एकल ग्रामोत्थान फाउंडेशन ने किसानों को दिया जैविक खेती का प्रशिक्षण

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अशोक कुमार बोले- रासायनिक खेती के दुष्प्रभाव से बचने के लिए प्राकृतिक खेती जरूरी, गौ-आधारित खेती से बढ़ेगी मिट्टी की उर्वरता

म्योरपुर, सोनभद्र। एकल ग्रामोत्थान फाउंडेशन (आईवीडी) म्योरपुर द्वारा बुधवार को ग्राम काशीकुड़ (आरंगपानी) में गौ-आधारित प्राकृतिक खेती एवं ग्राम उद्योग को बढ़ावा देने के लिए एक दिवसीय जैविक खेती जागरूकता व प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में किसानों को गोबर से केंचुआ खाद यानी वर्मी कम्पोस्ट बनाना, गोमूत्र व कषैले पत्तों से प्राकृतिक कीटनाशक तैयार करना सिखाया गया। साथ ही गोबर, गोमूत्र, गुड़, बेसन व शुद्ध मिट्टी से जीवामृत बनाने की व्यावहारिक विधि बताई गई। प्रशिक्षकों ने बताया कि जीवामृत के प्रयोग से मिट्टी में सूक्ष्म जीव सक्रिय होते हैं, जिससे मृदा की उर्वरता-गुणवत्ता सुधरती है और फसल उत्पादन बढ़ता है। बैठक में जैविक खेती, जैव-वन्य संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण व गौ-पालन के महत्व पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि रासायनिक खेती के दुष्प्रभाव से बचने और आने वाली पीढ़ियों को जहरमुक्त धरती देने के लिए प्राकृतिक खेती अपनाना समय की मांग है। एकल ग्रामोत्थान फाउंडेशन म्योरपुर संच के लगभग 30 गांवों में प्रशिक्षकों के माध्यम से लगातार किसानों को प्रशिक्षण दे रहा है। संस्था का उद्देश्य जैविक कृषि के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, पर्यावरण संरक्षण व ग्रामीण आत्मनिर्भरता मजबूत करना है। कार्यक्रम में पी-4 जोन कोऑर्डिनेटर अशोक कुमार, किसान प्रशिक्षक श्यामसुंदर, मोबिलाइजर बुद्धिनारायण, किसान मित्र विजय कुमार, अमरेश कुमार, विभा जोसेफ, केवल प्रसाद सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण किसान मौजूद रहे।

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