अभिषेक अग्रहरी
ओबरा (सोनभद्र)। उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में डाला–ओबरा मुख्य मार्ग के विशेष मरम्मत और नाला निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यह वही मार्ग है जिसका लोकार्पण प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा 15 नवंबर 2025 को किया गया था।

करीब ₹4 करोड़ 93 लाख की लागत से बने इस प्रोजेक्ट को लेकर अब स्थानीय स्तर पर असंतोष सामने आ रहा है। ग्रामीणों और राहगीरों का आरोप है कि निर्माण कार्य में कई तकनीकी मानकों की अनदेखी की गई है, जिससे सड़क की गुणवत्ता और टिकाऊपन पर सवाल उठ रहे हैं।
आवागमन में बाधा, सड़क पर डाला मलबा
स्थानीय लोगों के अनुसार, नाला निर्माण के दौरान निकाली गई मिट्टी और मलबा सड़क किनारे व्यवस्थित तरीके से हटाने के बजाय उसी पर डाल दिया गया है। इसके चलते कई स्थानों पर सड़क संकरी हो गई है और वाहनों का आवागमन प्रभावित हो रहा है।

तकनीकी खामियों के आरोप
निर्माण कार्य में सोलिंग (पत्थर बिछाने की मानक प्रक्रिया) के बजाय छोटी गिट्टी (हाफ इंची) के अधिक उपयोग का आरोप लगाया जा रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इससे सड़क की मजबूती और दीर्घकालिक स्थायित्व प्रभावित हो सकता है।
सुरक्षा मानकों की अनदेखी
मौके पर चेतावनी संकेत, बैरिकेडिंग और सुरक्षा इंतजामों की कमी भी सामने आई है, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों को जोखिम उठाना पड़ रहा है।

जांच की मांग तेज
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे प्रोजेक्ट की तकनीकी जांच कराई जाए और जिम्मेदार एजेंसियों की जवाबदेही तय की जाए। उनका कहना है कि लोकार्पण के बाद भी यदि कार्यों में खामियां सामने आ रही हैं, तो यह न सिर्फ लापरवाही बल्कि सरकारी धन के दुरुपयोग का संकेत है।
प्रशासन की अगली कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं।






