डिजिटल भारत की नई दस्तक: सोनभद्र से शुरू हुई जनगणना 2027 की ऐतिहासिक मुहिम, अब जनता खुद करेगी अपनी गणना

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रवि पाण्डेय / अमित मिश्रा

O- सीडीओ जागृति अवस्थी ने खुद जनता के बीच  पहुंचकर शुरू कराया स्वगणना अभियान, छात्र-छात्राओं से लेकर आशा कार्यकर्ताओं तक को जोड़ा गया

सोनभद्र (सोनभद्र)। देश के प्रशासनिक इतिहास में पहली बार तकनीक और जनभागीदारी को केंद्र में रखकर शुरू की जा रही जनगणना 2027 की प्रक्रिया ने उत्तर प्रदेश के सोनभद्र से नई ऊर्जा और नई दिशा हासिल की है। बुधवार को जिले में मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना के प्रथम चरण का भव्य शुभारम्भ हुआ, जहां प्रशासनिक अधिकारियों ने इसे केवल सरकारी प्रक्रिया नहीं बल्कि “राष्ट्र निर्माण का महाअभियान” बताया।

जिले में इस ऐतिहासिक अभियान की शुरुआत मुख्य विकास अधिकारी जागृति अवस्थी की मौजूदगी में हुई। जिला पंचायत राज अधिकारी नमिता शरण एवं जिला विकास अधिकारी हेमंत सिंह ने पुष्पगुच्छ भेंट कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। इसके बाद सीडीओ जागृति अवस्थी स्वयं आम नागरिकों के बीच पहुंचीं और मोबाइल ऐप के माध्यम से स्वगणना भरकर लोगों को पूरी प्रक्रिया समझाई।

इस दौरान प्रशासन ने घोषणा की कि 7 मई से 21 मई तक पूरे जिले में व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा, ताकि गांव से शहर तक हर परिवार इस राष्ट्रीय अभियान का हिस्सा बन सके।

देश की योजनाओं का आधार बनेगी यह जनगणना

भारत में जनगणना केवल जनसंख्या गिनने की प्रक्रिया नहीं मानी जाती, बल्कि यही आंकड़े आने वाले वर्षों की सरकारी नीतियों, विकास योजनाओं, संसाधनों के वितरण और सामाजिक ढांचे की दिशा तय करते हैं।

कितने स्कूल बनेंगे, कहां अस्पतालों की जरूरत है, किन इलाकों में सड़क, बिजली और पेयजल की कमी है, कितने युवाओं को रोजगार योजनाओं से जोड़ा जाना चाहिए, इन सभी सवालों का जवाब जनगणना के आंकड़ों से निकलता है।

यही वजह है कि इस बार सरकार तकनीक आधारित “स्वगणना मॉडल” पर विशेष जोर दे रही है, जिसमें नागरिक स्वयं अपने मोबाइल नंबर के माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज करेंगे।

“यह केवल डेटा नहीं, विकसित भारत की नींव है” : जागृति अवस्थी

मुख्य विकास अधिकारी जागृति अवस्थी ने कहा कि जनगणना 2027 देश को डिजिटल प्रशासन की दिशा में आगे ले जाने वाला ऐतिहासिक कदम है।

उन्होंने कहा

“आज विकास योजनाएं डेटा आधारित हो चुकी हैं। यदि आंकड़े सही होंगे तभी योजनाएं सही लोगों तक पहुंचेंगी। स्वगणना की प्रक्रिया नागरिकों को सीधे राष्ट्र निर्माण से जोड़ने का माध्यम बनेगी। यह केवल गिनती नहीं बल्कि विकसित भारत की मजबूत नींव है।”

उन्होंने बताया कि यदि कोई व्यक्ति किराये के मकान में रह रहा है तो उसे उसी स्थान से स्वगणना भरनी होगी, न कि अपने पैतृक निवास से। इससे वास्तविक आबादी और संसाधनों की जरूरत का सटीक आंकलन हो सकेगा।

“सोनभद्र को बनाएंगे डिजिटल जागरूकता का मॉडल” : हेमंत सिंह

जिला विकास अधिकारी हेमंत सिंह ने कहा कि इस अभियान में युवाओं की भागीदारी सबसे अहम होगी।

उन्होंने बताया

“डिग्री कॉलेजों और इंटर कॉलेजों के छात्र-छात्राओं को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। ये छात्र अपने गांवों और मोहल्लों में लोगों को स्वगणना भरने में मदद करेंगे। हमारा लक्ष्य है कि सोनभद्र पूरे प्रदेश में डिजिटल जनजागरूकता का मॉडल बने।”

उन्होंने कहा कि प्रशासन गांव स्तर तक अभियान पहुंचाने के लिए आशा कार्यकर्ताओं, एएनएम, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों, पंचायत सहायकों, रोजगार सेवकों और स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को भी सक्रिय रूप से जोड़ रहा है।

“हर नागरिक की सही जानकारी ही विकास की असली ताकत” : नमिता शरण

जिला पंचायत राज अधिकारी नमिता शरण ने कहा कि सही जनगणना ही सरकार को सही दिशा देती है।

उन्होंने कहा

“स्वगणना एक राष्ट्रीय दायित्व है। यदि आंकड़े सटीक होंगे तभी सरकार की योजनाएं प्रभावी होंगी। शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, आवास और रोजगार जैसी योजनाओं का भविष्य इन्हीं आंकड़ों पर निर्भर करता है।”

उन्होंने लोगों से अपील की कि वे किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक प्रक्रिया के तहत अपनी जानकारी सही तरीके से दर्ज करें।

गांव-गांव घर – घर चलेगा जागरूकता अभियान

प्रशासन की योजना के अनुसार आगामी दिनों में पूरे जिले में पोस्टर, बैनर, सोशल मीडिया, प्रचार वाहन और जनसंपर्क कार्यक्रमों के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा।

विद्यालयों, पंचायत भवनों और सार्वजनिक स्थलों पर विशेष शिविर लगाए जाएंगे, जहां लोगों को मोबाइल ऐप के माध्यम से स्वगणना भरने का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल भागीदारी बढ़ाने की दिशा में यह अभियान एक बड़ा सामाजिक परिवर्तन साबित हो सकता है।

सोनभद्र से उठी डिजिटल लोकतंत्र की नई आवाज

खनिज संपदा और आदिवासी संस्कृति के लिए पहचाने जाने वाला सोनभद्र अब डिजिटल प्रशासन और जनभागीदारी की नई पहचान बनाने की ओर बढ़ रहा है।

जिस तरह प्रशासन ने युवाओं, महिलाओं और ग्राम स्तरीय नेटवर्क को इस अभियान से जोड़ा है, उसने यह संदेश दिया है कि अब विकास केवल सरकारी फाइलों में नहीं बल्कि जनता की सक्रिय भागीदारी से तय होगा।

जनगणना 2027 का यह अभियान आने वाले समय में देशभर के लिए एक मॉडल बन सकता है, जहां “जनता ही डेटा की भागीदार” होगी और वही विकसित भारत की दिशा तय करेगी।

कार्यक्रम में उपायुक्त श्रम रोजगार रविन्द्र वीर, बीएसए मुकुल आनंद पाण्डेय, डीपीओ विनीत सिंह, दिव्यांग कल्याण अधिकारी विद्या सिंह, डीसी एनआरएलएम सरिता सिंह, जिला उद्योग अधिकारी, जिला समाज कल्याण अधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह भदौरिया उपस्थित रहे।

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