सोनभद्र में बड़ा घोटाला! बिना काम किए मजदूरों के नाम पर लाखों का भुगतान

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अमित मिश्रा

O- ग्राम प्रधान पर गंभीर आरोप

O- फर्जी मजदूरी दिखाकर निकाला गया पैसा, शिकायत पत्र में 5 लोगों के नाम उजागर- जांच और कार्रवाई की मांग तेज

मद्धूपुर (सोनभद्र) । जनपद सोनभद्र के एक गांव में ग्राम पंचायत स्तर पर भ्रष्टाचार का गंभीर मामला सामने आया है, जहां बिना काम किए ही मजदूरों के नाम पर भुगतान निकालने का आरोप लगा है। इस संबंध में जिलाधिकारी को लिखे गए एक शिकायत पत्र ने पूरे मामले को उजागर कर दिया है।

शिकायतकर्ता कृष्ण कुमार (निवासी ग्राम आमडीह, विकास खंड करमा) ने आरोप लगाया है कि ग्राम प्रधान द्वारा पंचायत के विकास कार्यों में बड़े पैमाने पर फर्जी मजदूरी दर्शाकर धनराशि का गबन किया गया है।

क्या है पूरा मामला?

शिकायत पत्र के अनुसार, जिन लोगों को मजदूर दिखाकर भुगतान किया गया, वे वास्तव में मजदूरी का कोई कार्य नहीं करते हैं। इनमें से कुछ लोग ई-रिक्शा चलाते हैं, कुछ दुकान या मंडी का काम करते हैं, जबकि कुछ खेती-बाड़ी या अन्य व्यवसाय में लगे हैं।

फर्जी भुगतान पाने वाले प्रमुख नाम:

  • चन्द्रजीत (ई-रिक्शा चालक व कृषि कार्य)
  • अजीत कुमार (किराना व मंडी कार्य)
  • उदयनारायण (JCB कार्य से जुड़ा)
  • जितेश (खेती कार्य)
  • महेन्द्र व अंकित कुमार (अन्य निजी कार्य)

कैसे हुआ घोटाला?

शिकायत में बताया गया है कि वर्ष 2021 से 2025 तक इन लोगों के खातों में मजदूरी के नाम पर लगातार भुगतान किया गया।
विशेष रूप से 21 मार्च 2023 के एक वाउचर (संख्या XVFC/2022-23/P/24) का उल्लेख किया गया है, जिसमें हजारों रुपये का भुगतान दर्शाया गया है।

यह पूरा मामला पंचायती राज अधिनियम, मनरेगा अधिनियम और वित्तीय नियमावली का स्पष्ट उल्लंघन बताया गया है।

क्या मांग की गई है?

शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी से मांग की है कि:

  • पंचायत में हुए कार्यों की स्थलीय और अभिलेखी जांच कराई जाए
  • फर्जी मजदूरों के नाम पर निकाली गई धनराशि की रिकवरी हो
  • दोषी ग्राम प्रधान और संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कानूनी व विभागीय कार्रवाई की जाए

स्थानीय स्तर पर बढ़ा आक्रोश

इस मामले के सामने आने के बाद ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। लोगों का कहना है कि असली मजदूरों को काम और मजदूरी नहीं मिल रही, जबकि कागजों में फर्जी नामों से पैसा निकाला जा रहा है।

यह मामला सिर्फ एक गांव तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर में चल रही ग्रामीण विकास योजनाओं में पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है।
मनरेगा जैसे बड़े कार्यक्रमों में यदि इस तरह की गड़बड़ियां हो रही हैं, तो यह सिस्टम की निगरानी पर गंभीर सवाल है।

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