक्ष्यों को पुलिस और प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत कर रहा है तथा दोषियों को न्याय के कटघरे तक पहुंचाने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे।
“अवैध खनन माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि अब वे सरकारी अधिकारियों को भी निशाना बनाने लगे हैं, लेकिन कानून का शिकंजा और सख्त होगा” – प्रशांत शर्मा, खान अधिकारी, वाराणसी ।
यह मामला केवल एक अधिकारी पर कथित हमले का नहीं, बल्कि उस व्यापक चुनौती का प्रतीक बनता जा रहा है जिसमें देश के खनन क्षेत्रों में अवैध खनन, ओवरलोड परिवहन और प्रशासनिक कार्रवाई के बीच टकराव लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। अब सबकी निगाहें पुलिस जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं कि आरोपों की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और दोषियों के खिलाफ क्या कदम उठाए जाते हैं।






