सामूहिक विवाह में 304 जोड़े बने जीवनसाथी, लाभार्थियों को बाहर करने के आरोप से सियासी विवाद

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अमित मिश्रा

O- ऑनलाइन चयन के बावजूद कई गरीब परिवारों के नाम शादी से ठीक पहले काटे जाने का परिजनों ने लगाया आरोप।

सोनभद्र। उत्तर प्रदेश के उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत आयोजित भव्य कार्यक्रम राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया है। रॉबर्ट्सगंज के उर्मौरा स्थित डायट परिसर में एक ही मंडप में 304 जोड़े विवाह बंधन में बंधे, जिसमें 302 हिंदू और 2 मुस्लिम जोड़ों का पारंपरिक रीति-रिवाज से विवाह संपन्न कराया गया।

सरकार की ओर से नवविवाहित जोड़ों को आर्थिक सहायता और गृहस्थी का सामान भी वितरित किया गया, लेकिन इस आयोजन की चमक के बीच गंभीर आरोपों ने पूरे कार्यक्रम पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

लाभार्थियों को बाहर करने के आरोप, कई परिवारों की टूटी उम्मीदें

मारकुंडी ग्राम पंचायत से सामने आई शिकायतों के अनुसार, कई पात्र लाभार्थियों को अंतिम समय में सूची से बाहर कर दिया गया। ग्राम प्रधान उदयम सिंह यादव ने आरोप लगाया कि ऑनलाइन चयन के बावजूद कई गरीब परिवारों के नाम शादी से ठीक पहले काट दिए गए।

इस फैसले से कई परिवारों की तैयारियां अधूरी रह गईं और जिन घरों में शहनाई बजनी थी, वहां सन्नाटा पसर गया। यह मामला अब प्रशासनिक पारदर्शिता और योजना के क्रियान्वयन पर सवाल खड़ा कर रहा है।

राजनीतिक तूल: मंत्री और विधायक नदारद, बयानबाजी तेज

कार्यक्रम को लेकर सियासी माहौल भी गरमा गया। मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने वाले राज्यमंत्री संजीव कुमार गोंड कार्यक्रम में नहीं पहुंचे। साथ ही जिले का कोई भी भारतीय जनता पार्टी विधायक आयोजन में नजर नहीं आया।

इस पर रॉबर्ट्सगंज से सांसद छोटेलाल खरवार ने मंच से तंज कसते हुए कहा कि “जो नेता जनता के कार्यक्रमों से दूर रहते हैं, वे 2027 के बाद नजर नहीं आएंगे।” उन्होंने दिशा बैठकों में भी जनप्रतिनिधियों की अनुपस्थिति का मुद्दा उठाया।

प्रशासन का जवाब: जांच का आश्वासन

मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्य विकास अधिकारी जागृति अवस्थी ने कहा कि उन्हें फिलहाल इस शिकायत की जानकारी नहीं है, लेकिन पूरे प्रकरण की जांच कराई जाएगी। साथ ही यह भी आश्वासन दिया गया कि वंचित जोड़ों को 26 मार्च को होने वाले अगले कार्यक्रम में प्राथमिकता दी जाएगी।

सांस्कृतिक रंग भी, लेकिन विवाद हावी

कार्यक्रम के दौरान सांसद छोटेलाल खरवार ने पारंपरिक विवाह गीत गाकर माहौल को सांस्कृतिक रंग देने की कोशिश की, लेकिन लाभार्थियों को बाहर किए जाने के आरोप और जनप्रतिनिधियों की गैरमौजूदगी ने पूरे आयोजन को विवादों में ला दिया।

योजना पर सवाल, राजनीति हावी

सोनभद्र का यह आयोजन एक ओर जहां सरकारी योजना की सफलता को दर्शाता है, वहीं दूसरी ओर लाभार्थियों के चयन में कथित गड़बड़ी और सियासी बयानबाजी यह संकेत देती है कि विकास योजनाएं अब राजनीतिक विवादों से अछूती नहीं रहीं।

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