रवि पाण्डेय / अमित मिश्रा
O- हीटवेव, प्रदूषण और जलवायु संकट के बीच योगी सरकार का ऐतिहासिक ग्रीन मिशन, ‘मिशन छाया’ से सड़कों पर उतरेगी हरियाली की ठंडी सांस
सोनभद्र (उत्तरप्रदेश) । जब पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन, बढ़ते तापमान और हीटवेव के भयावह संकट से जूझ रही है, तब उत्तर प्रदेश की Yogi Adityanath सरकार ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ऐसा कदम उठाया है, जिसे आने वाले वर्षों में “हरित क्रांति के नए अध्याय” के रूप में याद किया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह अभियान पूरी गंभीरता से लागू हुआ, तो सोनभद्र जैसे औद्योगिक और खनन क्षेत्र में पर्यावरणीय संतुलन मजबूत होगा, भूजल संरक्षण में मदद मिलेगी और आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ हवा मिल सकेगी।
देश के सबसे महत्वपूर्ण पर्यावरणीय अभियानों में शामिल होने जा रहे वृक्षारोपण अभियान 2026 के तहत अकेले सोनभद्र जिले में 1 करोड़ 61 लाख 69 हजार 686 पौधे लगाने का लक्ष्य तय किया गया है। यह सिर्फ पौधरोपण नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित भविष्य देने का संकल्प माना जा रहा है।
विश्व पर्यावरण दिवस, 5 जून से शुरू होने वाला यह अभियान पर्यावरण बचाने की सरकारी औपचारिकता नहीं, बल्कि धरती को फिर से सांस देने की कोशिश बनता दिख रहा है। जिलेभर में 16 लाख 45 हजार फलदार और छायादार पौधे रोपे जाएंगे, जबकि गांव-गांव, स्कूलों, सड़कों, मंदिर परिसरों और सार्वजनिक स्थलों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
डाला रेंज स्थित मां वैष्णो देवी मंदिर परिसर में मुख्य कार्यक्रम आयोजित होगा, जहां पर्यावरण संरक्षण और पौधों की सुरक्षा को लेकर जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा।

जिलाधिकारी चर्चित गौंड ने बताया कि “इस अभियान में वन विभाग के साथ 22 अन्य विभागों को भी लक्ष्य आवंटित किया गया है। वन एवं उद्यान विभाग की पौधशालाओं में पौधों को तैयार किया जा चुका है और बड़े पैमाने पर रोपण की तैयारी अंतिम चरण में है।”
‘मिशन छाया’: तपती सड़कों पर हरियाली की ठंडी ढाल
प्रदेश सरकार ने हीटवेव के बढ़ते खतरे को देखते हुए “मिशन छाया” शुरू किया है। योजना का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि सड़कों को प्राकृतिक एयर-कूलर में बदलना है।
सड़कों के दोनों किनारों पर हजारों छायादार पौधे लगाए जाएंगे। जब ये पौधे विशाल वृक्ष बनेंगे, तब वे न केवल यात्रियों को राहत देंगे बल्कि सड़क किनारे तापमान कम कर हीटवेव के प्रभाव को भी घटाएंगे। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह मॉडल आने वाले समय में पूरे देश के लिए उदाहरण बन सकता है।
सोनभद्र बनेगा ‘ग्रीन पावर हाउस’
वन विभाग के प्रभागीय वनाधिकारी आशुतोष जायसवाल ने बताया कि इस महाअभियान में वन विभाग के साथ 22 अन्य विभागों को भी जिम्मेदारी सौंपी गई है। वन एवं उद्यान विभाग की पौधशालाओं में लाखों पौधे तैयार किए जा चुके हैं।
सरकार का लक्ष्य सिर्फ रिकॉर्ड बनाना नहीं, बल्कि “रोपे गए हर पौधे को वृक्ष बनाने” का है। इसके लिए निगरानी, सुरक्षा और जनभागीदारी पर विशेष फोकस किया जा रहा है।
यह सिर्फ आंकड़ा नहीं, भविष्य बचाने का संकल्प है
- 1.61 करोड़ पौधे
- 22 विभागों की भागीदारी
- 16 लाख 45 हजार पौधों से विश्व पर्यावरण दिवस की शुरुआत
- गांव से शहर तक हरित चेतना अभियान
- सड़कों को ‘ग्रीन कॉरिडोर’ में बदलने की तैयार
इन विभागों को मिला पौधरोपण का लक्ष्य
वन विभाग — 10,21,800
ग्राम्य विकास विभाग — 31,95,286
कृषि विभाग — 7,18,000
उद्यान विभाग — 4,44,000
पर्यावरण विभाग — 4,41,000
पंचायतीराज विभाग — 3,34,800
शिक्षा विभाग — 1,38,900
नगर विकास — 74,600
जल शक्ति विभाग — 50,900
रेलवे विभाग — 33,000
उद्योग विभाग — 32,700
स्वास्थ्य विभाग — 29,000
रेशम विभाग — 28,000
गृह विभाग — 26,600
औद्योगिक विकास — 25,900
पशुपालन विभाग — 19,800
ऊर्जा विभाग — 18,500
सहकारिता विभाग — 18,500
आवास विकास — 16,900
रक्षा विभाग — 13,000
श्रम विभाग — 8,300
परिवहन विभाग — 6,300
आज जब दुनिया “ग्लोबल वार्मिंग” पर सम्मेलनों और भाषणों में उलझी है, तब धरातल पर करोड़ों पौधे लगाने की यह पहल भारत की पर्यावरणीय सोच को वैश्विक मंच पर नई पहचान दे सकती है।
धरती को फिर से हरा बनाने की तैयारी

मुख्य विकास अधिकारी जाग्रति अवस्थी ने बताया की “यह अभियान सिर्फ पेड़ लगाने का सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि उस भारत की तस्वीर है जो विकास और प्रकृति के बीच संतुलन बनाकर भविष्य की राह तैयार करना चाहता है।”
“यदि हर लगाया गया पौधा जीवित रहा, तो आने वाले वर्षों में यही पौधे हीटवेव से लड़ेंगे, बारिश को बचाएंगे, हवा को शुद्ध करेंगे और आने वाली पीढ़ियों को जीवन देंगे।”






