राजन
विंध्याचल धाम में निभायी गयी सदियों पुरानी परंपरा
मीरजापुर(उत्तर प्रदेश)। चैत्र नवरात्रि के समापन के बाद पूर्णिमा के दूसरे दिन सदियों पुरानी परंपरा को पावन विंध्याचल धाम में मां विंध्यवासिनी का पारंपरिक घंटा स्नान श्रद्धा और भक्ति के साथ सम्पन्न किया गया।
इस अवसर पर विंध्याचल मंदिर परिसर में स्थापित सभी देवी-देवताओं का गंगाजल से स्नान कराया गया। पंडा समाज, स्थानीय लोगों और दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने घड़ों में गंगा नदी का पवित्र जल लाकर पूरे मंदिर परिसर में स्थापित देव विग्रहों का विधि-विधान से अभिषेक किया। घंटा स्नान के दौरान मंदिर परिसर भक्ति और उत्साह से सराबोर रहा। ढोल-नगाड़ों की गूंज और भक्तों के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो उठा। पारंपरिक वाद्य यंत्र बजाने वाले कलाकारों ने भी अपनी प्रस्तुति से मां के प्रति श्रद्धा अर्पित करेंगे ।
इस घंटा स्नान के पश्चात मंदिर के कपाट कुछ समय के लिए बंद कर दिए गए। शाम को पुनः आरती के बाद मां विंध्यवासिनी का भव्य श्रृंगार किया गया और छप्पन भोग अर्पित कर विधि-विधान से माँ की निकासी की जाऐगी ।
यह परंपरा विंध्याचल के पंडा समाज द्वारा पीढ़ी दर पीढ़ी निभाई जा रही है, जो क्षेत्र की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक है।






